यूपी चुनाव से पहले बेटे के लिए टिकट मांग रहे कौशल किशोर छलका सियासी दर्द
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री **कौशल किशोर** के तेवर चर्चा में हैं। पार्टी में अपनी अनदेखी का दर्द सार्वजनिक रूप से जाहिर करने के बाद अब उन्होंने अपने बेटे **विकास किशोर** के लिए भाजपा से विधानसभा टिकट की दावेदारी भी खुलकर सामने रख दी है। कौशल किशोर ने साफ कहा है कि इस बार न तो वह खुद और न ही उनकी पत्नी चुनाव लड़ेंगी, बल्कि वह विकास किशोर को चुनाव लड़ाना चाहते हैं। हालांकि टिकट पर अंतिम फैसला भाजपा नेतृत्व को ही करना है।
कौशल किशोर का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। पिछले कुछ दिनों में उनकी सोशल मीडिया पोस्ट और पार्टी में अनदेखी से जुड़े बयानों ने पहले ही राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे रखी है। अब बेटे के टिकट को लेकर उनकी खुली पैरवी ने लखनऊ और आसपास की भाजपा राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा शुरू कर दी है।
बोले- विकास हमारा बेटा है पार्टी में लगातार काम कर रहा
अपने बेटे की चुनावी दावेदारी को लेकर कौशल किशोर ने कहा कि विकास किशोर उनका बेटा है और वह लगातार पार्टी के लिए काम करता रहा है। विकास भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा में उपाध्यक्ष भी रह चुका है। कौशल किशोर के मुताबिक विकास ने उस पद से इस्तीफा दिया था, लेकिन संभव है कि उसका इस्तीफा स्वीकार न हुआ हो।
उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि इस बार परिवार की ओर से चुनावी मैदान में विकास को आगे किया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि टिकट देना या नहीं देना पार्टी का फैसला है और भाजपा जो निर्णय करेगी, उसी के अनुसार आगे की रणनीति तय की जाएगी।
इस बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि विकास किशोर को किस विधानसभा क्षेत्र से दावेदार के तौर पर आगे किया जा सकता है। कौशल किशोर ने ताजा बयान में किसी सीट को लेकर अंतिम घोषणा नहीं की है।
खुद और पत्नी के चुनाव नहीं लड़ने की बात
कौशल किशोर की पत्नी **जय देवी कौशल** वर्तमान में लखनऊ की मलिहाबाद सुरक्षित विधानसभा सीट से भाजपा विधायक हैं। ऐसे में कौशल किशोर द्वारा खुद और पत्नी के चुनाव नहीं लड़ने तथा बेटे को आगे करने की बात राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कौशल किशोर खुद भी मलिहाबाद की राजनीति से जुड़े रहे हैं। बाद में वह मोहनलालगंज सुरक्षित लोकसभा सीट से भाजपा सांसद बने। उन्होंने 2014 और 2019 में मोहनलालगंज से जीत दर्ज की थी। नरेंद्र मोदी सरकार में उन्हें जुलाई 2021 में केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों का राज्यमंत्री बनाया गया था और वह जून 2024 तक इस पद पर रहे।
2024 के लोकसभा चुनाव में कौशल किशोर को मोहनलालगंज से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद भी वह क्षेत्र में राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे हैं।
पार्टी में अनदेखी का छलका दर्द
बेटे के टिकट की पैरवी के साथ कौशल किशोर ने भाजपा के भीतर अपनी स्थिति को लेकर भी खुलकर बात की है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें पार्टी के कई कार्यक्रमों में नहीं बुलाया जाता और कुछ लोग उन्हें किनारे करने की कोशिश कर रहे हैं।
कौशल किशोर ने कहा कि उन्हें ऐसा महसूस होता है कि निश्चित रूप से उन्हें पीछे धकेलने का प्रयास किया जा रहा है। कई पार्टी कार्यक्रमों के साथ सरकारी आयोजनों की जानकारी भी उन्हें नहीं दी जाती।
हालांकि उन्होंने साफ किया कि वह इससे परेशान होकर राजनीति छोड़ने वाले नहीं हैं। अपने लंबे राजनीतिक संघर्ष का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह जमीन से उठकर यहां तक पहुंचे हैं और अपने राजनीतिक जीवन में कई चुनावी हार देख चुके हैं।
उनके मुताबिक उन्होंने 15 चुनाव लड़े और इनमें 12 चुनाव हारे हैं। इसलिए हार या राजनीतिक अनदेखी उन्हें विचलित नहीं करती।
पूछा- पार्टी मेरे बारे में क्या सोचती है?
