पटना। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो चुनाव आयोग और विशेष रूप से मुख्य निर्वाचन आयुक्त को अपनी बात मजबूती के साथ जनता के सामने रखनी चाहिए, ताकि लोगों के मन में किसी तरह का संदेह पैदा न हो।

पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान चिराग पासवान ने कहा कि सरकार का हिस्सा होने के नाते वह किसी व्यक्ति का बचाव नहीं करेंगे। उन्होंने चुनाव आयोग को एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था बताते हुए कहा कि जब आयोग के कामकाज को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो इन सवालों का जवाब देना और वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना भी आयोग की जिम्मेदारी है।

यह विवाद चुनाव आयोग के भीतर कथित तौर पर अलग-अलग राय सामने आने की खबरों के बाद तेज हुआ है। 23 सितंबर को चुनाव आयोग ने इन खबरों पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा था कि किसी संस्थान में विचारों, टिप्पणियों और सुझावों का अलग-अलग होना निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। आयोग ने यह भी कहा था कि उसके अंतिम फैसले पूरी आयोग के स्तर पर लिए गए और पिछले एक वर्ष के दौरान लिए गए फैसलों को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई।

रिपोर्टों के मुताबिक, विवाद का एक प्रमुख हिस्सा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़ा है। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीने की अवधि में कई मौकों पर मतदाता सूची और उससे संबंधित प्रक्रियाओं को लेकर आपत्तियां या टिप्पणियां दर्ज की थीं। इस रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए।

हालांकि, चुनाव आयोग ने अपने जवाब में अलग-अलग राय को संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बताया। आयोग के अनुसार, बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में निर्णय लेने से पहले सदस्य अपने विचार, सवाल, तकनीकी सुझाव और टिप्पणियां दे सकते हैं। आयोग ने कहा कि आंतरिक स्तर पर होने वाली चर्चा और अंतिम निर्णय के बीच अंतर किया जाना चाहिए। उसके मुताबिक, SIR सहित उसके फैसलों और चुनाव सुधारों को पूरी आयोग की मंजूरी मिली है।

चिराग पासवान का बयान इसी पृष्ठभूमि में आया है। उन्होंने इस पूरे मामले को किसी व्यक्ति के पक्ष या विपक्ष में देखने के बजाय चुनाव आयोग की संस्थागत जिम्मेदारी पर जोर दिया। उनका कहना था कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर यदि जनता के बीच सवाल या भ्रम पैदा हो रहा है, तो आयोग को स्वयं सामने आकर स्थिति साफ करनी चाहिए।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार में शामिल होने के कारण वह किसी व्यक्ति का बचाव करने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और उसकी कार्यप्रणाली से जुड़े सवालों पर जवाब देने की जिम्मेदारी भी उसी की है। उनके बयान को मौजूदा विवाद के बीच आयोग से पारदर्शी तरीके से स्थिति स्पष्ट करने के आग्रह के रूप में देखा जा रहा है।

इस बीच, CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई है। बिहार में कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया है और CEC के इस्तीफे की मांग की है। वहीं, चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक स्पष्टीकरण में कहा है कि उसके निर्णय कानूनी प्रक्रिया और संस्थागत व्यवस्था के तहत लिए गए हैं।

मामले में दो अलग-अलग पक्ष सामने आ रहे हैं। एक तरफ विपक्षी दल आयोग के भीतर कथित मतभेदों और निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि आंतरिक विचार-विमर्श में अलग-अलग राय होना सामान्य है और अंतिम फैसले आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार लिए गए हैं। इसलिए विवाद का केंद्र अब चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया, SIR और आंतरिक टिप्पणियों की व्याख्या को लेकर बना हुआ है।

चिराग पासवान के बयान से यह बात सामने आती है कि राजनीतिक विवाद के बीच चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की अपेक्षा की जा रही है। उन्होंने जनता के मन में किसी तरह का संदेह न रहने देने के लिए आयोग को अपनी स्थिति मजबूती से रखने की जरूरत बताई है। अब इस विवाद के बीच चुनाव आयोग की ओर से आने वाली आगे की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

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