गाजियाबाद। रोबोटिक्स और हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी के बढ़ते इस्तेमाल के बीच भारत और चीन के बीच लाइव रोबोटिक टेली-सर्जरी का प्रदर्शन किया गया है। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली के डॉक्टरों ने भारत में मौजूद सर्जिकल टीम को चीन के चेंगदू में स्थापित रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम से जोड़ा। दोनों स्थानों के बीच करीब 5,000 किलोमीटर की दूरी होने के बावजूद सर्जन की गतिविधियों को दूर मौजूद रोबोटिक सिस्टम तक पहुंचाने की क्षमता को परखा गया।यह लाइव प्रदर्शन मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मिनिमल एक्सेस, बैरिएट्रिक एंड रोबोटिक सर्जरी के प्रिंसिपल डायरेक्टर और हेड डॉ. विवेक बिंदल के नेतृत्व में किया गया। मैक्स हेल्थकेयर की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक डॉ. बिंदल रोबोटिक, बैरिएट्रिक और मिनिमल एक्सेस सर्जरी के विशेषज्ञ हैं और उनके पास इस क्षेत्र में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
प्रदर्शन में BORNS रोबोटिक्स सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य यह परखना था कि क्या एक देश में मौजूद सर्जन की गतिविधियों और जरूरी विजुअल जानकारी को दूसरे देश में मौजूद रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम तक इतनी तेजी और सटीकता से पहुंचाया जा सकता है कि भविष्य में जटिल सर्जिकल प्रक्रियाओं में इसका इस्तेमाल संभव हो सके।टेली-सर्जरी में सर्जन और ऑपरेशन वाले स्थान का एक जगह मौजूद होना जरूरी नहीं होता। सर्जन एक रिमोट कंसोल के जरिए निर्देश और गतिविधियां देता है, जिन्हें डिजिटल नेटवर्क के माध्यम से दूसरे स्थान पर मौजूद रोबोटिक सिस्टम तक पहुंचाया जाता है। ऐसे सिस्टम में नेटवर्क की गति, लेटेंसी यानी निर्देश पहुंचने में होने वाली देरी, वीडियो की गुणवत्ता और रोबोट की प्रतिक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है। जटिल सर्जिकल प्रक्रिया के दौरान बहुत छोटी देरी भी महत्वपूर्ण हो सकती है, इसलिए इस तरह के प्रदर्शन तकनीकी क्षमता को जांचने के लिहाज से अहम होते हैं।
मैक्स वैशाली और BORNS का रोबोटिक सर्जरी के क्षेत्र में पहले भी सहयोग रहा है। Nature में प्रकाशित एक विवरण के अनुसार, मार्च से मई 2023 के बीच मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली में BORNS के रोबोटिक सिस्टम का पायलट ट्रायल किया गया था। उस दौरान सर्जनों ने 20 ऑपरेशन किए थे, जिनमें बैरिएट्रिक सर्जरी, हर्निया सर्जरी, लिवर और स्प्लीन से जुड़ी सर्जरी तथा गॉल ब्लैडर हटाने की प्रक्रिया शामिल थी। डॉ. बिंदल उस ट्रायल के प्रमुख अन्वेषक थे।अब सीमा-पार लाइव टेली-सर्जरी प्रदर्शन के जरिए इस तकनीक की क्षमताओं को एक अलग स्तर पर जांचा गया है। इसमें सर्जन और रोबोटिक सिस्टम के बीच हजारों किलोमीटर की दूरी थी। प्रदर्शन में यह देखा गया कि सर्जन की गतिविधियां किस तरह नेटवर्क के जरिए रोबोट तक पहुंचती हैं और रोबोटिक सिस्टम उनसे मिलने वाले निर्देशों पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है।
