श्रावस्ती। उत्तर प्रदेश में बैनामा निजीकरण और राजस्व न्यायालयों में अधिवक्ताओं की भूमिका सीमित किए जाने संबंधी शासन के आदेश के खिलाफ वकीलों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को श्रावस्ती जिले की जमुनहा तहसील में न्यू मॉडर्न बार एसोसिएशन के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। नाराज वकीलों ने तहसील के मुख्य गेट के सामने जमुनहा-बहराइच राज्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। इससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात प्रभावित हुआ। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं को रास्ता दिया। सूचना मिलने पर मल्हीपुर थाना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों के आश्वासन के बाद अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन समाप्त कर दिया। इसके बाद राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपकर संबंधित शासनादेश वापस लेने की मांग की गई। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होने तक आंदोलन जारी रह सकता है।
तहसील गेट के सामने सड़क पर उतरे अधिवक्ता
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को जमुनहा तहसील के अधिवक्ता न्यू मॉडर्न बार एसोसिएशन के नेतृत्व में एकत्र हुए।अधिवक्ताओं ने बैनामा निजीकरण और राजस्व कानूनों में किए गए बदलावों के विरोध में नारेबाजी की।इसके बाद बड़ी संख्या में वकील तहसील के गेट नंबर एक के सामने जमुनहा-बहराइच मार्ग पर बैठ गए।अचानक सड़क पर प्रदर्शन शुरू होने के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई।मार्ग पर आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
हालांकि, अधिवक्ताओं ने आपातकालीन सेवाओं के लिए रास्ता खुला रखा।
स्थानीय रिपोर्टों में चक्काजाम की अवधि अलग-अलग बताई गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार प्रदर्शन के कारण लगभग आधे घंटे तक यातायात प्रभावित रहा, जबकि कुछ विवरणों में यह अवधि करीब एक घंटा बताई गई है।पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचेमार्ग जाम होने की सूचना मिलते ही मल्हीपुर थाना पुलिस सक्रिय हो गई।पुलिस बल मौके पर पहुंचा और प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं से बातचीत शुरू की।इसके बाद तहसील प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया और उनकी मांगों को संबंधित स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।एसडीएम से बातचीत के बाद अधिवक्ताओं ने सड़क से हटकर प्रदर्शन समाप्त किया।इसके बाद मार्ग पर वाहनों का आवागमन धीरे-धीरे सामान्य हुआ।प्रदर्शन के दौरान किसी बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है।
राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंपा
चक्काजाम समाप्त होने के बाद अधिवक्ताओं ने एसडीएम के माध्यम से राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंपा।ज्ञापन में बैनामा निजीकरण और राजस्व न्यायालयों में अधिवक्ताओं की भूमिका से संबंधित नए आदेश को वापस लेने की मांग की गई।अधिवक्ताओं का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने से आम लोगों को राजस्व संबंधी मामलों में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।उन्होंने आशंका जताई कि इससे विशेष रूप से किसानों, छोटे भूमि स्वामियों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की समस्याएं बढ़ सकती हैं।वकीलों ने सरकार से मांग की कि राजस्व कानूनों में बदलाव करने से पहले अधिवक्ता संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों की आपत्तियों पर विचार किया जाए।
12 अक्टूबर से जारी है कार्य बहिष्कार
न्यू मॉडर्न बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार, बैनामा निजीकरण और राजस्व न्यायालयों से संबंधित नई व्यवस्था के विरोध में 12 अक्टूबर से आंदोलन किया जा रहा है।अधिवक्ता रजिस्ट्री कार्यालयों और राजस्व न्यायालयों के कार्यों का बहिष्कार कर रहे हैं।वकीलों का कहना है कि लगातार विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन दिए जाने के बावजूद अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।इसी नाराजगी के चलते शुक्रवार को सड़क पर उतरकर चक्काजाम किया गया।बार एसोसिएशन ने कहा कि सरकार को अधिवक्ताओं की आपत्तियों को गंभीरता से लेना चाहिए।
राजस्व न्यायालयों की नई व्यवस्था पर सवाल
