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पूर्वजों की याद में गांव में कराएं विकास कार्य, 40 फीसदी खर्च उठाएगी यूपी सरकार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और गांवों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना शुरू की है। योजना के तहत कोई व्यक्ति या निजी संस्था अपने पैतृक गांव अथवा क्षेत्र में सार्वजनिक उपयोग के लिए विकास कार्य कराना चाहती है तो सरकार संबंधित परियोजना की लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा वहन करेगी। शेष राशि संबंधित व्यक्ति या संस्था की ओर से दी जाएगी।
इस योजना के जरिए लोगों को अपने गांव और क्षेत्र के विकास में सीधे भागीदार बनने का अवसर दिया जा रहा है। कोई व्यक्ति अपने माता-पिता, पूर्वजों या परिवार के किसी सदस्य की स्मृति में अपने गांव में बरात घर, अस्पताल या अन्य सार्वजनिक उपयोग की सुविधा का निर्माण कराना चाहता है तो वह मातृभूमि योजना के तहत ऐसा कर सकता है।
योजना की खास बात यह है कि विकास कार्य के लिए आर्थिक योगदान देने वाले व्यक्ति को पहचान भी दी जाएगी। संबंधित निर्माण या विकास कार्य पर लगने वाले शिलापट्ट पर सहयोग करने वाले व्यक्ति का नाम दर्ज किया जा सकेगा। इस व्यवस्था के जरिए सरकार लोगों को अपने पैतृक गांव से जुड़ने और वहां बुनियादी सुविधाओं के विकास में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
उत्तर प्रदेश सरकार की इस पहल के तहत केवल व्यक्तिगत रूप से ही नहीं, बल्कि निजी संस्थाएं भी गांवों के विकास में योगदान दे सकती हैं। यदि कोई संस्था किसी गांव या क्षेत्र में सामाजिक उपयोग का निर्माण कार्य कराना चाहती है तो वह योजना से जुड़ सकती है। संबंधित परियोजना के लिए निर्धारित राशि का 60 प्रतिशत हिस्सा योगदानकर्ता को देना होगा, जबकि 40 प्रतिशत धनराशि सरकार उपलब्ध कराएगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी संसाधनों के साथ जनभागीदारी को जोड़कर गांवों में विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाना है। कई ऐसे लोग हैं जो अपने पैतृक गांव से बाहर शहरों, दूसरे राज्यों या अन्य स्थानों पर रह रहे हैं, लेकिन अपने गांव के विकास में योगदान देना चाहते हैं। मातृभूमि योजना ऐसे लोगों को एक व्यवस्थित माध्यम उपलब्ध कराती है।
योजना के तहत प्रधान, प्रमुख या अन्य उच्च पदों पर रहे लोग भी अपने गांव अथवा क्षेत्र में पूर्वजों की स्मृति में सामाजिक कार्य करा सकते हैं। इसके अलावा निजी संस्थाएं भी अपने स्तर पर सार्वजनिक उपयोग की परियोजनाओं में आर्थिक सहयोग कर सकती हैं। सरकार ऐसे विकास कार्यों में निर्धारित अनुपात के अनुसार वित्तीय भागीदारी करेगी।
गांवों में बरात घर जैसी सुविधाओं का निर्माण होने से स्थानीय लोगों को विवाह और अन्य सामाजिक आयोजनों के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध हो सकता है। इसी तरह स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधाओं का निर्माण होने से ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर लाभ मिल सकता है। योजना का जोर ऐसे कार्यों पर है जिनका इस्तेमाल व्यक्तिगत न होकर सार्वजनिक रूप से समाज के लोग कर सकें।
मातृभूमि योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को बेहतर करने के साथ लोगों के अपने पैतृक स्थान से भावनात्मक जुड़ाव को भी विकास कार्यों से जोड़ने का प्रयास किया गया है। कोई व्यक्ति अपने माता-पिता या पूर्वजों की स्मृति को स्थायी रूप देना चाहता है तो वह सार्वजनिक उपयोग का निर्माण कराकर गांव के लोगों के लिए सुविधा विकसित कर सकता है।
योजना में शिलापट्ट लगाने का प्रावधान भी इसी उद्देश्य से किया गया है। आर्थिक योगदान देने वाले व्यक्ति या संस्था की पहचान संबंधित विकास कार्य से जुड़ी रहेगी। इससे अन्य लोगों को भी अपने गांव में विकास कार्य कराने के लिए प्रेरणा मिलने की उम्मीद है।
सरकार का मानना है कि केवल सरकारी बजट के माध्यम से ही नहीं, बल्कि समाज की भागीदारी से भी गांवों में विकास की गति को बढ़ाया जा सकता है। कई लोग अपनी जन्मभूमि और पैतृक गांव के लिए कुछ करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें इसके लिए स्पष्ट व्यवस्था नहीं मिल पाती। मातृभूमि योजना ऐसे लोगों और संस्थाओं को विकास कार्यों में भागीदारी का अवसर देती है।
योजना के माध्यम से सरकार और नागरिकों के आर्थिक सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। इससे सरकारी धन के साथ निजी योगदान का उपयोग भी गांवों के विकास में होगा। परियोजना का चयन सार्वजनिक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए किया जा सकता है, ताकि उससे अधिक से अधिक ग्रामीणों को लाभ मिले।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बुनियादी सुविधाओं का विकास महत्वपूर्ण माना जाता है। बेहतर सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं मिलने से ग्रामीणों की स्थानीय जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है। ऐसे में मातृभूमि योजना के तहत बनने वाली सार्वजनिक संपत्तियां लंबे समय तक गांव के लोगों के उपयोग में आ सकती हैं।
योजना की सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्था लागत की साझेदारी है। विकास कार्य की कुल लागत का 60 प्रतिशत हिस्सा संबंधित व्यक्ति या निजी संस्था की ओर से दिया जाएगा, जबकि 40 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश सरकार वहन करेगी। इस तरह निजी और सरकारी भागीदारी से परियोजना को पूरा किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना के जरिए सरकार ग्रामीण विकास में जनभागीदारी को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है। अपने माता-पिता और पूर्वजों की स्मृति में सामाजिक कार्य करने के इच्छुक लोगों के लिए यह योजना एक अवसर है। इसके माध्यम से वे अपने पैतृक गांव या क्षेत्र में सार्वजनिक उपयोग की सुविधा विकसित कर सकते हैं और सरकार भी परियोजना की लागत में 40 प्रतिशत तक भागीदारी करेगी।