कौशल किशोर ने यह भी कहा कि वह जानना चाहते हैं कि पार्टी उनके बारे में क्या सोचती है। उनका कहना है कि वह लगातार जनता की समस्याओं को उठाते रहे हैं और अगर जनता के हित में आवाज उठाना गलत है तो फिर सही क्या है, यह उन्हें समझ नहीं आता।
उन्होंने खुद को पद की दौड़ से दूर बताते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता जनता और कार्यकर्ताओं की समस्याएं सामने रखना है। उनका कहना है कि भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता अगर किसी जायज समस्या को लेकर थाने, तहसील या प्रशासनिक अधिकारी के पास जाते हैं तो उनकी बात सुनी जानी चाहिए।
पूर्व केंद्रीय मंत्री के अनुसार कई कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर निराशा है कि उनकी सुनवाई नहीं होती। ऐसी स्थिति कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर कर सकती है।
2024 की हार पर भी उठाए सवाल
कौशल किशोर ने 2024 के लोकसभा चुनाव में अपनी हार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि चुनाव के दौरान भाजपा के ही कुछ लोगों ने उनका विरोध किया था और इसकी जानकारी पार्टी नेतृत्व को भी थी।
उन्होंने दावा किया कि संबंधित लोगों की शिकायत करने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। कौशल किशोर का कहना है कि अगर पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ काम करने वालों पर कार्रवाई नहीं होती और उल्टा उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती हैं तो इससे समर्पित कार्यकर्ताओं का भरोसा कमजोर होता है।
2024 के लोकसभा चुनाव में मोहनलालगंज सीट पर कौशल किशोर को हार का सामना करना पड़ा था। वह अपनी पत्नी जय देवी के मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र में भी बढ़त हासिल नहीं कर पाए थे।
यही कारण है कि अब उनके ताजा बयानों को 2027 विधानसभा चुनाव की टिकट राजनीति और भाजपा के अंदरूनी समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
'गेंद' वाली पोस्ट से मची थी हलचल
कौशल किशोर के हालिया बयानों से पहले उनकी एक सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी। उन्होंने एक मित्र से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए लिखा था कि गेंद जितनी ऊपर जानी थी जा चुकी है और अब नीचे आ रही है, जबकि नीचे आने की गति लगातार बढ़ती जाती है।
इस पोस्ट के बाद कई तरह की राजनीतिक व्याख्याएं शुरू हो गई थीं। इसे कुछ लोगों ने भाजपा की राजनीति या किसी बड़े नेता की ओर इशारा मान लिया।
लेकिन कौशल किशोर ने बाद में सफाई दी कि उन्होंने किसी पार्टी, संगठन या नेता का नाम नहीं लिया था। उनका कहना था कि उनकी टिप्पणी सामान्य रूप से उन व्यक्तियों और संगठनों के लिए थी जो अपने मूल उद्देश्यों और सिद्धांतों से भटक जाते हैं।
भाजपा छोड़ने की अटकलों पर क्या बोले?
