उत्तर प्रदेश

भतीजे आकाश आनंद को फिर झटका मायावती के फैसले से बढ़ी हलचल

Ratna Netam
3 Sept 2026 6:53 PM IST
भतीजे आकाश आनंद को फिर झटका मायावती के फैसले से बढ़ी हलचल
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लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी (BSP) में एक बार फिर बड़ा सियासी बदलाव देखने को मिला है। पार्टी प्रमुख **मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को एक बार फिर बड़ी जिम्मेदारी से हटा दिया है।** यह पहली बार नहीं है जब आकाश आनंद को संगठन में पद से हटाया गया हो। मायावती ने उन्हें तीसरी बार पार्टी की अहम जिम्मेदारियों से दूर किया है।
आकाश आनंद को कभी मायावती का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता था। उन्हें युवा चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाया गया था और पार्टी की नई पीढ़ी की कमान सौंपने की तैयारी भी दिखाई दे रही थी। लेकिन लगातार बदलते फैसलों के बाद अब उनकी राजनीतिक भूमिका एक बार फिर सीमित हो गई है।
मायावती ने क्यों लिया फैसला
बसपा की अखिल भारतीय बैठक में मायावती ने कहा कि आकाश आनंद अभी राजनीतिक रूप से पूरी तरह परिपक्व नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि आकाश पार्टी में काम कर सकते हैं, लेकिन फिलहाल उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
मायावती का कहना है कि पार्टी में जिम्मेदारी देने के लिए राजनीतिक समझ, अनुभव और संगठन को संभालने की क्षमता जरूरी है। उन्होंने संकेत दिया कि आकाश को अभी लंबा राजनीतिक अनुभव हासिल करने की जरूरत है।
तीसरी बार हुआ बड़ा बदलाव
आकाश आनंद को इससे पहले भी कई बार पार्टी की जिम्मेदारियों से हटाया जा चुका है।
पहली बार 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्हें राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाया गया था। हालांकि कुछ समय बाद उनकी जिम्मेदारियां वापस बहाल कर दी गई थीं। इसके बाद 2025 में भी उन्हें पार्टी के अहम पदों से हटाया गया था।
अब एक बार फिर उन्हें नेशनल कोऑर्डिनेटर जैसी बड़ी जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है।
कभी उत्तराधिकारी के तौर पर हुई थी घोषणा
आकाश आनंद को मायावती ने पार्टी में धीरे-धीरे आगे बढ़ाया था। साल 2019 में उन्हें बसपा का राष्ट्रीय समन्वयक बनाया गया था। इसके बाद उन्हें कई राज्यों के चुनावों में संगठन की जिम्मेदारी भी दी गई।
मायावती ने आकाश को अपनी राजनीतिक विरासत आगे बढ़ाने वाले चेहरे के रूप में पेश किया था। युवा और सोशल मीडिया से जुड़े होने के कारण उन्हें नई पीढ़ी के मतदाताओं तक पहुंच बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी।
आकाश आनंद ने बदली अपनी पहचान
मायावती के फैसले के बाद आकाश आनंद ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल में बदलाव किया। उन्होंने खुद को अब **BSP कार्यकर्ता** के रूप में पेश किया है।
उन्होंने कहा कि वह मायावती के नेतृत्व में काम करते रहेंगे और पार्टी के फैसलों का सम्मान करेंगे। आकाश ने यह भी संकेत दिया कि वह संगठन के लिए आगे भी सक्रिय रहेंगे।
बसपा में अनुशासन सबसे ऊपर
मायावती लंबे समय से पार्टी में अनुशासन को सबसे ज्यादा महत्व देती रही हैं। बसपा में नेताओं के बयानों और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर काफी सख्त व्यवस्था मानी जाती है।
मायावती का मानना है कि पार्टी का कोई भी नेता व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर संगठन और मिशन को रखे। इसी नीति के तहत वह समय-समय पर बड़े नेताओं पर भी कार्रवाई करती रही हैं।
यूपी चुनाव से पहले बड़ा फैसला
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच आकाश आनंद को जिम्मेदारी से हटाने का फैसला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बसपा इस समय अपने संगठन को मजबूत करने और अकेले चुनाव लड़ने की रणनीति पर काम कर रही है।
मायावती ने साफ किया है कि पार्टी देशभर में छोटे-बड़े चुनाव अपने दम पर लड़ने की तैयारी कर रही है। ऐसे में संगठन की कमान अनुभवी नेताओं के हाथ में रखने की कोशिश की जा रही है।
क्या खत्म हो गया आकाश आनंद का राजनीतिक भविष्य
आकाश आनंद को लेकर अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि उनका राजनीतिक करियर कमजोर हो गया है। मायावती ने उन्हें पूरी तरह राजनीति से बाहर नहीं किया है, बल्कि सिर्फ बड़ी जिम्मेदारियों से दूर रखा है।
अगर आकाश आनंद संगठन में लगातार काम करते हैं और अपनी राजनीतिक समझ मजबूत करते हैं तो भविष्य में उन्हें फिर से बड़ी भूमिका मिल सकती है।
बसपा के लिए भी चुनौती
मायावती के इस फैसले से बसपा के सामने भी एक चुनौती खड़ी हो गई है। पार्टी लंबे समय से नए युवा नेतृत्व की तलाश में है और आकाश आनंद को इसी दिशा में देखा जा रहा था।
अब पार्टी को यह तय करना होगा कि युवा मतदाताओं और नए सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए कौन सा चेहरा आगे किया जाए।
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