लखनऊ। दवा कारोबार में मुनाफे का लालच अब मरीजों की जिंदगी पर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नकली और संदिग्ध दवाओं के नेटवर्क को लेकर बड़ी चिंता सामने आई है। आरोप है कि कुछ मेडिकल स्टोर संचालक मोटे कमीशन के लालच में ऐसी दवाएं बेच रहे हैं, जिनकी गुणवत्ता और असलियत पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जांच एजेंसियों की कार्रवाई में सामने आया है कि नकली दवाओं के कारोबार को बढ़ाने में कमीशन का बड़ा खेल चल रहा था। जांच में यह बात सामने आई है कि नकली दवाओं के नेटवर्क से मेडिकल दुकानों को जोड़ने के लिए कर्मचारियों और सप्लाई करने वालों को भारी कमीशन दिया जाता था। आरोप है कि इसी लालच में कुछ लोग बिना सही जांच-पड़ताल के संदिग्ध दवाओं को बाजार तक पहुंचाने का काम कर रहे थे। इससे सीधे तौर पर मरीजों की सेहत खतरे में पड़ रही है।
कमीशन के लालच में बढ़ा नकली दवाओं का नेटवर्क
दवा कारोबार में कमीशन कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब यही लालच नकली दवाओं की बिक्री का कारण बनने लगे तो स्थिति गंभीर हो जाती है। जांच एजेंसियों के अनुसार, कुछ लोगों को नई मेडिकल दुकानों तक नकली दवाओं की सप्लाई पहुंचाने के लिए 30 से 40 फीसदी तक कमीशन देने की बात सामने आई है।माना जा रहा है कि नकली दवा कारोबारी ऐसे मेडिकल स्टोर संचालकों को निशाना बनाते हैं, जो कम कीमत में ज्यादा मुनाफा कमाने के लालच में रहते हैं। कई बार सस्ती दरों पर मिलने वाली दवाओं को ज्यादा मार्जिन के नाम पर बाजार में खपाने की कोशिश की जाती है।
मरीजों की सेहत पर पड़ सकता है गंभीर असर
नकली दवाएं केवल आर्थिक नुकसान नहीं पहुंचातीं, बल्कि मरीजों की जान के लिए भी खतरा बन सकती हैं। किसी बीमारी के इलाज के दौरान अगर मरीज को असली दवा की जगह नकली या घटिया दवा मिल जाए तो उसका इलाज प्रभावित हो सकता है।विशेषज्ञों के अनुसार, गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए नकली दवाएं बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं। इससे बीमारी बढ़ सकती है और कई मामलों में मरीज की स्थिति और खराब हो सकती है।
फर्जी बिलिंग से चल रहा था खेल
जांच में नकली दवा नेटवर्क से जुड़े कई चौंकाने वाले तरीके सामने आए हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में बिना वास्तविक दवा की सप्लाई के फर्जी बिल बनाए गए और कागजों पर लेनदेन दिखाकर नकली दवाओं को वैध सप्लाई चेन में शामिल करने की कोशिश की गई। फर्जी बिलिंग और गलत रिकॉर्ड के जरिए यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि दवा कहां से आई और किस मेडिकल स्टोर तक पहुंची। यही कारण है कि ऐसे मामलों की जांच में काफी समय लगता है।
करोड़ों की फर्जी बिलिंग और बड़ी कार्रवाई
नकली दवाओं के मामले में जांच एजेंसियों ने कई जगह कार्रवाई की है। रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ में करोड़ों रुपये की फर्जी बिलिंग और बड़ी मात्रा में संदिग्ध दवाओं से जुड़े मामले सामने आए हैं। कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।इसके अलावा अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी के दौरान संदिग्ध दवाएं बरामद की गई हैं। ड्रग विभाग लगातार मेडिकल स्टोर और दवा सप्लाई नेटवर्क की जांच कर रहा है।
मेडिकल स्टोरों की जांच जरूरी
नकली दवाओं पर रोक लगाने के लिए ड्रग विभाग की ओर से लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जहां भी नियमों का उल्लंघन मिलेगा, वहां सख्त कार्रवाई की जाएगी। दवा दुकानों पर लाइसेंस, दवाओं की खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड, बिल और स्टॉक की जांच की जा रही है। इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि मेडिकल स्टोर संचालक नियमों के अनुसार दवाओं की बिक्री कर रहे हैं या नहीं।
मरीज कैसे रहें सावधान
नकली दवाओं से बचने के लिए मरीजों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। दवा खरीदते समय हमेशा बिल लेना चाहिए और भरोसेमंद मेडिकल स्टोर से ही दवाएं खरीदनी चाहिए।दवा की पैकिंग, एक्सपायरी डेट, कंपनी का नाम और बैच नंबर जरूर जांचना चाहिए। किसी भी संदिग्ध स्थिति में डॉक्टर या संबंधित विभाग से संपर्क करना बेहतर होता है।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
नकली दवाओं का कारोबार स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है। सरकार और जांच एजेंसियां कार्रवाई तो कर रही हैं, लेकिन इस पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए सप्लाई चेन की निगरानी और सख्त कानून लागू करना जरूरी है।मरीजों की जिंदगी से जुड़े इस मामले में केवल छोटे विक्रेताओं पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि नकली दवाओं को बनाने और सप्लाई करने वाले पूरे नेटवर्क तक पहुंचना जरूरी है।फिलहाल नकली दवाओं और कमीशन के इस खेल ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच के बाद कितने लोगों पर कार्रवाई होती है और मरीजों की सुरक्षा के लिए क्या नए कदम उठाए जाते हैं।