जौनपुर। शाहगंज क्षेत्र के राजापुर सहावें गांव में बुधवार दोपहर एक दर्दनाक हादसा हो गया। यहां एक रिहायशी छप्पर की मिट्टी की दीवार अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे में महिला ज्ञानती देवी (46) और उनकी 12 वर्षीय बेटी अंब्रिका की मौत हो गई। वहीं, दूसरी बेटी कोमल ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचा ली।

घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर फैल गई। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। ग्रामीणों की भीड़ मौके पर जमा हो गई और सभी ने मिलकर मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन मां-बेटी को बचाया नहीं जा सका।

जानकारी के अनुसार, राजापुर सहावें गांव निवासी बिंद राजभर मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। बुधवार दोपहर वह घर के बाहर बैठे हुए थे। इसी दौरान अचानक उनके रिहायशी छप्पर की मिट्टी की दीवार गिर गई।

दीवार गिरने के समय घर के अंदर ज्ञानती देवी और उनकी बेटियां मौजूद थीं। अचानक हुए हादसे से किसी को संभलने का मौका नहीं मिला। दीवार के मलबे में मां और उनकी 12 वर्षीय बेटी अंब्रिका दब गईं। दूसरी बेटी कोमल ने खतरा भांपते हुए तुरंत वहां से भागकर अपनी जान बचा ली।

दीवार गिरने की तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। ग्रामीणों ने बिना देरी किए राहत कार्य शुरू किया और मिट्टी व मलबा हटाकर दोनों को बाहर निकालने की कोशिश की।

ग्रामीणों की मदद से काफी मशक्कत के बाद मां-बेटी को मलबे से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। दोनों की मौत हो चुकी थी। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार और गांव के लोगों में चीख-पुकार मच गई।

मृतका ज्ञानती देवी के परिवार पर अचानक आई इस आपदा से हर कोई दुखी है। पति बिंद राजभर मजदूरी करके घर चलाते हैं। अब उनके सामने परिवार की जिम्मेदारी और भविष्य को लेकर बड़ी चिंता खड़ी हो गई है।

मृतक बच्ची अंब्रिका गांव के विद्यालय में कक्षा छह की छात्रा थी। ग्रामीणों ने बताया कि वह पढ़ाई में रुचि रखती थी और परिवार की लाडली थी। उसकी मौत से गांव के लोग भी गमगीन हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस मिट्टी की दीवार के गिरने से हादसा हुआ, वह काफी पुरानी थी और उसकी हालत कमजोर हो चुकी थी। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश और मौसम के असर के कारण ऐसी पुरानी कच्ची दीवारें कमजोर हो जाती हैं, जिससे हादसे का खतरा बढ़ जाता है।

घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि कमजोर और जर्जर मकानों की पहचान कर लोगों को सुरक्षित रहने के लिए जागरूक किया जाए। उनका कहना है कि गरीब परिवार अक्सर आर्थिक मजबूरी के कारण पुराने और कमजोर घरों में रहने को मजबूर होते हैं।

सूचना मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने घटना की जानकारी ली और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।

ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते यदि दीवार की मरम्मत या उसे सुरक्षित किया जाता तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। उन्होंने प्रशासन से गरीब परिवारों को आवासीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग भी की।

यह घटना एक बार फिर जर्जर और कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े करती है। बारिश के मौसम में ऐसी घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है, इसलिए समय रहते सावधानी और सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।

फिलहाल गांव में मातम पसरा हुआ है। मां-बेटी की मौत से परिवार और ग्रामीण सदमे में हैं। प्रशासन मामले की जानकारी जुटा रहा है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

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