उत्तर प्रदेश : मेरठ से गिरफ्तार किए गए जैश-ए-मुहम्मद के कथित आतंकी मोहम्मद जफर को लेकर आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। जांच में सामने आया है कि आरोपी पिछले करीब पांच सालों से कथित तौर पर चंदा जुटाने का काम कर रहा था। एटीएस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसने इस दौरान कितनी रकम एकत्र की और उसमें से कितनी राशि पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क तक पहुंचाई गई।

जांच एजेंसियों के अनुसार, मूलरूप से बिहार का रहने वाला मोहम्मद जफर वर्ष 2016-17 के दौरान मेरठ आया था। यहां उसने लगभग चार साल तक एक मदरसे में पढ़ाई की। इसी दौरान वह जैश-ए-मुहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर के भाषणों और विचारों से प्रभावित हुआ और कथित रूप से आतंकी संगठन की विचारधारा की ओर बढ़ने लगा।

एटीएस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जफर लंबे समय से संगठन के लिए फंड जुटाने का काम कर रहा था। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उसने कुल कितनी रकम एकत्र की और इस धन का इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जाना था। एटीएस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है।

सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी आरोपी के बैंक खातों की भी जांच कर रही है। खासतौर पर बिहार स्थित उसके एक बैंक खाते का ब्योरा खंगाला जा रहा है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि खाते में किन लोगों से पैसे आए, किन लोगों को पैसे भेजे गए और क्या किसी विदेशी संपर्क से भी लेन-देन हुआ था।

एटीएस ने आरोपी मोहम्मद जफर के पास से करीब 25 हजार रुपये बरामद किए थे। अब इस रकम के स्रोत और इसके इस्तेमाल को लेकर भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि बरामद धनराशि और बैंक लेन-देन की जांच से कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि जफर अकेले ही यह काम कर रहा था या उसके साथ अन्य लोग भी जुड़े हुए थे। इसके लिए उसके संपर्कों, मोबाइल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि उसने किन लोगों से संपर्क किया और उसे किस तरह की जिम्मेदारियां दी गई थीं।

एटीएस की कार्रवाई के बाद सुरक्षा एजेंसियां मेरठ और बिहार से जुड़े उसके नेटवर्क की जांच में जुट गई हैं। अधिकारियों का मानना है कि आतंकी संगठनों के लिए फंड जुटाने वाले लोगों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इसी माध्यम से संगठन अपनी गतिविधियों को संचालित करते हैं।

मोहम्मद जफर की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उससे पूछताछ की है। पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। हालांकि जांच पूरी होने से पहले एजेंसियां किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रही हैं।

जैश-ए-मुहम्मद भारत में पहले भी कई आतंकी घटनाओं और साजिशों से जुड़ा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से इस संगठन के नेटवर्क पर नजर बनाए हुए हैं। इसी क्रम में संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों की पहचान कर कार्रवाई की जाती रही है।

एटीएस अधिकारियों के मुताबिक, अभी जांच शुरुआती चरण में है। आरोपी के वित्तीय नेटवर्क, संपर्कों और संगठन से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर कुछ और खुलासे होने की संभावना है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि मोहम्मद जफर ने पिछले पांच वर्षों में कितना धन जुटाया और क्या वास्तव में यह पैसा किसी आतंकी गतिविधि के लिए इस्तेमाल किया गया। एटीएस की जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई से ही इस पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।

Tags: