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ओवैसी का साथ छोड़ कांग्रेस में पहुंचे आसिम वकार

Ratna Netam
2 Sept 2026 3:33 PM IST
ओवैसी का साथ छोड़ कांग्रेस में पहुंचे आसिम वकार
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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राज्य की राजनीति में बड़ा सियासी बदलाव सामने आया है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानी AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता और वरिष्ठ नेता **आसिम वकार** बुधवार को कांग्रेस में शामिल हो गए। उनके कांग्रेस में जाने को ओवैसी की पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि वकार पिछले करीब 10 वर्षों से AIMIM में सक्रिय थे और उत्तर प्रदेश में पार्टी का प्रमुख चेहरा रहे हैं।
आसिम वकार ने कांग्रेस की सदस्यता उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी की मौजूदगी में ग्रहण की। उनके कांग्रेस में शामिल होने के साथ ही उत्तर प्रदेश की विपक्षी राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
करीब 10 साल से AIMIM में थे सक्रिय
आसिम वकार AIMIM के उन नेताओं में रहे हैं जिन्हें पार्टी की बात को सार्वजनिक मंचों और मीडिया डिबेट में मजबूती से रखने के लिए जाना जाता था। वह पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर लंबे समय से सक्रिय थे। उत्तर प्रदेश में असदुद्दीन ओवैसी की राजनीतिक गतिविधियों और संगठन विस्तार के दौरान वकार भी पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे।
यूपी की राजनीति में उनकी पहचान खास तौर पर AIMIM के मुखर प्रवक्ता के रूप में बनी। ऐसे में चुनाव से पहले उनका पार्टी छोड़ना ओवैसी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वकार का राजनीतिक अनुभव AIMIM तक सीमित नहीं रहा है। वह इससे पहले समाजवादी पार्टी में भी लंबे समय तक सक्रिय रहे थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने करीब 20 साल तक सपा में काम किया था। इसके बाद वह AIMIM में शामिल हुए और लगभग एक दशक तक ओवैसी की पार्टी के साथ जुड़े रहे। अब कांग्रेस में शामिल होकर उन्होंने अपने राजनीतिक सफर में एक और बड़ा बदलाव किया है।
कांग्रेस में आते ही AIMIM पर साधा निशाना
कांग्रेस में शामिल होने के बाद आसिम वकार ने AIMIM की राजनीतिक रणनीति को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर विपक्षी दलों का मुख्य उद्देश्य भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से हटाना है तो उन्हें आपस में मुकाबला करने के बजाय इस लक्ष्य पर ध्यान देना चाहिए।
वकार ने आरोप लगाया कि AIMIM भाजपा के खिलाफ लड़ाई की बात करती है, लेकिन जमीन पर कई जगह उसका मुकाबला कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों से होता दिखाई देता है। उनके मुताबिक ऐसी स्थिति में भाजपा विरोधी वोटों के बंटने का सवाल उठता है।
उन्होंने विपक्षी दलों के बीच व्यापक एकजुटता की जरूरत पर जोर दिया। वकार के बयान को उनके कांग्रेस में शामिल होने के पीछे की राजनीतिक सोच से जोड़कर देखा जा रहा है।
ओवैसी का मिशन यूपी चल रहा है
असदुद्दीन ओवैसी लंबे समय से उत्तर प्रदेश में AIMIM का राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी ने पिछले विधानसभा चुनावों में भी कई सीटों पर चुनाव लड़ा था और अब 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर संगठन विस्तार की तैयारी कर रही है।
ओवैसी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि AIMIM उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मैदान में उतरेगी। पार्टी की ओर से प्रदेश में संगठन को मजबूत करने और ज्यादा सीटों पर प्रभावी तरीके से चुनाव लड़ने की कोशिश की जा रही है। ऐसे समय में राष्ट्रीय प्रवक्ता जैसे महत्वपूर्ण चेहरे का पार्टी से बाहर जाना संगठन के लिए चुनौती माना जा रहा है।
वकार के जाने से पार्टी की चुनावी रणनीति पूरी तरह बदल जाएगी, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगा। लेकिन उनके जाने से AIMIM को अपने सार्वजनिक राजनीतिक संदेश और संगठन में उनकी भूमिका की भरपाई करने की जरूरत जरूर पड़ेगी।
कांग्रेस के लिए क्यों अहम है यह एंट्री?
