वाराणसी : हीमोफीलिया जैसी गंभीर बीमारी को लेकर जागरूकता बढ़ाने और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चिकित्सकों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। हीमोफीलिया सोसाइटी वाराणसी की ओर से होटल हिंदुस्तान में आयोजित कार्यक्रम का विषय ‘कंप्रिहेंसिव हीमोफीलिया अवेयरनेस एवं एडवांस ट्रीटमेंट’ रखा गया।

कार्यक्रम में चिकित्सा विशेषज्ञों ने हीमोफीलिया के लक्षण, पहचान, इलाज और मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने की जरूरत पर विस्तार से चर्चा की।

जागरूकता की कमी से बढ़ रही परेशानी

बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. एनपी सिंह ने कहा कि हीमोफीलिया एक गंभीर बीमारी है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण कई मरीज समय पर इलाज नहीं करा पाते।

उन्होंने कहा कि समय पर उपचार नहीं मिलने से मरीजों की स्थिति गंभीर हो सकती है। कई मामलों में मरीज दिव्यांगता का शिकार हो जाते हैं या फिर बीमारी को लेकर फैली गलत धारणाओं और अंधविश्वास के कारण उचित इलाज से दूर हो जाते हैं।

सीएमओ ने कहा कि लोगों में इस बीमारी को लेकर सही जानकारी पहुंचाना बेहद जरूरी है, ताकि मरीजों को समय पर पहचान और उपचार मिल सके।

ग्रामीण क्षेत्रों में चलेगा पहचान अभियान

डॉ. एनपी सिंह ने बताया कि वाराणसी जिले में ग्रामीण स्तर पर हीमोफीलिया मरीजों की खोज और पहचान के लिए अभियान चलाया जाएगा।

इस अभियान में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और चिकित्सकों की मदद ली जाएगी। इसका उद्देश्य ऐसे मरीजों तक पहुंचना है, जो जानकारी के अभाव में इलाज से वंचित रह जाते हैं।

उन्होंने कहा कि मरीजों की समय पर पहचान होने से उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है और गंभीर जटिलताओं से बचाया जा सकता है।

आनुवंशिक बीमारी है हीमोफीलिया

कार्यक्रम में प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि हीमोफीलिया एक आनुवंशिक बीमारी है। इसमें शरीर में खून का थक्का जमाने की क्षमता प्रभावित होती है।

उन्होंने कहा कि पहले इस बीमारी को लेकर लोगों में कई तरह की भ्रांतियां थीं, लेकिन अब चिकित्सा विज्ञान में काफी प्रगति हुई है। आधुनिक जांच और उपचार के माध्यम से मरीजों को बेहतर जीवन दिया जा सकता है।

उन्होंने चिकित्सकों को बीमारी के लक्षण, पहचान और उपचार की नई तकनीकों के बारे में जानकारी दी।

महंगे इंजेक्शन पर आधारित है इलाज

प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि हीमोफीलिया के इलाज में विशेष प्रकार के इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जाता है, जो शरीर में रक्तस्राव को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

उन्होंने बताया कि इन इंजेक्शनों की कीमत अधिक होती है और कई बार मरीजों के लिए इसे उपलब्ध कराना चुनौती बन जाता है।

उन्होंने कहा कि समय पर उपचार और नियमित देखभाल से हीमोफीलिया मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।

चिकित्सकों को दी गई उपचार संबंधी जानकारी

बैठक में मौजूद चिकित्सकों को हीमोफीलिया मरीजों की पहचान, इलाज की प्रक्रिया और सावधानियों के बारे में जानकारी दी गई।

विशेषज्ञों ने कहा कि प्राथमिक स्तर पर बीमारी की पहचान होने से मरीजों को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।

उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों से अपील की कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे मरीजों की पहचान के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं।

मरीजों और परिवारों में जागरूकता जरूरी

चिकित्सकों ने कहा कि हीमोफीलिया से पीड़ित मरीजों के साथ परिवार और समाज का सहयोग भी महत्वपूर्ण होता है।

बीमारी को लेकर डर और गलत जानकारी को दूर करने के लिए जागरूकता अभियान चलाना जरूरी है। इससे मरीज समय पर इलाज ले सकेंगे और उनके जीवन की गुणवत्ता बेहतर होगी।

बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में कदम

बैठक में विशेषज्ञों ने कहा कि हीमोफीलिया मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों के बीच समन्वय जरूरी है।

वाराणसी में शुरू होने वाला मरीज खोज अभियान इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कार्यक्रम के माध्यम से चिकित्सकों ने यह संदेश दिया कि जागरूकता, समय पर जांच और आधुनिक उपचार से हीमोफीलिया जैसी बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।

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