उत्तर प्रदेश : सरकार ने राज्य को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) के क्षेत्र में एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के प्रमुख शहरों में जीसीसी हब तैयार किए जाएं, जिससे तकनीक, नवाचार और उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सके। इसके लिए नोएडा और ग्रेटर नोएडा के साथ-साथ लखनऊ, वाराणसी, आगरा, प्रयागराज और बुंदेलखंड के शहरों को भी ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है।
प्रदेश सरकार का मानना है कि तेजी से बढ़ते तकनीकी क्षेत्र में जीसीसी की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। दुनिया की कई बड़ी कंपनियां भारत में अपने रिसर्च, टेक्नोलॉजी, डेटा मैनेजमेंट और इनोवेशन से जुड़े केंद्र स्थापित कर रही हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश इस अवसर का लाभ उठाकर राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करना चाहता है।
प्रमुख सचिव आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स आलोक कुमार ने बताया कि जीसीसी इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार जल्द ही एक उच्चस्तरीय ‘जीसीसी सलाहकार बोर्ड’ का गठन करेगी। इस बोर्ड में सरकार के अधिकारियों के साथ-साथ उद्योग जगत, शैक्षणिक संस्थानों, इन्वेस्ट यूपी और विभिन्न विकास प्राधिकरणों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा।
यह सलाहकार बोर्ड जीसीसी से जुड़ी नीतियों को बेहतर बनाने, विभिन्न विभागों के बीच तालमेल स्थापित करने और निवेशकों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाने का काम करेगा। सरकार का उद्देश्य है कि कंपनियों को उत्तर प्रदेश में निवेश करने के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराया जाए और उन्हें किसी तरह की प्रशासनिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
राज्य सरकार अपनी आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स नीति को और मजबूत करने पर भी काम कर रही है। इसके तहत डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार, डीप-टेक हब और यू-हब के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा उद्योगों की जरूरतों के अनुसार कुशल युवाओं को तैयार करने के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
जीसीसी समिट 2026 में प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने तकनीक, नवाचार और रोजगार को लेकर सरकार का विस्तृत रोडमैप पेश किया। इस कार्यक्रम में उद्योग जगत के प्रमुख लोग, नीति निर्माता और वैश्विक कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। समिट के दौरान उत्तर प्रदेश में तकनीकी निवेश की संभावनाओं और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की गई।
प्रमुख सचिव ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास बड़ी युवा आबादी, बेहतर कनेक्टिविटी, तेजी से विकसित हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश के लिए अनुकूल नीतियां मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि राज्य प्रगतिशील नीतियों, कुशल प्रतिभाओं, विश्वस्तरीय सुविधाओं और जवाबदेह प्रशासन के माध्यम से भारत के तेजी से बढ़ते जीसीसी इकोसिस्टम में अपनी मजबूत हिस्सेदारी बनाने के लिए तैयार है।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा पहले से ही आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के बड़े केंद्र के रूप में पहचान बना चुके हैं। यहां कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां काम कर रही हैं। अब सरकार की योजना है कि इसी मॉडल को प्रदेश के अन्य शहरों तक विस्तार दिया जाए, ताकि क्षेत्रीय स्तर पर भी रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा हो सकें।
लखनऊ को प्रशासनिक और तकनीकी केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है, जबकि वाराणसी, आगरा और प्रयागराज जैसे शहरों में भी तकनीकी सेवाओं और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने की तैयारी है। बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों को भी इस योजना से जोड़ने का उद्देश्य वहां रोजगार के अवसर बढ़ाना और आर्थिक विकास को गति देना है।
सरकार का मानना है कि ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर के विस्तार से प्रदेश में न सिर्फ विदेशी निवेश बढ़ेगा, बल्कि युवाओं को अत्याधुनिक तकनीक से जुड़े रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। आने वाले समय में उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख टेक्नोलॉजी और इनोवेशन केंद्रों में शामिल करने की दिशा में यह योजना महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।