इस तकनीक की भविष्य की संभावनाओं में टेली-मेंटोरिंग भी महत्वपूर्ण है। इसके तहत किसी दूरदराज स्थान पर मौजूद सर्जिकल टीम को किसी दूसरे शहर या देश का विशेषज्ञ वास्तविक समय में मार्गदर्शन दे सकता है। इससे विशेष विशेषज्ञता को भौगोलिक सीमाओं से आगे ले जाने की संभावना बनती है। हालांकि वास्तविक मरीजों पर बड़े पैमाने पर ऐसी सेवाओं के इस्तेमाल के लिए तकनीकी विश्वसनीयता के साथ नियामकीय मंजूरी, मरीज की सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता और आपात स्थिति से निपटने की व्यवस्था जैसे पहलुओं का समाधान जरूरी होगा।रोबोटिक सर्जरी में डॉक्टर सीधे मरीज पर हाथ से उपकरण संचालित करने के बजाय रोबोटिक सिस्टम के जरिए उपकरणों को नियंत्रित करता है। सिस्टम में कैमरा और मैकेनिकल आर्म्स लगे होते हैं, जिनसे सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट जुड़े रहते हैं। मैक्स हेल्थकेयर भी रोबोटिक सर्जरी को इसी प्रकार के कैमरा और मैकेनिकल आर्म वाले सिस्टम के रूप में वर्णित करता है।
टेली-सर्जरी इस मॉडल में एक और स्तर जोड़ती है, क्योंकि इसमें डॉक्टर और रोबोटिक सिस्टम अलग-अलग स्थानों पर हो सकते हैं। ऐसे में तेज और स्थिर इंटरनेट नेटवर्क सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में शामिल हो जाता है। वीडियो और दूसरे डेटा का रियल टाइम ट्रांसमिशन भी जरूरी होता है, ताकि सर्जन को ऑपरेशन क्षेत्र की स्पष्ट जानकारी मिलती रहे और उसके निर्देशों को रोबोटिक सिस्टम तत्काल पूरा कर सके।भारत-चीन के बीच किए गए इस प्रदर्शन का उद्देश्य भी इन्हीं तकनीकी पहलुओं की व्यवहार्यता को परखना था। करीब 5,000 किलोमीटर की भौगोलिक दूरी पर सिस्टम को जोड़कर यह जांचने का प्रयास किया गया कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार सर्जिकल गतिविधियों और विजुअल डेटा का ट्रांसमिशन किस तरह किया जा सकता है।
टेली-सर्जरी की तकनीक भविष्य में उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी हो सकती है जहां किसी खास प्रकार के विशेषज्ञ सर्जन उपलब्ध नहीं हैं। विशेषज्ञ डॉक्टर बड़े चिकित्सा केंद्र में रहकर दूर मौजूद टीम का मार्गदर्शन कर सकते हैं या तकनीकी और नियामकीय व्यवस्था विकसित होने पर रोबोटिक सिस्टम के जरिए प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं। इसके अलावा अलग-अलग देशों के सर्जनों के बीच प्रशिक्षण और टेली-मेंटोरिंग के लिए भी इसका इस्तेमाल संभव है।फिलहाल इस प्रदर्शन को व्यापक नियमित क्लिनिकल सेवा के बजाय तकनीक की क्षमता जांचने वाले कदम के रूप में देखना जरूरी है। मरीजों पर सीमा-पार रिमोट सर्जरी के नियमित इस्तेमाल से पहले सुरक्षा मानकों, नेटवर्क की विश्वसनीयता, कानूनी जिम्मेदारी, मेडिकल लाइसेंसिंग और डेटा सुरक्षा सहित कई पहलुओं पर स्पष्ट व्यवस्था की जरूरत होगी। इसके बावजूद भारत से चीन में मौजूद रोबोटिक सिस्टम को जोड़कर किया गया यह लाइव प्रदर्शन बताता है कि डिजिटल कनेक्टिविटी और रोबोटिक्स के मेल से सर्जिकल विशेषज्ञता को लंबी भौगोलिक दूरी तक पहुंचाने की दिशा में प्रयोग तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
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