रामपुर जिले: ग्रामीण इलाकों में पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद जनसुविधाओं पर असर पड़ता दिखाई दे रहा है। ग्राम प्रधानों को पंचायतों का प्रशासक तो बना दिया गया है, लेकिन सीमित अधिकारों और वित्तीय स्वीकृतियों की कमी के कारण वे पहले की तरह विकास और जरूरी कार्य नहीं करा पा रहे हैं। इसका सीधा असर गांवों की सफाई व्यवस्था, हैंडपंपों की मरम्मत और अन्य मूलभूत सुविधाओं पर पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि मानसून के मौसम में नियमित सफाई नहीं होने से कई गांवों में नालियां जाम हो रही हैं और रास्तों पर गंदा पानी जमा हो रहा है। इससे लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, गंदगी और जलभराव के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ने लगा है।
रामपुर के ज्वाला नगर क्षेत्र से सटे ग्राम अजीतपुर में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिली। गांव के अंदर की सड़कों और सफाई व्यवस्था कुछ हद तक ठीक दिखाई दी, लेकिन बाहरी इलाकों, नई आबादी वाले रास्तों, खाली प्लाटों और शाहबाद रोड के किनारे कूड़े के ढेर नजर आए। स्थानीय लोगों के अनुसार, नियमित सफाई नहीं होने के कारण कई स्थानों पर गंदगी जमा हो रही है।
अजीतपुर के प्राथमिक विद्यालय के गेट के पास भी कूड़े का ढेर लगा मिला। ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के दौरान नालियों की सफाई समय पर नहीं होने से जलभराव की समस्या पैदा हो जाती है। सड़क पर गंदा पानी जमा होने के कारण लोगों को निकलने में परेशानी होती है। इसके अलावा कई जगहों पर खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत नहीं हो पाने से ग्रामीणों को पेयजल की समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है।
यह समस्या केवल अजीतपुर गांव तक सीमित नहीं है। विकास खंड चमरौआ क्षेत्र की 92 ग्राम पंचायतों में भी इसी तरह की परेशानियां सामने आ रही हैं। ग्रामीण लगातार अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासक बनाए गए पूर्व प्रधानों से शिकायत कर रहे हैं, लेकिन अधिकारों की कमी के कारण तुरंत समाधान नहीं हो पा रहा है।
प्रशासक बनाए गए पूर्व प्रधानों का कहना है कि उन्हें गांव की समस्याओं की पूरी जानकारी है और वे समाधान के लिए प्रयास भी कर रहे हैं, लेकिन पहले की तुलना में उनके अधिकार सीमित हो गए हैं। अब किसी भी कार्य को कराने के लिए प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है और अधिकारियों से अनुमति लेनी होती है। इस वजह से छोटे-छोटे काम भी समय पर पूरे नहीं हो पाते।
अजीतपुर की प्रशासक और पूर्व प्रधान मीना ने बताया कि गांव में काम कराए जा रहे हैं। प्रधान के रूप में पहले जिस तरह से तुरंत निर्णय लेकर कार्य कराए जाते थे, अब वैसी स्थिति नहीं है। सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त सफाई कर्मियों की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि गांव में सफाई कर्मियों की संख्या कम होने के कारण अस्थायी सफाई कर्मी भी लगाए गए हैं। शाहबाद रोड किनारे जमा कूड़े को जेसीबी की मदद से हटवाया गया है।
वहीं, अन्य पूर्व प्रधानों का कहना है कि प्रशासक बनने के बाद काम करने का तरीका बदल गया है। पहले ग्रामीणों की शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई की जा सकती थी, लेकिन अब छोटे कार्यों को भी बैठक की कार्रवाई में शामिल कर अधिकारियों को सूचना देनी पड़ती है। इसके बाद ही काम शुरू हो पाता है।
ग्रामीणों की मांग है कि पंचायतों को पहले जैसे अधिकार दिए जाएं, ताकि गांवों की समस्याओं का समाधान तेजी से हो सके। उनका कहना है कि सफाई, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाएं सीधे लोगों के जीवन से जुड़ी हैं, इसलिए इनमें देरी नहीं होनी चाहिए।
फिलहाल रामपुर के गांवों में पंचायत व्यवस्था के बदलाव का असर साफ दिखाई दे रहा है। प्रशासन की ओर से व्यवस्थाएं सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अधिकारों की कमी के कारण स्थानीय स्तर पर काम कराने में देरी हो रही है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जल्द ही व्यवस्था पटरी पर लौटेगी और मूलभूत सुविधाएं बेहतर होंगी।