मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में किशोरी के अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म के करीब 19 साल पुराने मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कटघर थाना क्षेत्र में नाबालिग लड़की को अगवा कर कई दिनों तक बंधक बनाने और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने के मामले में अदालत ने शमशीर उर्फ जफर और अतीकुर्रहमान को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों दोषियों पर 67-67 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वहीं, मामले में नामजद तीन अन्य आरोपियों को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण बरी कर दिया गया।
शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को यह फैसला एससी-एसटी अधिनियम की विशेष न्यायाधीश अंजना की अदालत ने सुनाया। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक आनंदपाल सिंह ने पैरवी की। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध साक्ष्य देखने के बाद यह निर्णय दिया।
13 नवंबर 2007 को लापता हुई थी किशोरी
मामले की शुरुआत 13 नवंबर 2007 को हुई थी। कटघर थाना क्षेत्र के एक गांव में रहने वाले व्यक्ति की नाबालिग बेटी अचानक लापता हो गई थी।बेटी के घर नहीं लौटने पर परिवार के लोगों ने उसकी तलाश शुरू की। आसपास के क्षेत्रों और परिचितों से पूछताछ करने के बावजूद किशोरी का कोई सुराग नहीं मिला।इसके बाद पिता ने पुलिस से संपर्क किया और बेटी के लापता होने की जानकारी दी।परिवार को आशंका थी कि गांव के कुछ लोगों ने उनकी बेटी का अपहरण किया है।लगातार तलाश के बावजूद किशोरी का पता नहीं चलने पर पिता ने तीन दिन बाद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।
पिता ने पांच लोगों के खिलाफ दर्ज कराई थी FIR
16 नवंबर 2007 को पीड़िता के पिता ने कटघर थाने में पांच लोगों के खिलाफ अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कराई थी।इसमें शमशीर उर्फ जफर, अतीकुर्रहमान, उस्मान, कश्मीर और अब्दुल सलाम को नामजद किया गया था।पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करके किशोरी की तलाश और आरोपियों की भूमिका की जांच शुरू की।जांच के दौरान सामने आया कि किशोरी को सुनियोजित तरीके से बुलाकर अगवा किया गया था।इसके बाद पुलिस ने संबंधित लोगों से पूछताछ की और किशोरी की तलाश जारी रखी।
सहेली के घर बुलाकर किया गया था अपहरण
पुलिस जांच के अनुसार, किशोरी को पहले उसकी एक सहेली ने फोन करके अपने घर बुलाया था।जब किशोरी वहां पहुंची, तो शमशीर अपने साथियों के साथ मौके पर आया और उसे अगवा करके ले गया।अभियोजन पक्ष ने अदालत में बताया कि किशोरी को इसके बाद कई दिनों तक एक स्थान पर बंधक बनाकर रखा गया।इस दौरान उसके साथ तमंचे के बल पर सामूहिक दुष्कर्म किया गया।जांच में सामने आए इन तथ्यों को अभियोजन पक्ष ने मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया।किशोरी के अपहरण से लेकर उसे बंधक बनाए जाने और उसके साथ हुए अपराध से संबंधित परिस्थितियां मामले की सुनवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा रहीं।
पुलिस ने किशोरी को बरामद किया
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने किशोरी की तलाश तेज की थी।जांच के दौरान मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने उसे बरामद कर लिया।इसके बाद पुलिस ने मामले में नामजद पांचों आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेजा।जांच के दौरान एक आरोपी की निशानदेही पर घर में छिपाकर रखा गया 12 बोर का तमंचा भी बरामद किया गया था।इस बरामदगी के आधार पर पुलिस ने आयुध अधिनियम के तहत अलग मुकदमा दर्ज किया।चूंकि दोनों मामले एक ही घटनाक्रम से संबंधित थे, इसलिए अदालत में इनका विचारण साथ किया गया।
करीब 19 साल तक चली कानूनी प्रक्रिया
वर्ष 2007 में दर्ज इस मुकदमे में वर्ष 2026 में फैसला आया है।इस तरह घटना से अंतिम निर्णय तक लगभग 19 वर्षों का समय बीत गया।लंबे समय तक चले इस मुकदमे के दौरान अदालत में अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनी गईं।अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों को प्रस्तुत किया, जबकि बचाव पक्ष को भी अपनी दलीलें रखने का अवसर मिला।अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और कानूनी प्रावधानों के आधार पर पांचों आरोपियों की भूमिका का अलग-अलग मूल्यांकन किया।इसके बाद दो व्यक्तियों को दोषी ठहराया गया और तीन को आरोपों से बरी कर दिया गया।
दोनों दोषियों को सुनाई गई उम्रकैद
विशेष लोक अभियोजक आनंदपाल सिंह के अनुसार, अदालत ने शमशीर उर्फ जफर और अतीकुर्रहमान को विभिन्न अपराधों में दोषी पाया।इनमें किशोरी का अपहरण, उसे विवाह के लिए विवश करने के उद्देश्य से ले जाना, छिपाकर रखना और सामूहिक दुष्कर्म जैसे अपराध शामिल हैं।अदालत ने दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।इसके अलावा शमशीर और अतीकुर्रहमान पर 67-67 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया।इस प्रकार दोनों दोषियों पर कुल 1 लाख 34 हजार रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया है।फैसले में दोषियों को सुनाई गई विभिन्न सजाओं के विस्तृत क्रियान्वयन की स्थिति अदालत के लिखित आदेश से स्पष्ट होगी।
तीन आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी किया
अदालत ने इस मामले में नामजद तीन अन्य आरोपियों को बरी कर दिया।बरी किए गए व्यक्तियों में उस्मान, कश्मीर और अब्दुल सलाम शामिल हैं।अदालत के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्य इन तीनों के खिलाफ आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं पाए गए।इसलिए न्यायालय ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया।आपराधिक न्याय व्यवस्था में किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए अभियोजन पक्ष को उसके खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित करने होते हैं।केवल प्राथमिकी में नाम दर्ज होने या गिरफ्तारी के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता।अदालत का यह निर्णय इसी कानूनी सिद्धांत के महत्व को भी दर्शाता है।
पीड़िता की पहचान गोपनीय रखना जरूरी
यौन अपराधों से संबंधित मामलों में पीड़ित व्यक्ति की पहचान सुरक्षित रखना बेहद महत्वपूर्ण होता है।विशेष रूप से नाबालिग पीड़िताओं के मामलों में उनकी निजता और गरिमा की रक्षा के लिए कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।इसी कारण पीड़िता का नाम, पता और अन्य ऐसी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए, जिससे उसकी पहचान उजागर हो सके।ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग करते समय घटना और अदालत के फैसले की जानकारी देने के साथ पीड़िता की निजता का ध्यान रखना आवश्यक है।
फैसले के बाद आगे क्या होगा?
विशेष अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद दोषियों के पास निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत उच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार है।यदि अपील दाखिल की जाती है, तो संबंधित अदालत उपलब्ध रिकॉर्ड और कानूनी आधारों की समीक्षा कर सकती है।वहीं, बरी किए गए आरोपियों के संबंध में भी कानून के अनुसार उपलब्ध अपीलीय विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है।फिलहाल विशेष अदालत ने दो व्यक्तियों को दोषी ठहराकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
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