गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 20 सेंटीमीटर नीचे, 62 गांवों में फिर पहुंचा पानी
फर्रुखाबाद। गंगा और रामगंगा नदियों के जलस्तर में एक बार फिर बढ़ोतरी होने से नदी किनारे बसे गांवों में चिंता बढ़ गई है। शुक्रवार को गंगा का जलस्तर 10 सेंटीमीटर बढ़कर समुद्र तल से 136.90 मीटर की ऊंचाई पर पहुंच गया। गंगा का खतरे का निशान 137.10 मीटर पर दर्ज है। इस तरह नदी का जलस्तर खतरे के निशान से महज 20 सेंटीमीटर नीचे रह गया है।
गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार नरौरा बांध से नदी में 83,835 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे आने वाले समय में गंगा के जलस्तर में और वृद्धि होने की आशंका जताई जा रही है। नदी का पानी बढ़ने का असर आसपास के निचले इलाकों में दिखाई देने लगा है। जिन गांवों में कुछ दिन पहले पानी निकल गया था, वहां दोबारा पानी भरना शुरू हो गया है।
62 गांवों में फिर पहुंचा पानी
गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर नदी किनारे और निचले इलाकों में दिखाई दे रहा है। पहले बाढ़ का पानी कम होने के बाद जिन गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली थी, वहां अब एक बार फिर पानी पहुंचने लगा है। फिलहाल 62 गांवों में दोबारा पानी पहुंच गया है।
ग्रामीणों के मुताबिक, पानी बढ़ने के साथ खेतों और गांवों के आसपास जलभराव की स्थिति बनने लगी है। कई स्थानों पर ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिन रास्तों से पानी निकल गया था, वहां फिर से पानी आने के कारण लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले ग्रामीण नदी के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। उन्हें आशंका है कि यदि जलस्तर में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो पानी और अधिक गांवों तक पहुंच सकता है।
नरौरा बांध से छोड़ा गया 83,835 क्यूसेक पानी
केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक नरौरा बांध से गंगा में 83,835 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। नदी में छोड़े गए पानी का असर आगे के इलाकों में जलस्तर पर पड़ सकता है। पहले से बढ़े हुए जलस्तर के बीच अतिरिक्त पानी आने से नदी के किनारे बसे गांवों में खतरा बढ़ गया है।
गंगा का जलस्तर शुक्रवार को 136.90 मीटर दर्ज किया गया। खतरे का निशान 137.10 मीटर है। दोनों के बीच केवल 20 सेंटीमीटर का अंतर रह गया है। ऐसे में प्रशासन और ग्रामीणों के लिए अगले कुछ घंटे महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
रामगंगा का जलस्तर भी बढ़ा
गंगा के साथ-साथ रामगंगा नदी के जलस्तर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। शुक्रवार को रामगंगा का जलस्तर 5 सेंटीमीटर बढ़कर 136.15 मीटर हो गया। नदी में अलग-अलग स्थानों से पानी छोड़े जाने के कारण इसका जलस्तर और बढ़ने की संभावना है।
जानकारी के अनुसार खोह, हरेली और रामनगर से रामगंगा में कुल 13,645 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे नदी में पानी की मात्रा बढ़ेगी और आने वाले समय में जलस्तर पर इसका असर दिखाई दे सकता है।
रामगंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण नदी किनारे के क्षेत्रों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। ग्रामीणों को नदी के आसपास जाने से बचने और पानी के बहाव वाले रास्तों पर सावधानी बरतने की जरूरत है।
खेतों में भी बढ़ रहा पानी
नदियों के जलस्तर में वृद्धि का असर केवल आबादी वाले इलाकों तक सीमित नहीं है। निचले क्षेत्रों में स्थित खेतों में भी पानी भरने लगा है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। पहले पानी कम होने के बाद जिन खेतों में किसान कृषि गतिविधियां शुरू करने की तैयारी कर रहे थे, वहां फिर से जलभराव की स्थिति बन रही है।
लगातार पानी आने से फसलों को नुकसान का खतरा भी बढ़ गया है। यदि जलस्तर लंबे समय तक ऊंचा बना रहता है तो खेतों में खड़ी फसलों पर इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
पानी कम होने के बाद फिर बढ़ी चिंता
पिछले दिनों गंगा का पानी कम होने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को कुछ राहत मिली थी। कई स्थानों पर जलभराव कम होने लगा था और ग्रामीण सामान्य गतिविधियों की ओर लौटने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन शुक्रवार को जलस्तर में फिर बढ़ोतरी होने से उनकी चिंता दोबारा बढ़ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि पानी एक बार निकलने के बाद दोबारा लौटने से परेशानी और बढ़ जाती है। घरों और रास्तों के आसपास जमा पानी कम होने के बाद फिर से जलभराव होने पर लोगों को दैनिक जरूरतों के लिए भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
प्रशासन और ग्रामीणों की निगाह जलस्तर पर
गंगा के खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंचने और रामगंगा में भी पानी बढ़ने के कारण आने वाले समय में स्थिति पर नजर रखना जरूरी हो गया है। खासकर नरौरा बांध और रामगंगा के विभिन्न स्थानों से छोड़े गए पानी का असर नदी के जलस्तर पर पड़ सकता है।
फिलहाल गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 20 सेंटीमीटर नीचे है, लेकिन लगातार बढ़ोतरी होने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। वहीं 62 गांवों में पानी की दोबारा दस्तक ने बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ प्रशासन के सामने प्रभावित गांवों में निगरानी, आवागमन और राहत व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती भी बढ़ गई है। ग्रामीणों की नजर अब इस बात पर है कि अगले कुछ घंटों में गंगा और रामगंगा के जलस्तर का रुख क्या रहता है। फिलहाल बढ़ते जलस्तर ने नदी किनारे बसे गांवों में एक बार फिर बाढ़ की चिंता पैदा कर दी है।