Kushinagar राजापाकड़/कुशीनगर: दुदही विकास खंड के ग्राम पंचायत दुमही के बंगरा रामबक्स राय टोला स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय श्री शतचंडी महायज्ञ व रामकथा अमृत वर्षा के दूसरे दिन अयोध्याधाम से पधारे प्रसिद्ध कथा प्रवक्ता स्वामी डॉ. उद्धव शरण महाराज ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह प्रसंग की दिव्य कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
कथावाचक ने कहा कि माता सती के आत्मदाह के बाद भगवान शिव गहरी तपस्या में लीन हो गए थे। उधर, देवी सती ने हिमालयराज के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया और भगवान शिव को पुनः पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की। माता पार्वती की निष्ठा और तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी रूप में स्वीकार किया। कथावाचक ने शिव बारात के विचित्र दृश्य का भी रोचक वर्णन किया, जिसमें भूत-प्रेत, नाग, योगी, औघड़ और शिव गण शामिल थे। यह सुनकर श्रद्धालु आनंद से झूम उठे और हर-हर महादेव के जयघोष से परिसर गूंज उठा। शिव विवाह प्रसंग के दौरान जब स्वामी उद्धव शरण महाराज ने भगवान शिव के गले में सर्पों की माला, शरीर पर भस्म और जटाओं में गंगा के प्रवाह का उल्लेख किया, तो भक्तों की भक्ति उमड़ पड़ी। जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ी, भक्तजन मंत्रमुग्ध होकर कथा का रसास्वादन करते रहे। अंत में कथावाचक ने कहा कि शिव-पार्वती का विवाह सिर्फ एक दैवीय प्रसंग नहीं, बल्कि जीवन में त्याग, तपस्या, भक्ति और समर्पण का संदेश भी देता है। शिव विवाह से यह सीख मिलती है कि भक्ति में सच्ची निष्ठा हो तो भगवान स्वयं अपने भक्तों को स्वीकार कर लेते हैं। इसके पूर्व व्यवसाई रजनीश राय व एडवोकेट अशोक राय ने व्यासपीठ का पूजन किया। जयप्रकाश पांडेय, व्यास मिश्र, रोहित शुक्ल, प्रमोद मिश्र, शोभित शुक्ल, डिंपल शुक्ल, त्रिपुरारी शुक्ल, सुनील शुक्ल, जितेन्द्र शुक्ल, अरविंद राय, रंजन शुक्ल, भीम प्रसाद, अशोक प्रसाद, गर्जन चौहान, बृजेश राय आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।