मिशन-2027 के लिए योगी सरकार का मेगा प्लान, रोजगार-मानदेय और कैशलेस इलाज पर फोकस
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार ने रोजगार, सामाजिक सुरक्षा, मानदेय बढ़ोतरी और स्वास्थ्य सुविधाओं पर अपना फोकस बढ़ा दिया है। सरकार ने अगले छह महीने में एक लाख से अधिक सरकारी नौकरियां देने का लक्ष्य सामने रखा है। इसके साथ पंचायत सहायकों, पीआरडी जवानों, रसोइयों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और अन्य समूहों के लिए मानदेय तथा स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े फैसले किए जा रहे हैं। इन कदमों को 2027 से पहले अलग-अलग सामाजिक और कर्मचारी समूहों तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल में घोषणा की है कि अगले छह महीने में एक लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियों के नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के माध्यम से चयनित 3,567 अभ्यर्थियों को 22 सितंबर को नियुक्ति पत्र दिए गए। इससे पहले पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड से चयनित 912 अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति पत्र वितरित किए गए थे। सरकार इसे ‘मिशन रोजगार’ के तहत आगे बढ़ा रही है।
रोजगार अभियान के जरिए सरकार विशेष रूप से युवाओं तक अपनी पहुंच मजबूत करने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि छह महीने में एक लाख से अधिक नौकरियां दी जाएंगी। सरकार का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है और नियुक्तियों में राजनीतिक हस्तक्षेप की गुंजाइश खत्म की गई है। विपक्ष हालांकि रोजगार और नियुक्तियों को लेकर सरकार पर सवाल उठाता रहा है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हाल में सरकारी नियुक्ति कार्यक्रमों को लेकर सरकार की आलोचना की और रोजगार के दावों पर सवाल उठाए हैं।
सरकार का दूसरा बड़ा फोकस ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों और मानदेय पर काम करने वाले समूहों पर है। प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों का मासिक मानदेय छह हजार रुपये से बढ़ाकर नौ हजार रुपये कर दिया गया है। इसके साथ उनके लिए समय पर भुगतान, मातृत्व अवकाश और स्वास्थ्य सुविधा जैसे प्रावधानों पर भी निर्णय हुआ है। पंचायत सहायकों ने अपनी मांगों को लेकर लखनऊ में प्रदर्शन किया था, जिसके बाद सरकार ने मानदेय में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी सहित कई मांगें स्वीकार कीं।
पीआरडी जवानों को लेकर भी सरकार ने कदम उठाए हैं। करीब 28 हजार पीआरडी जवानों का दैनिक ड्यूटी भत्ता 500 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये करने और पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा देने की मंजूरी की खबर है। सरकार के इन फैसलों का उद्देश्य मानदेय आधारित सेवा समूहों को आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराना बताया गया है।
मिड-डे मील योजना से जुड़े करीब साढ़े तीन लाख रसोइयों के मानदेय में भी बढ़ोतरी की गई है। उनका मानदेय दो हजार रुपये से बढ़ाकर तीन हजार रुपये करने के साथ कैशलेस इलाज की सुविधा देने का निर्णय किया गया है। वहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में बढ़ोतरी की घोषणाएं भी की गई हैं। इन समूहों की संख्या लाखों में है, इसलिए सरकार के फैसलों का सीधा असर बड़ी संख्या में परिवारों पर पड़ने वाला है।
योगी सरकार ने शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए भी कैशलेस इलाज की घोषणा की है। टीईटी की अनिवार्यता से प्रभावित शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी परीक्षा कराने की तैयारी की खबर है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कार्यरत डॉक्टरों और सेवा बांड के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात डॉक्टरों के मानदेय को लेकर भी सरकार स्तर पर तैयारी चल रही है।
सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के जरिए भी सरकार बड़े लाभार्थी वर्ग तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है। वृद्धावस्था, निराश्रित और दिव्यांगजन पेंशन से जुड़े लाभार्थियों के लिए सहायता राशि बढ़ाने की घोषणा की गई है। इस समूह में करीब सवा करोड़ लाभार्थी बताए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या के कारण पेंशन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े फैसले सरकार की कल्याणकारी नीति के साथ चुनावी राजनीति में भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
2027 के चुनाव से पहले सरकार का आउटरीच केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। हाल के फैसलों और घोषणाओं में पूर्व सैनिकों, पूर्व अग्निवीरों, किसानों, मछुआरों, राशन डीलरों और वकीलों जैसे समूह भी शामिल हैं। इनके लिए रोजगार से जुड़े लाभ, रियायती ऋण, आरक्षण, स्वास्थ्य सहायता और दूसरी कल्याणकारी सुविधाओं पर कदम उठाए गए हैं।
दूसरी ओर समाजवादी पार्टी 2027 के चुनाव से पहले PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को प्रमुखता दे रही है। ऐसे में भाजपा सरकार रोजगार, विकास, कानून-व्यवस्था और कल्याणकारी योजनाओं को अपनी राजनीतिक उपलब्धियों के रूप में जनता के सामने रख रही है। दोनों पक्षों के ये अपने-अपने राजनीतिक संदेश और दावे हैं, जिनकी परीक्षा अंततः विधानसभा चुनाव में मतदाताओं के फैसले से होगी।
प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने में अभी समय है, लेकिन सरकार और विपक्ष दोनों ने अपनी रणनीतियों पर काम तेज कर दिया है। योगी सरकार की मौजूदा कवायद में युवाओं को रोजगार, मानदेय पर काम करने वाले कर्मचारियों की आय में वृद्धि, कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार प्रमुख रूप से दिखाई दे रहा है। आने वाले महीनों में इन घोषणाओं का क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक इनका वास्तविक पहुंचना 2027 के चुनाव से पहले राजनीतिक बहस का महत्वपूर्ण मुद्दा बने रहने की संभावना है।