उत्तर प्रदेश

सूचना के अधिकार में CCTV फुटेज क्यों नहीं मिलेगी कोर्ट ने बताई वजह

Ratna Netam
4 Sept 2026 5:38 PM IST
सूचना के अधिकार में CCTV फुटेज क्यों नहीं मिलेगी कोर्ट ने बताई वजह
x
लखनऊ : सूचना के अधिकार (RTI) कानून के तहत अब कोई भी व्यक्ति सीधे तौर पर किसी सरकारी संस्था से CCTV फुटेज मांगकर हासिल नहीं कर सकेगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ किया है कि CCTV फुटेज को हर स्थिति में RTI के जरिए आवेदक को उपलब्ध नहीं कराया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसी फुटेज में कई बार निजी जानकारी, सुरक्षा से जुड़े पहलू और अन्य संवेदनशील सामग्री शामिल हो सकती है।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद RTI के जरिए CCTV रिकॉर्डिंग मांगने वालों के लिए नियम और स्पष्ट हो गए हैं। अदालत ने सूचना के अधिकार और लोगों की निजता के अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया है।
CCTV फुटेज को क्यों माना गया संवेदनशील?
CCTV कैमरे सार्वजनिक स्थानों, सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों, संस्थानों और अन्य जगहों पर सुरक्षा के लिए लगाए जाते हैं। इन रिकॉर्डिंग में कई बार ऐसे लोग दिखाई देते हैं, जिनकी निजी जानकारी सार्वजनिक हो सकती है।
कोर्ट ने माना कि CCTV फुटेज केवल एक सामान्य दस्तावेज नहीं है, बल्कि इसमें लोगों की गतिविधियां, पहचान और सुरक्षा से जुड़ी जानकारियां शामिल हो सकती हैं। इसलिए इसे बिना जांच के किसी भी व्यक्ति को देना उचित नहीं होगा।
RTI में मांगी गई थी CCTV रिकॉर्डिंग
मामला एक ऐसे आवेदन से जुड़ा था, जिसमें याचिकाकर्ता ने RTI के तहत CCTV फुटेज उपलब्ध कराने की मांग की थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि उसे मामले से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए रिकॉर्डिंग की जरूरत है।
लेकिन अदालत ने कहा कि केवल RTI आवेदन करने से किसी व्यक्ति को CCTV फुटेज पाने का स्वतः अधिकार नहीं मिल जाता। संबंधित प्राधिकरण को यह देखना होगा कि फुटेज देने से किसी व्यक्ति की निजता, सुरक्षा या अन्य हित प्रभावित तो नहीं होंगे।
कोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने कहा कि RTI कानून का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना है, लेकिन इसका इस्तेमाल किसी की निजी जानकारी हासिल करने के लिए नहीं किया जा सकता।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर किसी मामले में CCTV फुटेज जांच का हिस्सा है या अदालत के आदेश से इसकी जरूरत है तो उसे उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत उपलब्ध कराया जा सकता है।
क्या हर CCTV फुटेज देने से इनकार किया जा सकता है?
ऐसा नहीं है कि हर मामले में CCTV फुटेज देने से पूरी तरह मना किया जाएगा। यदि किसी मामले में बड़ा सार्वजनिक हित जुड़ा है और कानून इसकी अनुमति देता है, तो संबंधित अधिकारी परिस्थितियों के आधार पर निर्णय ले सकते हैं।
लेकिन सामान्य तौर पर केवल निजी कारणों या व्यक्तिगत विवाद के आधार पर CCTV फुटेज मांगना पर्याप्त नहीं माना जाएगा।
निजता के अधिकार पर जोर
हाईकोर्ट के फैसले में निजता के अधिकार को भी महत्व दिया गया है। अदालत ने माना कि आज के डिजिटल दौर में किसी व्यक्ति की तस्वीर, गतिविधि और निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल हो सकता है।
इसलिए CCTV रिकॉर्डिंग साझा करने से पहले यह देखना जरूरी है कि इससे किसी व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा।
RTI कानून का उद्देश्य क्या है?
सूचना का अधिकार कानून नागरिकों को सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए बनाया गया है। इसके जरिए लोग सरकारी विभागों से कई तरह की सूचनाएं प्राप्त कर सकते हैं।
लेकिन RTI कानून में कुछ जानकारियों को अपवाद के रूप में रखा गया है। इनमें सुरक्षा, गोपनीयता और व्यक्तिगत जानकारी से जुड़ी सूचनाएं शामिल हैं।
जांच और अदालत में कैसे मिल सकती है फुटेज?
अगर CCTV फुटेज किसी अपराध, जांच या न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ी है तो इसे पुलिस जांच, अदालत के आदेश या संबंधित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से हासिल किया जा सकता है।
ऐसे मामलों में फुटेज को सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसे सामान्य RTI आवेदन के जरिए सीधे हासिल करना आसान नहीं होगा।
सरकारी संस्थानों के लिए भी संदेश
हाईकोर्ट के फैसले से सरकारी संस्थानों को भी यह संदेश मिला है कि CCTV रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखना और उसके इस्तेमाल में सावधानी बरतना जरूरी है।
संस्थानों को यह तय करना होगा कि कौन सी जानकारी साझा की जा सकती है और कौन सी जानकारी सुरक्षा या निजता के कारण रोकी जा सकती है।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
अब अगर कोई व्यक्ति RTI के जरिए CCTV फुटेज मांगता है तो उसे यह समझना होगा कि केवल आवेदन करने से फुटेज मिलना तय नहीं है।
आवेदन में सार्वजनिक हित, कानूनी जरूरत या अन्य उचित कारणों को ध्यान में रखा जाएगा। संबंधित विभाग और अधिकारी नियमों के अनुसार फैसला करेंगे।
Next Story