उत्तर प्रदेश: विश्व हिंदू परिषद (VHP) के पूर्व अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष अशोक सिंघल की जन्मशती के अवसर पर कानपुर में आयोजित कार्यक्रमों के बीच उनके योगदान और सार्वजनिक जीवन में भूमिका को लेकर चर्चा हुई। अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने अशोक सिंघल के जीवन और उनके कार्यों को याद करते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन सनातन धर्म से जुड़े संघर्षों के लिए समर्पित रहा। स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि अशोक सिंघल की भूमिका केवल धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने संतों और संन्यासियों को सार्वजनिक जीवन और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने दावा किया कि गोरखनाथ पीठ को अपवाद मानें तो भारतीय राजनीति में संतों और संन्यासियों की सक्रिय भागीदारी को बढ़ाने में अशोक सिंघल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
उन्होंने कहा कि संतों की राजनीति में भागीदारी और उनके सार्वजनिक हस्तक्षेप के पीछे राम जन्मभूमि आंदोलन एक महत्वपूर्ण माध्यम बना। उनके मुताबिक, अशोक सिंघल ने इस आंदोलन के जरिए जिस संगठनात्मक आधार को मजबूत किया, उसका प्रभाव आगे की राजनीति पर भी पड़ा। स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने अपने संबोधन में भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिक प्रभाव का उल्लेख करते हुए इसे हिंदुत्व आंदोलन से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान तैयार हुआ संगठनात्मक आधार आज भी राजनीतिक परिदृश्य में दिखाई देता है। हालांकि, यह स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती का राजनीतिक विश्लेषण और दावा है।
अशोक सिंघल का जन्म 27 सितंबर 1926 को हुआ था। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और बाद में विश्व हिंदू परिषद में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर रहे। वे राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। वर्ष 2015 में उनका निधन हुआ। वर्ष 2026 में उनकी जन्मशती के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कानपुर में भी विहिप के कानपुर प्रांत की ओर से अशोक सिंघल के जन्मशती वर्ष के दौरान सालभर कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की गई है। इसके उद्घाटन कार्यक्रम में विहिप के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय और अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री जितेंद्रानंद सरस्वती के शामिल होने की जानकारी सामने आई थी। कार्यक्रम 30 सितंबर को बीएनएसडी शिक्षा निकेतन, बेनाझाबर में प्रस्तावित था।
देशभर में अशोक सिंघल की जन्मशती से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। 27 सितंबर को नई दिल्ली में जन्मशती वर्ष के उद्घाटन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी उन्हें याद किया और उनके जीवन को त्याग, सादगी, धर्मनिष्ठा तथा संगठनात्मक कार्यों से जोड़ा। अशोक सिंघल की जन्मशती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में उनके सामाजिक, धार्मिक और संगठनात्मक योगदान को याद किया जा रहा है। वहीं, उनके समर्थक और विभिन्न संत संगठन राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका तथा हिंदू संगठनों के विस्तार में उनके योगदान को प्रमुखता से रेखांकित कर रहे हैं।
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