Ghazipur गाजीपुर: जिले में 400 वर्षों से भी अधिक समय से रामलीला का मंचन होता आ रहा है और इस रामलीला को गाजीपुर में चालामन रामलीला के नाम से जाना जाता है, यानी यह रामलीला एक जगह पर नहीं बल्कि हर दिन अलग-अलग जगहों पर होती है और इस रामलीला में अलग-अलग पात्रों के पुतले भी अलग-अलग रामलीलाओं में जलाए जाते हैं और इस रामलीला का सबसे आकर्षण केंद्र विजयादशमी के अवसर पर रावण का पुतला होता है, जिसकी लंबाई लगभग 60 फीट बताई जाती है, इसके निर्माण में कारीगर पिछले दो महीने से लगे हुए हैं।
2 अक्टूबर विजयादशमी के दिन गाजीपुर के लंका मैदान में 60 फीट ऊंचे रावण का दहन किया जाएगा। इसके लिए मूर्तिकार छोटेलाल प्रजापति जुलाई से ही 60 फीट ऊंचे रावण के साथ-साथ अन्य पुतलों को बनाने में जुटे हुए हैं। रावण के पुतले की बात करें तो 60 फीट ऊंचा होने के कारण इसे 7 भागों में बनाया गया है, जिसमें रावण का जूता भी शामिल है जो लगभग 13 फीट लंबा बताया जा रहा है। इसके अलावा रावण की कमर, रावण की गर्दन, रावण का घाघरा और साथ ही रावण का सिर, सब मिलाकर लगभग 60 फीट लंबा होगा। विजयादशमी के दिन रामलीला समिति इसे क्रेन के माध्यम से लंका मैदान में खड़ा करेगी, जिसका दहन रात 8:00 बजे जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक द्वारा स्वचालित मशीनों के माध्यम से किया जाएगा।
पुतला कलाकार छोटेलाल प्रजापति की मानें तो उन्होंने यह कला अपने मुस्लिम गुरु सादिक मियां से सीखी थी और वह लगभग 35 वर्षों से लगातार इस मूर्ति का निर्माण कर रहे हैं, जिसके लिए इस मूर्ति को बनाने में लगभग सैकड़ों बांस, कागज, धागा और अन्य सामग्री का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा, अलग-अलग दिनों में अलग-अलग जगहों पर मंचन के दौरान खर-दूषण, कुंभकरण, जटायु, कौआ, दरभंगा मुनि के साथ-साथ सोने की लंका का भी दहन किया जाता है। रामलीला समिति द्वारा आने वाले दिनों में शेष पुतलों का दहन कर पूरी रामलीला को जीवंत बनाने का प्रयास किया जाएगा।