रायबरेली। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की चुनावी रणनीति के संकेत दिए हैं। गुरुवार को रायबरेली में PDA रथ यात्रा के दौरान उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथ समाजवादी पार्टी का गठबंधन जारी रहेगा, लेकिन सीटों का बंटवारा किसी पहले से तय संख्या के बजाय संबंधित सीट पर जीत की संभावना के आधार पर किया जाएगा। अखिलेश ने कहा कि जो दल जिस सीट को जीतने की स्थिति में होगा, उसे वह सीट मिलनी चाहिए।

रायबरेली से PDA रथ यात्रा की शुरुआत को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के चुनावी अभियान की अहम शुरुआत माना जा रहा है। रायबरेली कांग्रेस नेता राहुल गांधी का लोकसभा क्षेत्र है। ऐसे में यहां से यात्रा शुरू करने और इसी मंच से कांग्रेस के साथ गठबंधन पर स्थिति स्पष्ट करने को दोनों दलों के बीच आगामी सीट-बंटवारे की बातचीत के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अखिलेश यादव ने बाद में मीडिया से बातचीत में भी कहा कि कांग्रेस के साथ गठबंधन मजबूत है और दोनों दल गठबंधन के लिए काम करेंगे।

अखिलेश यादव ने कहा कि गठबंधन होगा, लेकिन गठबंधन के साथ चुनौतियां भी रहेंगी। उन्होंने सीटों की संख्या से ज्यादा चुनाव जीतने की क्षमता को महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि उनके लिए सवाल केवल सीट हासिल करने का नहीं, बल्कि जीतने वाली सीट का है। यानी सपा और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे में स्थानीय राजनीतिक स्थिति, मौजूदा संगठन और जीत की संभावना जैसे पहलुओं को महत्व दिया जा सकता है।

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने 2024 का लोकसभा चुनाव उत्तर प्रदेश में गठबंधन के तहत लड़ा था। उस चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 37 और कांग्रेस ने छह सीटें जीती थीं। दोनों दलों ने मिलकर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में 43 पर जीत हासिल की थी, जबकि भाजपा ने 33 सीटें जीती थीं। अब 2027 के विधानसभा चुनाव में भी दोनों दल साथ चुनाव लड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

रायबरेली में विधानसभा सीटों की मौजूदा स्थिति भी सीट-बंटवारे की चर्चा में महत्वपूर्ण हो सकती है। रायबरेली लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली पांच विधानसभा सीटों में बछरावां, हरचंदपुर और सरेनी पर समाजवादी पार्टी के विधायक हैं, जबकि रायबरेली और ऊंचाहार सीट भाजपा के पास हैं। इससे पहले सपा नेताओं ने संकेत दिए थे कि पार्टी सीट-बंटवारे की बातचीत में अपने मौजूदा विधायकों और स्थानीय स्थिति को आधार बना सकती है।

PDA रथ यात्रा के जरिए अखिलेश यादव ने पार्टी के सामाजिक समीकरण को भी प्रमुखता से सामने रखा। समाजवादी पार्टी PDA को पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक के सामाजिक गठजोड़ के रूप में पेश करती रही है। अखिलेश ने रायबरेली के कार्यक्रम में इस सामाजिक आधार को मजबूत करने पर जोर दिया और महिलाओं को भी व्यापक PDA समीकरण से जोड़ने की बात कही। पार्टी की कोशिश विधानसभा चुनाव से पहले अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच अपना जनाधार बढ़ाने की है।

अखिलेश यादव ने 2024 के लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए भाजपा के खिलाफ 2027 में भी गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने की बात कही। उन्होंने दावा किया कि 2024 में विपक्षी गठबंधन ने भाजपा को चुनौती दी थी और अब विधानसभा चुनाव में भी पार्टी इसी रणनीति को आगे बढ़ाएगी। यह सपा प्रमुख का राजनीतिक दावा है और चुनाव से पहले भाजपा तथा अन्य दल भी अपनी-अपनी रणनीति और दावे सामने रख रहे हैं।

रथ यात्रा के दौरान अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर भी कई राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने भाजपा पर नकारात्मक राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि समाजवादी पार्टी सामाजिक न्याय और PDA के मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी। उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग पर भी आरोप लगाए। निर्वाचन आयोग को लेकर किए गए ये दावे अखिलेश यादव के आरोप हैं।

2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए समाजवादी पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने पर भी काम कर रही है। हाल के दिनों में अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं के साथ बैठकों में संगठन को मजबूत करने और उन विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की रणनीति सामने रखी है, जहां पिछले चुनावों में जीत-हार का अंतर अपेक्षाकृत कम रहा था।

रायबरेली से शुरू हुई PDA रथ यात्रा ने सपा के चुनावी अभियान के साथ कांग्रेस के साथ उसके गठबंधन की दिशा भी स्पष्ट की है। अखिलेश यादव के बयान से संकेत मिलता है कि 2027 में सपा-कांग्रेस गठबंधन में सीटों की संख्या से अधिक हर विधानसभा क्षेत्र में संबंधित दल की चुनावी स्थिति और जीत की क्षमता को सीट-बंटवारे का आधार बनाने पर जोर रहेगा। हालांकि अंतिम सीट-बंटवारा दोनों दलों के बीच होने वाली औपचारिक बातचीत के बाद ही तय होगा।

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