अधिवक्ताओं का विरोध केवल बैनामा निजीकरण तक सीमित नहीं है।वे राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली में किए गए संशोधनों पर भी सवाल उठा रहे हैं।अधिवक्ता संगठनों के अनुसार, नई व्यवस्था में भूमि रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को ऑनलाइन पोर्टल से जोड़ा गया है।इसके अतिरिक्त राजस्व संहिता की धारा 116 के अंतर्गत अंश विभाजन तथा धारा 24 के अंतर्गत सीमांकन से संबंधित कुछ प्रक्रियाओं को ऑनलाइन किए जाने का भी विरोध किया जा रहा है।वकीलों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सभी लोगों के पास ऑनलाइन प्रक्रियाओं की पर्याप्त जानकारी और संसाधन नहीं होते।ऐसे में नई व्यवस्था से किसानों और अन्य वादकारियों की परेशानियां बढ़ सकती हैं।हालांकि, ऑनलाइन व्यवस्था से धोखाधड़ी या भ्रष्टाचार बढ़ने संबंधी दावे अधिवक्ता संगठनों की आशंकाएं हैं। इन्हें प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
चार जिलों में पायलट प्रोजेक्ट का विरोध
राजस्व कानूनों में संशोधन के खिलाफ श्रावस्ती के अलावा अन्य जिलों में भी अधिवक्ता संगठनों ने आपत्ति दर्ज कराई है।रिपोर्टों के अनुसार, नई व्यवस्था को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में श्रावस्ती, बलरामपुर, बांदा और हरदोई सहित चार जिलों में लागू किए जाने का विरोध हो रहा है।अधिवक्ताओं का कहना है कि सरकार को नई प्रक्रिया लागू करने से पहले इससे जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की समीक्षा करनी चाहिए।विशेष रूप से जमीन के विवाद, दाखिल-खारिज, सीमांकन और राजस्व मुकदमों में आम नागरिकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है।प्रदर्शनकारी वकीलों का तर्क है कि न्यायिक प्रक्रियाओं में बदलाव से पहले सभी संबंधित पक्षों की राय लेना जरूरी है।
पहले भी निकाला गया था विरोध मार्च
जमुनहा तहसील के अधिवक्ताओं ने इससे पहले 17 अक्टूबर को भी नए शासनादेश के विरोध में प्रदर्शन किया था।उस दौरान न्यू मॉडर्न बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सत्य नारायण यादव के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने तहसील से मल्हीपुर चौराहे तक पैदल मार्च निकाला था।इसके बाद राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंपकर आदेश वापस लेने की मांग की गई थी।प्रदर्शन में जिला बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने भाग लिया था।उस समय भी वकीलों ने चेतावनी दी थी कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन आगे बढ़ाया जाएगा।शुक्रवार का चक्काजाम उसी विरोध अभियान की अगली कड़ी माना जा रहा है।
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने जताई नाराजगी
शुक्रवार के प्रदर्शन में न्यू मॉडर्न बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सत्य नारायण यादव सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता शामिल हुए।प्रदर्शन में महामंत्री जितेंद्र कुमार भारती और कोषाध्यक्ष प्रहलाद यादव की भी भागीदारी रही।अधिवक्ताओं ने कहा कि राजस्व मामलों में आम लोगों को सस्ता और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।उन्होंने सरकार से संबंधित आदेशों की समीक्षा करके उनकी मांगों पर उचित निर्णय लेने का आग्रह किया।वकीलों का कहना है कि राजस्व न्यायालयों में अधिवक्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और नई व्यवस्था लागू करते समय उनके सुझावों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
आम लोगों के कामकाज पर पड़ सकता है असर
लगातार कार्य बहिष्कार के कारण राजस्व न्यायालयों और रजिस्ट्री कार्यालयों से जुड़े कामकाज के प्रभावित होने की आशंका है।जमीन की खरीद-बिक्री, दाखिल-खारिज, सीमांकन और अन्य राजस्व मामलों के लिए बड़ी संख्या में लोग तहसील कार्यालय पहुंचते हैं।यदि आंदोलन लंबा चलता है, तो संबंधित प्रक्रियाओं में देरी हो सकती है।हालांकि, अब तक कितने मामलों का निस्तारण प्रभावित हुआ है, इसका आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।फिलहाल अधिवक्ता संगठनों की नजर सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई है।प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्रमुख मांग बैनामा निजीकरण और राजस्व कानूनों में किए गए विवादित बदलावों को वापस लेना है।अब देखना होगा कि शासन अधिवक्ता संगठनों की मांगों पर क्या निर्णय लेता है और आगे आंदोलन किस दिशा में बढ़ता है।