Poor उपभोक्ताओं की सब्सिडी पर खतरा, बढ़ी चिंता

Update: 2026-07-06 09:02 GMT

Lucknow लखनऊ :  उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें करीब 47 लाख उपभोक्ताओं के कनेक्शन का स्वीकृत लोड बिना किसी पूर्व सूचना, नोटिस या सहमति के बढ़ा दिए जाने का आरोप लगा है। इस फैसले को लेकर राज्यभर में विवाद तेज हो गया है और उपभोक्ता संगठनों ने इसे नियमों के खिलाफ बताया है।

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस कदम को नियामक आयोग के नियमों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए राज्य सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि इस कथित अवैध लोड वृद्धि को वापस नहीं लिया गया, तो उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए मामला नियामक आयोग और अदालत तक ले जाया जाएगा।

परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने जानकारी देते हुए कहा कि जिन 47 लाख उपभोक्ताओं का लोड बढ़ाया गया है, उनमें लगभग 50 प्रतिशत ऐसे उपभोक्ता हैं जिनके घरों में स्मार्ट मीटर लगे हुए हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से लगभग 11.75 लाख उपभोक्ता ऐसे हैं जो गरीब वर्ग से आते हैं और कम बिजली खपत के कारण अब तक लाइफ लाइन या सब्सिडी श्रेणी का लाभ ले रहे थे।

लोड बढ़ाए जाने के बाद ये उपभोक्ता सीधे सब्सिडी के दायरे से बाहर हो जाएंगे, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा। परिषद का कहना है कि लोड बढ़ने से फिक्स्ड चार्ज भी बढ़ जाता है, जिसके कारण हर महीने आने वाला बिजली बिल स्वतः ही महंगा हो जाएगा।उपभोक्ता संगठनों ने आरोप लगाया है कि बिना सूचना इस तरह का फैसला आम जनता पर आर्थिक दबाव बढ़ाने जैसा है। उनका कहना है कि बिजली विभाग अपनी व्यवस्थागत कमियों और लाइन लॉस को छुपाने के लिए उपभोक्ताओं पर बोझ डाल रहा है।

इस मुद्दे के सामने आने के बाद उपभोक्ता परिषद ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है और कहा है कि इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच होनी चाहिए। परिषद ने यह भी कहा है कि उपभोक्ताओं को बिना जानकारी दिए इस तरह का कोई भी बदलाव नियमों के खिलाफ है और इससे उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन होता है।फिलहाल इस मामले को लेकर उपभोक्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है और लोग इसे लेकर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर भी अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।

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