कौशल किशोर के बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट के बाद उनके भाजपा छोड़ने की अटकलें भी शुरू हो गई थीं। हालांकि उन्होंने इन अटकलों को खारिज किया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह भाजपा में हैं और पार्टी के सिद्धांतों तथा विचारधारा के साथ खड़े हैं। उन्होंने खुद को भाजपा का कर्मठ कार्यकर्ता बताया। साथ ही यह भी कहा कि भविष्य में अगर पार्टी उनसे कहती है कि उनकी जरूरत नहीं है, तभी वह अपने अगले राजनीतिक कदम पर विचार करेंगे।
इसलिए फिलहाल उनके बयानों को भाजपा छोड़ने की घोषणा के तौर पर नहीं देखा जा सकता। बल्कि वह पार्टी के भीतर अपनी शिकायतों और कार्यकर्ताओं की समस्याओं को खुलकर सामने रख रहे हैं।
पत्नी के साथ कथित भेदभाव का मामला भी रहा चर्चा में
कौशल किशोर परिवार हाल में एक अन्य विवाद को लेकर भी चर्चा में रहा। उनकी पत्नी और मलिहाबाद से भाजपा विधायक जय देवी कौशल ने काकोरी क्षेत्र में एक मंदिर के जीर्णोद्धार कार्यक्रम के दौरान अपने साथ जातिगत भेदभाव किए जाने का आरोप लगाया था।
विकास किशोर ने भी इस मामले पर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी अगर किसी जनप्रतिनिधि के साथ जाति के आधार पर भेदभाव होता है तो यह गंभीर विषय है।
इस विवाद के बाद कौशल किशोर परिवार के राजनीतिक तेवर लगातार चर्चा में बने हुए हैं।
विकास किशोर की दावेदारी के मायने
विकास किशोर के टिकट की मांग को कौशल किशोर परिवार में राजनीतिक पीढ़ी परिवर्तन के संकेत के तौर पर भी देखा जा सकता है। जय देवी कौशल पहले से विधायक हैं, जबकि कौशल किशोर विधायक, सांसद और केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। अब अगर विकास को टिकट मिलता है तो परिवार की अगली पीढ़ी सीधे चुनावी राजनीति में उतर सकती है।
लेकिन टिकट मिलना आसान होगा, ऐसा अभी नहीं कहा जा सकता। भाजपा में विधानसभा उम्मीदवारों का चयन संगठनात्मक सर्वे, स्थानीय समीकरण, मौजूदा विधायक के प्रदर्शन, सामाजिक समीकरण और जीत की संभावना सहित कई पहलुओं को देखकर किया जाता है।
कौशल किशोर ने भी टिकट को अपना अधिकार बताने के बजाय अंतिम फैसला पार्टी पर छोड़ा है। इसलिए विकास किशोर की दावेदारी फिलहाल राजनीतिक मांग है, टिकट की आधिकारिक घोषणा नहीं।
2027 चुनाव से पहले बढ़ी सियासी अहमियत
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। भाजपा अभी से संगठन और सरकार के स्तर पर तैयारियों में जुटी है। कौशल किशोर ने भी कहा है कि पार्टी को विधानसभा चुनाव के लिए पूरी ताकत के साथ तैयारी करनी होगी और अपने मूल सिद्धांतों से नहीं भटकना चाहिए।
ऐसे समय में एक पूर्व केंद्रीय मंत्री द्वारा अपनी उपेक्षा का आरोप लगाना और साथ ही बेटे के लिए टिकट की मांग करना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
फिलहाल कौशल किशोर ने भाजपा छोड़ने की अटकलों पर विराम लगाया है और खुद को पार्टी का कर्मठ कार्यकर्ता बताया है। लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी उपेक्षा, कार्यकर्ताओं की समस्याओं और 2024 में कथित भितरघात जैसे मुद्दों पर चुप नहीं रहेंगे।
अब नजर भाजपा नेतृत्व के रुख पर होगी। क्या पार्टी विकास किशोर की दावेदारी पर विचार करती है, क्या जय देवी कौशल की जगह परिवार की अगली पीढ़ी को मौका मिलता है और कौशल किशोर की नाराजगी को संगठन किस तरह संभालता है—इन सवालों के जवाब 2027 के चुनावी टिकट बंटवारे के करीब आने पर साफ होंगे।