गर्भपात की संस्तुति के लिए डफरिन अस्पताल में बना मेडिकल बोर्ड, पॉक्सो पीड़ितों को मिलेगी राहत
प्रयागराज। दुष्कर्म और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम से जुड़े गंभीर आपराधिक मामलों में पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं को समय पर चिकित्सीय और कानूनी राहत देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। प्रयागराज के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के निर्देशों के अनुपालन में जिला महिला चिकित्सालय 'डफरिन' में पांच सदस्यीय विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है। यह बोर्ड बलात्कार और पॉक्सो मामलों की पीड़िताओं का गहन चिकित्सीय परीक्षण करने के बाद 24 सप्ताह से अधिक अवधि के गर्भ के चिकित्सकीय समापन (गर्भपात) की अनुमति देने हेतु त्वरित निर्णय और संस्तुति लेगा।
दुष्कर्म और पॉक्सो जैसी त्रासदियों का शिकार हुई पीड़िताएं और उनके परिजन अक्सर अनचाहे गर्भ को समाप्त कराने की इच्छा जताते हैं। कई बार प्रशासनिक और चिकित्सीय प्रक्रिया में देरी के कारण ऐसे मामले अदालत की चौखट तक पहुंचते हैं। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पूर्व में एक ऐतिहासिक आदेश जारी कर शासन को निर्देश दिया था कि ऐसी पीड़िताओं की शारीरिक और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए जिलों में मेडिकल बोर्ड गठित किए जाएं, ताकि किसी भी तरह के अनावश्यक विलंब से बचा जा सके। उच्च न्यायालय के इसी आदेश का पालन करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रयागराज के पत्र के आधार पर डफरिन अस्पताल प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई कर इस विशेषज्ञ बोर्ड की स्थापना की है।
नवनिर्मित पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड की संरचना बेहद संतुलित और विषय विशेषज्ञों से लैस रखी गई है। डफरिन अस्पताल की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक (SIC) डॉ. सुनीता सागर को इस बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनके अलावा बोर्ड में एक वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ को सचिव बनाया गया है, जबकि बाल रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट/अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ को बतौर सदस्य शामिल किया गया है। यह बहुविषयक बोर्ड पीड़िता के स्वास्थ्य, गर्भाशय की स्थिति, भ्रूण के विकास और मानसिक स्थिति का पूरी तरह से वैज्ञानिक मूल्यांकन करेगा, जिसके बाद ही गर्भपात पर अंतिम संस्तुति दी जाएगी।
मेडिकल बोर्ड के कामकाज और उसकी जवाबदेही को पारदर्शी और सक्रिय बनाए रखने के लिए सख्त निगरानी तंत्र भी तैयार किया गया है। अपर निदेशक (चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) हर महीने इस गठित बोर्ड की सक्रियता, निस्तारित मामलों और कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा करेंगे। इस समीक्षा की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से महानिदेशक (परिवार कल्याण) को प्रेषित की जाएगी।
डफरिन अस्पताल की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुनीता सागर ने बताया कि पॉक्सो और दुष्कर्म से जुड़े संवेदनशील मामलों में गर्भवती पीड़िताओं को त्वरित न्याय और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना ही बोर्ड का प्राथमिक उद्देश्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना किसी प्रशासनिक या प्रक्रियात्मक देरी के पीड़िताओं का तत्काल चिकित्सीय परीक्षण किया जाएगा और बोर्ड की आधिकारिक संस्तुति प्राप्त होते ही नियमानुसार सुरक्षित तरीके से गर्भपात की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।