अयोध्या : राम मंदिर ट्रस्ट के पहले **CEO (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) एयर मार्शल (रिटायर्ड) जीतेंद्र मिश्रा** की नियुक्ति को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। AIMIM प्रमुख **असदुद्दीन ओवैसी** ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा विषय है और इसके प्रबंधन में पारदर्शिता और धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।
ओवैसी ने जीतेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि मंदिर का संचालन किसी कॉरपोरेट संस्था की तरह नहीं होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन में अपने तरीके से फैसले ले रही है। हालांकि राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से CEO पद को मंदिर की बढ़ती व्यवस्थाओं और प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए उठाया गया कदम बताया गया है।
कौन हैं जीतेंद्र मिश्रा
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एयर मार्शल (रिटायर्ड) जीतेंद्र मिश्रा को मंदिर का पहला CEO नियुक्त किया है। भारतीय वायुसेना में करीब चार दशक तक सेवा दे चुके मिश्रा के पास बड़े संगठनों को संभालने का अनुभव है।
उन्होंने वायुसेना में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। ट्रस्ट का कहना है कि उनके प्रशासनिक अनुभव, नेतृत्व क्षमता और प्रबंधन कौशल को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है।
CEO नियुक्ति पर क्यों उठे सवाल
राम मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं बल्कि देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मंदिर में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए ट्रस्ट ने प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने का फैसला लिया है।
CEO का पद इसी उद्देश्य से बनाया गया है ताकि मंदिर संचालन, श्रद्धालु सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों के प्रबंधन और अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सके।
हालांकि ओवैसी ने इसी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि मंदिर की आस्था से जुड़े मामलों में सरकार और ट्रस्ट को ज्यादा संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।
CEO चयन की प्रक्रिया पर ट्रस्ट ने दी जानकारी
राम मंदिर ट्रस्ट के अनुसार CEO चयन के लिए एक तय प्रक्रिया अपनाई गई थी। इस पद के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आए थे। स्क्रीनिंग और इंटरव्यू के बाद योग्य उम्मीदवारों में से जीतेंद्र मिश्रा का चयन किया गया।
ट्रस्ट ने बताया कि चयन प्रक्रिया में विशेषज्ञ समिति की भूमिका रही और अनुभव व नेतृत्व क्षमता को प्रमुख आधार बनाया गया।
मंदिर प्रबंधन में नई व्यवस्था की जरूरत क्यों पड़ी
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद सबसे बड़ी चुनौती उसका व्यवस्थित संचालन है। आने वाले समय में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
ऐसे में दर्शन व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा, दान प्रबंधन, सुविधाओं का विस्तार और प्रशासनिक कामों के लिए एक मजबूत प्रबंधन प्रणाली जरूरी मानी जा रही है।
इसी वजह से ट्रस्ट ने CEO जैसे पद की व्यवस्था बनाई है।
जीतेंद्र मिश्रा ने संभाली नई जिम्मेदारी
CEO बनने के बाद जीतेंद्र मिश्रा ने इसे भगवान राम की सेवा का अवसर बताया। उन्होंने कहा कि वह इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभाने का प्रयास करेंगे।
उनका कहना है कि मंदिर की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना और श्रद्धालुओं को सुविधाजनक अनुभव देना उनकी प्राथमिकता होगी।
राजनीतिक विवाद क्यों बढ़ा
राम मंदिर लंबे समय से भारतीय राजनीति का बड़ा मुद्दा रहा है। मंदिर निर्माण के बाद भी इससे जुड़े फैसले राजनीतिक चर्चा का विषय बनते रहे हैं।
ओवैसी का बयान भी इसी राजनीतिक बहस का हिस्सा माना जा रहा है। जहां कुछ लोग CEO नियुक्ति को आधुनिक प्रबंधन की जरूरत बता रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे धार्मिक संस्थान के स्वरूप से जोड़कर देख रहे हैं।
आगे क्या चुनौती होगी
जीतेंद्र मिश्रा के सामने सबसे बड़ी चुनौती मंदिर की बढ़ती लोकप्रियता के साथ व्यवस्थाओं को सुचारु रखना होगी।
उन्हें श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, प्रशासनिक पारदर्शिता और मंदिर की गरिमा को बनाए रखते हुए काम करना होगा।