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी है। पार्टी समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे आसिम वकार का कांग्रेस में शामिल होना पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
वकार लंबे समय तक मुस्लिम राजनीति से जुड़े मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखते रहे हैं। इसके अलावा उन्हें उत्तर प्रदेश की राजनीति और विपक्षी दलों के कामकाज का अनुभव भी है। कांग्रेस को उम्मीद होगी कि उनके राजनीतिक संपर्क और अनुभव से संगठन को कुछ इलाकों में फायदा मिल सकता है।
उनके कांग्रेस में शामिल होने के कार्यक्रम में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने भी इस घटनाक्रम को खास बना दिया।
मुस्लिम वोटों के समीकरण पर भी नजर
उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में मुस्लिम मतदाता कई विधानसभा सीटों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM सहित कई दल इस वर्ग के बीच अपना समर्थन मजबूत करने की कोशिश करते रहे हैं।
आसिम वकार का AIMIM छोड़कर कांग्रेस में जाना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह लंबे समय तक ओवैसी की पार्टी की राजनीतिक लाइन को सामने रखने वाले प्रमुख चेहरों में रहे। अब कांग्रेस में आने के बाद उनकी राजनीतिक सक्रियता का इस्तेमाल पार्टी किस तरह करती है, यह आने वाले दिनों में देखने वाली बात होगी।
हालांकि किसी एक नेता के दल बदलने से किसी खास समुदाय या पूरे चुनावी वोट बैंक के रुख में बदलाव का दावा करना उचित नहीं होगा। चुनावी परिणाम कई कारकों पर निर्भर करते हैं, जिनमें स्थानीय उम्मीदवार, गठबंधन, क्षेत्रीय मुद्दे, संगठन और मतदाताओं की प्राथमिकताएं शामिल हैं।
सपा से भी रहा है लंबा रिश्ता
आसिम वकार का समाजवादी पार्टी से पुराना रिश्ता रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक वह करीब दो दशक तक सपा से जुड़े रहे थे। इसके बाद उन्होंने AIMIM का रुख किया। इस लिहाज से कांग्रेस में उनकी एंट्री को उनके राजनीतिक सफर का तीसरा बड़ा पड़ाव माना जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच विपक्षी गठबंधन की राजनीति भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में वकार के कांग्रेस में आने से उनके पुराने राजनीतिक अनुभव का इस्तेमाल गठबंधन की रणनीति में भी किया जा सकता है।
इमरान प्रतापगढ़ी की भूमिका की चर्चा
आसिम वकार के कांग्रेस में शामिल होने के घटनाक्रम में राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी की भूमिका की भी चर्चा है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि वकार को कांग्रेस के करीब लाने में प्रतापगढ़ी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। हालांकि इस संबंध में सामने आई जानकारी को राजनीतिक सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष के तौर पर इमरान प्रतापगढ़ी पार्टी के अल्पसंख्यक outreach में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। वकार जैसे नेता का कांग्रेस में आना पार्टी के इस अभियान को और मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।
कांग्रेस की नजर बीजेपी के पूर्व सांसद पर भी
आसिम वकार के कांग्रेस में शामिल होने के बीच एक और राजनीतिक चर्चा भी तेज है। रिपोर्टों के अनुसार कांग्रेस की नजर भाजपा के पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री कौशल किशोर पर भी है। कौशल किशोर लखनऊ से सटी मोहनलालगंज लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
कौशल किशोर दलित समाज से आते हैं। ऐसे में वकार और कौशल किशोर जैसे अलग-अलग सामाजिक आधार वाले नेताओं को लेकर चल रही चर्चाओं को कांग्रेस की सामाजिक समीकरण मजबूत करने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि कौशल किशोर के कांग्रेस में शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि आसिम वकार की तरह नहीं हुई है।
2027 के चुनाव से पहले बढ़ेगी राजनीतिक हलचल
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं और उससे पहले राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। चुनावी रणनीति के साथ-साथ नेताओं के दल बदलने का सिलसिला भी बढ़ सकता है।
आसिम वकार का कांग्रेस में शामिल होना इसी बदलते राजनीतिक माहौल का संकेत है। AIMIM जहां प्रदेश में अपना विस्तार करना चाहती है, वहीं कांग्रेस अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश में है। ऐसे में दोनों दलों के बीच आने वाले समय में बयानबाजी भी तेज हो सकती है।
वकार के कांग्रेस में आने के बाद यह भी देखना होगा कि उनके साथ AIMIM के कितने स्थानीय कार्यकर्ता या समर्थक कांग्रेस की ओर रुख करते हैं। अगर बड़ी संख्या में स्थानीय नेता उनके साथ आते हैं तो इसका कांग्रेस के संगठन पर असर पड़ सकता है। वहीं अगर यह बदलाव केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित रहता है तो इसका चुनावी प्रभाव भी सीमित रह सकता है।
अब आगे क्या होगा?
आसिम वकार के कांग्रेस में शामिल होने के बाद सबसे बड़ा सवाल उनकी नई राजनीतिक भूमिका को लेकर है। कांग्रेस उन्हें संगठन में जिम्मेदारी देती है या चुनावी अभियान में इस्तेमाल करती है, यह आने वाले समय में साफ होगा।
दूसरी तरफ असदुद्दीन ओवैसी के सामने उत्तर प्रदेश में AIMIM के संगठन को मजबूत बनाए रखने की चुनौती है। पार्टी को नए चेहरों को सामने लाने के साथ-साथ अपने राजनीतिक संदेश को भी मजबूती से जनता तक पहुंचाना होगा।
फिलहाल यूपी चुनाव से पहले आसिम वकार का कांग्रेस में जाना निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम है। AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर पहचाने जाने वाले वकार का कांग्रेस में जाना एक ओर ओवैसी की पार्टी के लिए झटका है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में एक अनुभवी और मुखर राजनीतिक चेहरा मिला है। अब इस दल-बदल का वास्तविक असर आने वाले महीनों में संगठन और चुनावी राजनीति के स्तर पर कितना दिखाई देता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
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