उत्तर प्रदेश

844 बीसी सखियों को मिलेगा कैशलेस इलाज

Kavita2
2 Sept 2026 2:28 PM IST
844 बीसी सखियों को मिलेगा कैशलेस इलाज
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लखीमपुर खीरी। गांव-गांव तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाने वाली बीसी सखी दीदियों के लिए राहत भरी खबर है। लखीमपुर खीरी जिले में कार्यरत 844 बीसी सखियों को जल्द ही पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी लखपति दीदियों को भी स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में लाने की तैयारी चल रही है। योजना लागू होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाली इन महिलाओं को बीमारी की स्थिति में इलाज के खर्च की चिंता से बड़ी राहत मिल सकती है।

हालांकि योजना को लेकर अभी जिला स्तर पर कोई औपचारिक निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। इसके बावजूद सरकार की मंशा और प्रस्तावित स्वास्थ्य सुविधा की जानकारी सामने आने के बाद बीसी सखियों और लखपति दीदियों में उत्साह है। संबंधित दिशा-निर्देश मिलने के बाद जिले में योजना को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।

जिले में काम कर रहीं 844 बीसी सखियां

लखीमपुर खीरी जिले में कुल 844 बीसी सखियां ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने का काम कर रही हैं। इन महिलाओं ने बैंक और ग्रामीण आबादी के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में अपनी पहचान बनाई है।

ग्रामीणों को छोटी-छोटी बैंकिंग जरूरतों के लिए बैंक शाखाओं तक लंबी दूरी तय न करनी पड़े, इसमें बीसी सखियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। वे गांवों में ही लोगों को कई बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं।

स्वास्थ्य सुरक्षा की सुविधा मिलने से इन महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से अतिरिक्त संरक्षण मिल सकेगा।

पांच लाख तक कैशलेस इलाज की उम्मीद

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत बीसी सखियों को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा देने की तैयारी है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं देने वाली महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी आर्थिक जोखिम से सुरक्षा प्रदान करना है।

यदि योजना निर्धारित स्वरूप में लागू होती है तो पात्र बीसी सखियां तय नियमों के तहत अस्पतालों में कैशलेस उपचार की सुविधा प्राप्त कर सकेंगी।

इलाज पर होने वाला बड़ा खर्च अक्सर परिवार के बजट को प्रभावित करता है। ऐसे में स्वास्थ्य सुरक्षा का दायरा बढ़ने से बीसी सखियों को गंभीर बीमारी या आकस्मिक चिकित्सा जरूरत के समय आर्थिक मदद मिल सकेगी।

लखपति दीदियों को भी मिलेगा लाभ

स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ केवल बीसी सखियों तक सीमित रखने के बजाय स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी लखपति दीदियों तक भी पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूह महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। समूहों से जुड़कर महिलाएं छोटे व्यवसाय, उत्पादन, कृषि आधारित गतिविधियों और अन्य रोजगार के जरिए अपनी आय बढ़ा रही हैं।

लखपति दीदियों को स्वास्थ्य सुरक्षा मिलने से उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ सामाजिक सुरक्षा भी मजबूत होगी।

अभी औपचारिक आदेश का इंतजार

जिले में योजना को लेकर उत्साह जरूर है, लेकिन अभी जिला स्तर पर कोई औपचारिक निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। इसलिए योजना की पात्रता, लाभ लेने की प्रक्रिया और कैशलेस इलाज के लिए निर्धारित अस्पतालों जैसी विस्तृत जानकारी आदेश आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

जिला स्तर पर दिशा-निर्देश मिलने के बाद लाभार्थियों का विवरण तैयार करने और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं शुरू होने की संभावना है।

फिलहाल बीसी सखियों को प्रस्तावित व्यवस्था के औपचारिक रूप से लागू होने का इंतजार है।

ग्रामीण बैंकिंग की मजबूत कड़ी हैं बीसी सखियां

बीसी सखी योजना ने ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बैंक शाखाओं से दूर रहने वाले लोगों को गांव के आसपास ही बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराने में बीसी सखियां मदद करती हैं।

ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली धनराशि और अन्य वित्तीय सेवाओं तक पहुंचाने में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहती है।

महिलाएं इस काम के माध्यम से न केवल ग्रामीणों की सहायता कर रही हैं बल्कि स्वयं भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं।

सामाजिक सुरक्षा का भरोसा होगा मजबूत

बीसी सखियों के काम की प्रकृति ऐसी है कि उन्हें लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के बीच रहकर सेवाएं देनी होती हैं। स्वास्थ्य संबंधी समस्या आने पर इलाज का खर्च उनके परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल सकता है।

पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा मिलने से उन्हें बड़ी आर्थिक सुरक्षा मिल सकती है। इससे उन्हें अपने काम पर अधिक भरोसे और सुरक्षा के साथ ध्यान देने में मदद मिलेगी।

स्वास्थ्य सुरक्षा केवल इलाज का खर्च कम करने तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि परिवार को अचानक आने वाले आर्थिक संकट से भी बचाने में सहायक हो सकती है।

महिला सशक्तिकरण को मिलेगा बढ़ावा

बीसी सखी और लखपति दीदी जैसी पहल ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने से जुड़ी हैं। अब स्वास्थ्य सुरक्षा को भी इससे जोड़ने की तैयारी महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता तभी अधिक मजबूत हो सकती है जब उनके पास स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा का भी भरोसा हो।

बीमारी की स्थिति में जमा पूंजी इलाज पर खर्च होने का खतरा रहता है। कैशलेस उपचार की सुविधा इस जोखिम को कम कर सकती है।

स्वयं सहायता समूहों को भी फायदा

लखीमपुर खीरी में बड़ी संख्या में महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं। ये समूह महिलाओं को बचत, ऋण और रोजगार से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने का माध्यम बन रहे हैं।

लखपति दीदी के रूप में पहचान बनाने वाली महिलाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। स्वास्थ्य सुरक्षा मिलने से उनके लिए अपने व्यवसाय और आजीविका को लगातार आगे बढ़ाना आसान हो सकता है।

ग्रामीण परिवारों को भी मिलेगी राहत

बीसी सखियों और लखपति दीदियों को स्वास्थ्य सुरक्षा मिलने का फायदा अप्रत्यक्ष रूप से उनके परिवारों को भी होगा। किसी गंभीर बीमारी की स्थिति में इलाज का बड़ा खर्च पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है।

कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध होने पर पात्र महिलाओं को उपचार के लिए तत्काल बड़ी रकम की व्यवस्था करने की चिंता कम हो सकती है।

निर्देश मिलते ही आगे बढ़ेगी प्रक्रिया

अब सभी की नजर जिला स्तर पर आने वाले औपचारिक निर्देशों पर है। आदेश मिलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि योजना का लाभ किस प्रक्रिया से दिया जाएगा और किन स्वास्थ्य संस्थानों में कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी।

लखीमपुर खीरी की 844 बीसी सखियों के लिए प्रस्तावित पांच लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुरक्षा बड़ी राहत साबित हो सकती है। लखपति दीदियों को भी इसके दायरे में शामिल किए जाने से ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के साथ सामाजिक सुरक्षा का आधार और मजबूत होने की उम्मीद है।

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