अयोध्या। अयोध्या स्थित राम मंदिर में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के कर्मचारियों द्वारा की जा रही चढ़ावे की गणना की निगरानी के लिए नियुक्त राम मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारी विजय पाठक ने ड्यूटी का आदेश जारी होने के साथ ही गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। पाठक ने अपना इस्तीफा राम मंदिर ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन को व्हाट्सएप के माध्यम से भेजा। इस्तीफे की सूचना सामने आने के बाद मंदिर परिसर में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से प्राप्त होने वाले चढ़ावे की गणना और उससे संबंधित प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विभिन्न स्तरों पर कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है। इसी क्रम में विजय पाठक को भी SBI कर्मचारियों द्वारा की जा रही चढ़ावे की गणना की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। ड्यूटी का आदेश जारी होने के बाद ही उन्होंने अपना इस्तीफा ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव को भेज दिया।
पाठक ने गुरुवार को व्हाट्सएप के जरिए अपना इस्तीफा भेजा। हालांकि, ट्रस्ट की ओर से व्हाट्सएप पर भेजे गए इस्तीफे को औपचारिक रूप से स्वीकार करने के बजाय उन्हें निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के लिए कहा गया है। संबंधित कर्मचारी को निर्देश दिया गया है कि वह अपना इस्तीफा ईमेल के माध्यम से भेजें। इसके साथ ही उन्हें मंदिर कार्यालय पहुंचकर अपना प्रवेश पत्र और ड्यूटी से संबंधित अन्य जरूरी सामान भी जमा कराने को कहा गया है।
ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, किसी कर्मचारी के इस्तीफे की औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के लिए लिखित या आधिकारिक माध्यम से आवेदन प्राप्त करना जरूरी होता है। इसी वजह से व्हाट्सएप के माध्यम से भेजे गए इस्तीफे के बाद विजय पाठक को ईमेल के जरिए इस्तीफा भेजने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, मंदिर परिसर में प्रवेश से संबंधित दस्तावेज और अन्य सामग्री वापस करने के लिए भी कहा गया है।
राम मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण प्रतिदिन भारी मात्रा में चढ़ावा प्राप्त होता है। श्रद्धालुओं द्वारा नकद राशि के साथ-साथ सोना-चांदी और अन्य सामग्री भी दान की जाती है। चढ़ावे की गणना और उसके सुरक्षित रखरखाव की जिम्मेदारी निर्धारित व्यवस्था के तहत निभाई जाती है। बैंक कर्मचारियों की मौजूदगी में नकदी की गणना की प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाए रखने के लिए निगरानी की व्यवस्था भी की गई है।
विजय पाठक के इस्तीफे के पीछे क्या कारण है, इसे लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। उन्होंने इस्तीफा क्यों दिया, इस संबंध में भी ट्रस्ट की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है। ऐसे में इस्तीफे के कारणों को लेकर किसी तरह का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
महत्वपूर्ण यह भी है कि व्हाट्सएप के माध्यम से इस्तीफा भेजे जाने के बाद ट्रस्ट ने तत्काल प्रक्रिया स्पष्ट करते हुए संबंधित कर्मचारी को ईमेल के जरिए औपचारिक इस्तीफा देने और मंदिर कार्यालय में उपस्थित होकर सभी आवश्यक सामग्री जमा करने का निर्देश दिया। इससे संकेत मिलता है कि ट्रस्ट इस्तीफे की प्रक्रिया को निर्धारित प्रशासनिक नियमों के अनुसार पूरा कराना चाहता है।
राम मंदिर के निर्माण के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के साथ बड़ी संख्या में दान भी करते हैं। ऐसे में मंदिर में प्राप्त होने वाले चढ़ावे की गणना, लेखा-जोखा और सुरक्षा व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। बैंक कर्मचारियों की भूमिका इसी वित्तीय प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।
विजय पाठक के इस्तीफे के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ट्रस्ट उनकी जिम्मेदारी के लिए किस कर्मचारी की नियुक्ति करता है और चढ़ावे की गणना की निगरानी की व्यवस्था किस तरह आगे बढ़ाई जाती है। फिलहाल ट्रस्ट की ओर से इस्तीफे के कारणों या आगे की नियुक्ति को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
इस पूरे घटनाक्रम में फिलहाल इतना स्पष्ट है कि ड्यूटी आदेश जारी होने के दिन ही विजय पाठक ने ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन को व्हाट्सएप के माध्यम से इस्तीफा भेजा और ट्रस्ट ने उन्हें औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के लिए ईमेल से इस्तीफा भेजने तथा मंदिर कार्यालय में प्रवेश पत्र समेत अन्य आवश्यक सामग्री जमा करने का निर्देश दिया है।