कासगंज। पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश और बैराजों से गंगा नदी में छोड़े जा रहे पानी के कारण कासगंज जिले में बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। गंगा के जलस्तर में हो रही निरंतर वृद्धि का असर अब तटवर्ती आबादी पर साफ दिखाई देने लगा है। पटियाली क्षेत्र के कई आबादी वाले इलाकों में नदी का पानी पहुंच गया है, जिससे ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्थिति को देखते हुए प्रशासन और सिंचाई विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है।

शनिवार को गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 14 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया। लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण कासगंज और पटियाली तहसील क्षेत्र के कई तटवर्ती गांव प्रभावित हुए हैं। बघेला और लहरा क्षेत्र में सैकड़ों बीघा कृषि भूमि पानी में डूब गई है। खेतों में पानी भरने से धान सहित अन्य फसलों के बर्बाद होने की आशंका बढ़ गई है। ग्रामीणों के बीच बाढ़ को लेकर दहशत का माहौल है।

लगातार बढ़ रहा जलस्तर

पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश का सीधा असर गंगा के जलस्तर पर पड़ रहा है। इसके साथ ही विभिन्न बैराजों से नदी में पानी छोड़े जाने के कारण नदी का प्रवाह बढ़ गया है। पानी की लगातार बढ़ती मात्रा से गंगा किनारे बसे गांवों में चिंता बढ़ती जा रही है।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। तटवर्ती क्षेत्रों में ग्रामीणों को सावधानी बरतने और नदी के आसपास अनावश्यक रूप से नहीं जाने की सलाह दी गई है।

जिलाधिकारी स्वयं गंगा के जलस्तर और प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन की ओर से जलस्तर में होने वाले प्रत्येक बदलाव की निगरानी की जा रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते राहत और बचाव की कार्रवाई शुरू की जा सके।

आबादी तक पहुंचा गंगा का पानी

गंगा के बढ़ते जलस्तर का सबसे ज्यादा असर पटियाली क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। नदी का पानी अब आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ने लगा है। कई स्थानों पर ग्रामीणों को अपने घरों और आसपास पानी पहुंचने की चिंता सताने लगी है।

तटवर्ती गांवों में रहने वाले लोग लगातार नदी के जलस्तर पर नजर रख रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। प्रशासन की ओर से उन्हें सतर्क रहने के लिए कहा गया है।

कुछ इलाकों में ग्रामीणों के लिए आने-जाने की समस्या भी बढ़ने लगी है। पानी के फैलाव के कारण खेतों और निचले इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। ग्रामीण प्रशासन से लगातार स्थिति पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तत्काल मदद उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।

सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न

बघेला और लहरा क्षेत्र में गंगा का पानी खेतों तक पहुंच गया है। इन इलाकों में सैकड़ों बीघा कृषि भूमि जलमग्न हो चुकी है। खेतों में पानी भरने से किसानों को भारी नुकसान की आशंका है।

धान की फसल इस समय कई क्षेत्रों में खेतों में खड़ी है। लंबे समय तक पानी में डूबे रहने से धान और अन्य फसलों को नुकसान हो सकता है। किसानों को अब चिंता है कि यदि पानी जल्द नहीं उतरा तो उनकी मेहनत और पूरी फसल बर्बाद हो सकती है।

कृषि भूमि के जलमग्न होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका है। तटवर्ती गांवों के कई परिवार खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में फसलों को नुकसान होने पर उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।

प्रशासन और सिंचाई विभाग अलर्ट

बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई है। अधिकारियों की टीमें नदी के जलस्तर और तटवर्ती क्षेत्रों की स्थिति पर नजर रख रही हैं। संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाने के साथ ग्रामीणों को संभावित खतरे के प्रति सचेत किया गया है।

प्रशासन का प्रयास है कि जलस्तर में अचानक वृद्धि होने की स्थिति में प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके। इसके लिए स्थानीय स्तर पर तैयारियों की समीक्षा की जा रही है।

अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को नदी तथा जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रखने की सलाह दी गई है।

खतरे के निशान से ऊपर बह रही गंगा

शनिवार को गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 14 सेंटीमीटर ऊपर रहा। खतरे के निशान से ऊपर नदी के बहने के कारण प्रशासन ने निगरानी और तेज कर दी है। यदि आने वाले दिनों में पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश जारी रहती है या बैराजों से पानी छोड़े जाने की मात्रा बढ़ती है, तो जलस्तर में और वृद्धि की आशंका बनी हुई है।

इसके विपरीत यदि बारिश में कमी आती है और नदी में पानी का प्रवाह घटता है तो स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो सकता है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता जलस्तर पर लगातार नजर रखने और तटवर्ती आबादी को सुरक्षित रखने की है।

ग्रामीणों में बढ़ी चिंता

गंगा के बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पानी भरने के बाद अब लोगों को आबादी वाले इलाकों में भी पानी पहुंचने का डर सता रहा है। ग्रामीणों की नजर लगातार नदी के जलस्तर पर बनी हुई है।

प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को सचेत किया गया है और किसी भी आपात स्थिति में अधिकारियों से संपर्क करने की सलाह दी गई है। जिलाधिकारी की निगरानी में संबंधित विभाग स्थिति का आकलन कर रहे हैं।

फिलहाल कासगंज और पटियाली तहसील के तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। गंगा के जलस्तर में वृद्धि, पहाड़ों पर जारी बारिश और बैराजों से छोड़े जा रहे पानी के बीच आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाती है, यह महत्वपूर्ण होगा। ग्रामीणों के साथ-साथ प्रशासन की निगाहें भी अब गंगा के जलस्तर और मौसम की स्थिति पर टिकी हैं।

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