मेरठ पुलिस का बड़ा एक्शन, हनी ट्रैप से रंगदारी वसूलने वाले गिरोह का खुलासा

Update: 2026-08-01 13:14 GMT

मेरठ  :   उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में थाना ब्रह्मपुरी पुलिस ने हनी ट्रैप के जरिए लोगों को फंसाकर उनसे मोटी रकम ऐंठने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस के अनुसार यह गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के माध्यम से युवकों को अपने जाल में फंसाता था और बाद में खुद को पुलिस अधिकारी बताकर उन्हें धमकाकर रंगदारी वसूलता था। आरोपी कभी खुद को एसएचओ, सीओ तो कभी दारोगा बताकर पीड़ितों पर कार्रवाई का डर दिखाते थे। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से वारदातों को अंजाम देता था। आरोपी पहले सोशल मीडिया के जरिए युवकों से संपर्क करते थे। बातचीत बढ़ाने के बाद उन्हें अपने जाल में फंसा लिया जाता था। इसके बाद गिरोह के सदस्य पीड़ितों को डराने के लिए पुलिस अधिकारियों की फर्जी पहचान का इस्तेमाल करते थे। आरोपी झूठे मुकदमे में फंसाने, जेल भेजने और यहां तक कि एनकाउंटर तक करने की धमकी देकर मोटी रकम की मांग करते थे।

मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित नीरज पाल ने थाना ब्रह्मपुरी में शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि शशांक शर्मा, राहुल, आकाश और उनके अन्य साथियों ने उसे हनी ट्रैप में फंसाया। इसके बाद आरोपियों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए उसे अगवा कर लिया और एक फर्जी कार्यालय में ले गए। वहां उसे बंधक बनाकर डराया-धमकाया गया और उसके साथ मारपीट भी की गई।

नीरज पाल ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने उसे फर्जी एफआईआर और दस्तावेज दिखाकर कार्रवाई का डर दिखाया। उन्होंने कहा कि अगर पैसे नहीं दिए तो उसे जेल भेज दिया जाएगा और उसका एनकाउंटर भी कराया जा सकता है। आरोपियों ने उससे दो लाख रुपये की रंगदारी मांगी। इसके अलावा उसके गूगल-पे खाते से भी 10 हजार रुपये ट्रांसफर करा लिए गए।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच में गिरोह की गतिविधियों का खुलासा हुआ और पुलिस ने कार्रवाई करते हुए रिठानी निवासी राहुल पाल और पुट्ठा निवासी आकाश को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उनका पांच सदस्यीय गिरोह था, जो सोशल मीडिया के जरिए लोगों को निशाना बनाता था।

आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे इंस्टाग्राम पर युवकों से दोस्ती करते थे और फिर उन्हें मोहकमपुर स्थित एक फर्जी कार्यालय में बुलाते थे। इस कार्यालय में पुलिस जैसा माहौल तैयार किया गया था। वहां नकली पुलिस अधिकारी बनकर पीड़ितों को फर्जी एफआईआर और अन्य दस्तावेज दिखाए जाते थे। इसके बाद उन्हें डराकर रुपये वसूले जाते थे।

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से कई महत्वपूर्ण सामान बरामद किए हैं। इनमें घटना में इस्तेमाल की गई बिना नंबर प्लेट वाली मारुति ऑल्टो कार, एक नंबर प्लेट, दो मोबाइल फोन, टेलीफोन, लैपटॉप, टैबलेट, कैलकुलेटर, वॉकी-टॉकी, फोन-पे रिसीवर बॉक्स, बीट बुक, पुलिस की फर्जी मोहर, कई प्रार्थना पत्र, फाइलें और अन्य दस्तावेज शामिल हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की जा रही है, जिससे गिरोह की अन्य वारदातों का पता लगाया जा सके। पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह लंबे समय से इसी तरह लोगों को अपना शिकार बना रहा था। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अन्य सदस्यों की पहचान की जा रही है।

थाना ब्रह्मपुरी पुलिस ने बताया कि गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती करते समय सावधानी बरतनी चाहिए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देनी चाहिए। इस कार्रवाई से हनी ट्रैप और फर्जी पुलिस बनकर ठगी करने वाले गिरोहों पर बड़ा शिकंजा कसने की उम्मीद जताई जा रही है।

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