आजमगढ़। बिलरियागंज थाने के दारोगा और उनके चालक पर वाहन में टक्कर मारने तथा उसके बाद अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगा है। भाजपा जिला मंत्री आशीष गुप्ता ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र देकर संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। घटना से संबंधित बताया जा रहा एक वीडियो भी इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। उच्च अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। फिलहाल वाहन में टक्कर और उसके बाद हुए व्यवहार को लेकर लगाए गए आरोपों का सत्यापन होना बाकी है।

मसुरियापुर गांव निवासी आशीष गुप्ता ने शिकायत में बताया कि घटना 10 सितंबर की है। वह अपने वाहन से आजमगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। उनका आरोप है कि रास्ते में बिलरियागंज थाने के दारोगा संतोष कुमार यादव और उनके चालक के वाहन ने साइड से उनकी गाड़ी में टक्कर मार दी। हालांकि, उपलब्ध विवरण में घटना का सटीक स्थान, समय और दोनों वाहनों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इन तथ्यों से टक्कर की परिस्थितियां समझने में मदद मिलेगी।

शिकायत के मुताबिक, टक्कर के बाद आशीष गुप्ता के चालक ने दारोगा से घटना के संबंध में बातचीत करने का प्रयास किया। आरोप है कि इस दौरान दारोगा और उनके चालक ने उससे अभद्र व्यवहार किया। आशीष गुप्ता ने इसी घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से हस्तक्षेप की मांग की है। उपलब्ध जानकारी में अभद्रता के दौरान इस्तेमाल किए गए शब्दों का प्रमाणित विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए आरोप को शिकायतकर्ता के कथन के रूप में ही प्रस्तुत किया जा रहा है।

आशीष गुप्ता की शिकायत में दो अलग पहलू सामने आते हैं। पहला वाहन में साइड से टक्कर लगने का आरोप है और दूसरा उसके बाद चालक के साथ हुए व्यवहार का। जांच में दोनों विषयों की स्थिति अलग-अलग स्पष्ट होनी होगी। वाहन किस दिशा में चल रहे थे, टक्कर कैसे हुई और बातचीत के दौरान क्या घटनाक्रम रहा, इन सवालों के जवाब महत्वपूर्ण होंगे। केवल शिकायत के आधार पर किसी पक्ष को टक्कर या कथित अभद्रता के लिए अंतिम रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित वीडियो ने भी इस मामले को चर्चा में ला दिया है। हालांकि, उपलब्ध सामग्री में वीडियो का पूरा विवरण, उसकी अवधि और रिकॉर्ड किए जाने की परिस्थितियां नहीं बताई गई हैं। यह भी स्पष्ट नहीं है कि उसमें टक्कर की घटना दिखाई देती है या उसके बाद की बातचीत। इसलिए वीडियो को पूरे घटनाक्रम का प्रमाण मानने से पहले उसके संदर्भ और प्रामाणिकता का सत्यापन आवश्यक होगा। किसी हिस्से में दिखाई देने वाली बात और उससे पहले हुई घटना के बीच अंतर रखना महत्वपूर्ण है।

उच्च अधिकारियों ने शिकायत का संज्ञान लेकर जांच के आदेश दिए हैं। यह कार्रवाई आरोपों की तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करने के लिए की गई है। उपलब्ध विवरण में जांच अधिकारी का नाम और रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समयसीमा शामिल नहीं है। संबंधित दारोगा या चालक को निलंबित किए जाने, लाइन हाजिर करने अथवा किसी अन्य दंडात्मक कदम की जानकारी भी नहीं दी गई है। फिलहाल पुष्टि की गई प्रशासनिक कार्रवाई जांच के आदेश तक सीमित है।

इस मामले में शिकायतकर्ता के वाहन चालक का पक्ष महत्वपूर्ण है, क्योंकि कथित अभद्रता उसी के साथ होने की बात कही गई है। दारोगा संतोष कुमार यादव और उनके चालक का विवरण भी घटनाक्रम को समझने के लिए आवश्यक होगा। उपलब्ध जानकारी में उनका विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है। यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने टक्कर या बातचीत के संबंध में कोई अलग दावा किया है। दोनों पक्षों के कथन और उपलब्ध रिकॉर्ड का मिलान जांच का आधार बन सकता है।

वाहन में हुए नुकसान का विवरण भी अभी उपलब्ध नहीं है। शिकायत में टक्कर का आरोप लगाया गया है, लेकिन मरम्मत के अनुमान, क्षतिग्रस्त हिस्से या किसी व्यक्ति को चोट लगने की जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए घटना को गंभीर दुर्घटना या चोट पहुंचने के मामले के रूप में बढ़ाकर प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। यदि वाहन की तस्वीरें या अन्य संबंधित सामग्री उपलब्ध होती है, तो उनसे टक्कर की प्रकृति समझने में सहायता मिल सकती है। ऐसी सामग्री मिलने की पुष्टि फिलहाल नहीं है।

भाजपा जिला मंत्री होने के कारण आशीष गुप्ता की शिकायत को राजनीतिक संदर्भ में भी देखा जा सकता है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में किसी राजनीतिक रंजिश या जानबूझकर निशाना बनाए जाने का आरोप नहीं है। शिकायत का मुख्य विषय सड़क पर वाहन में टक्कर और उसके बाद कथित अभद्र व्यवहार है। इसलिए इसे बिना अतिरिक्त तथ्यों के व्यापक राजनीतिक विवाद से जोड़ना उचित नहीं होगा। संबंधित पुलिसकर्मियों के आचरण पर निर्णय जांच में सामने आने वाली जानकारी के आधार पर होना चाहिए।

फिलहाल वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश के बाद जांच के निष्कर्ष का इंतजार है। आशीष गुप्ता ने अपने पत्र में कार्रवाई की मांग की है, जबकि संबंधित दारोगा और चालक पर लगाए गए आरोप अभी जांच के दायरे में हैं। आगे की रिपोर्ट से स्पष्ट होगा कि वाहन में टक्कर किन परिस्थितियों में लगी और उसके बाद बातचीत के दौरान क्या हुआ। उसी आधार पर संबंधित अधिकारियों को अगला निर्णय लेना होगा।

Tags: