कानपुर। कल्याणपुर पुलिस ने आयात-निर्यात कारोबार के नाम पर धोखाधड़ी करने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मामले में तीन अन्य आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस उनकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। आरोप है कि आरोपियों ने कारोबारी गतिविधियों के नाम पर पीड़ित के प्लॉट को गिरवी रखकर बैंक से लोन लिया और इसके बाद प्राप्त रकम को अपनी अलग-अलग कंपनियों के खातों में ट्रांसफर कर लिया।
मामले में आवास विकास निवासी अजय सिंह चौहान ने 19 मई 2026 को कल्याणपुर थाने में राजीव त्रिपाठी, रवि त्रिपाठी, वंदना त्रिपाठी और प्रशांत द्विवेदी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के आधार पर पुलिस अब अन्य आरोपियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
फर्म बनाने से शुरू हुआ मामला
शिकायत के मुताबिक, 4 अगस्त 2023 को वंदना त्रिपाठी ने अजय सिंह चौहान की पत्नी अनुपमा सिंह के साथ मिलकर राजवंदनम इंटरनेशनल एलएलपी नाम से एक फर्म बनाई थी। बताया गया है कि फर्म में दोनों की हिस्सेदारी बराबर थी।
फर्म का गठन आयात-निर्यात कारोबार से संबंधित गतिविधियों के लिए किया गया था। शुरुआत में कारोबारी व्यवस्था सामान्य रूप से चलने की बात कही गई, लेकिन बाद में फर्म और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी कारोबारी व्यवस्था का फायदा उठाते हुए आरोपियों ने उसके प्लॉट को बैंक के पास गिरवी रख दिया। इसके बाद बैंक से लोन लिया गया और कथित तौर पर उस रकम का इस्तेमाल फर्म के निर्धारित उद्देश्य के बजाय दूसरी कंपनियों में रकम स्थानांतरित करने के लिए किया गया।
प्लॉट गिरवी रखकर बैंक से लोन लेने का आरोप
पुलिस के सामने दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने पीड़ित के प्लॉट को बैंक के पास गिरवी रखकर लोन हासिल किया। इसके बाद लोन की रकम अलग-अलग कंपनियों के खातों में ट्रांसफर कर दी गई।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसे इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी और उसके संपत्ति संबंधी दस्तावेजों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया। मामले में पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि प्लॉट को गिरवी रखने की प्रक्रिया में कौन-कौन से दस्तावेज इस्तेमाल किए गए और बैंक से लोन किस आधार पर स्वीकृत हुआ।
इसके साथ ही लोन की रकम किन खातों में गई और उन खातों से आगे पैसा कहां ट्रांसफर किया गया, इसकी भी जांच की जा रही है।
19 मई को दर्ज हुआ मुकदमा
अजय सिंह चौहान ने 19 मई 2026 को कल्याणपुर थाने में चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायत में राजीव त्रिपाठी, रवि त्रिपाठी, वंदना त्रिपाठी और प्रशांत द्विवेदी के नाम शामिल किए गए।
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपों की जांच शुरू की। पुलिस ने फर्म से जुड़े दस्तावेज, बैंक लेनदेन और संपत्ति से संबंधित कागजातों की जानकारी जुटानी शुरू की। जांच के दौरान एक आरोपी पुलिस के हत्थे चढ़ गया।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। वहीं मामले में नामजद तीन अन्य आरोपी अभी फरार हैं।
तीन आरोपियों की तलाश जारी
पुलिस का कहना है कि मामले में फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि कथित धोखाधड़ी में चारों आरोपियों की भूमिका क्या थी और रकम को किन-किन खातों में भेजा गया।
जांच के दौरान बैंक रिकॉर्ड और कंपनियों के वित्तीय लेनदेन अहम साक्ष्य साबित हो सकते हैं। पुलिस इन दस्तावेजों के आधार पर पूरे लेनदेन की कड़ी जोड़ने का प्रयास कर रही है।
कंपनियों के खातों में रकम ट्रांसफर करने का आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि बैंक से लोन के रूप में हासिल रकम को कथित तौर पर आरोपियों ने अपनी अलग-अलग कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि जिन कंपनियों में रकम भेजी गई, उनका आरोपियों से क्या संबंध है और इन कंपनियों का राजवंदनम इंटरनेशनल एलएलपी से किस तरह का कारोबारी जुड़ाव था।
यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो पुलिस संबंधित वित्तीय दस्तावेजों और लेनदेन के आधार पर आगे की कार्रवाई कर सकती है।
कारोबारी लेनदेन में दस्तावेजों के इस्तेमाल पर सवाल
यह मामला कारोबारी साझेदारी और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों के इस्तेमाल को लेकर भी कई सवाल खड़े करता है। किसी फर्म के गठन के दौरान साझेदारों के बीच अधिकार और जिम्मेदारियां स्पष्ट होना जरूरी होता है। वहीं किसी संपत्ति को गिरवी रखकर वित्तीय संस्थान से लोन लेने की प्रक्रिया में संबंधित दस्तावेजों और सहमति की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
पुलिस इसी पहलू की भी जांच कर रही है कि शिकायतकर्ता की संपत्ति किस प्रक्रिया के तहत गिरवी रखी गई और उसमें किसकी भूमिका रही।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
फिलहाल पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि तीन अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस बैंक से जुड़े दस्तावेजों, फर्म के रिकॉर्ड और विभिन्न कंपनियों के खातों में हुए लेनदेन की जांच कर रही है।
मामले की पूरी तस्वीर जांच पूरी होने और उपलब्ध दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद ही स्पष्ट होगी। शिकायतकर्ता के आरोपों की पुष्टि भी पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगी।
कल्याणपुर में दर्ज इस मामले ने कारोबारी साझेदारी के नाम पर संपत्ति के कथित दुरुपयोग और बैंक लोन की रकम को दूसरी कंपनियों में स्थानांतरित करने के आरोपों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस अब फरार तीनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ कथित वित्तीय लेनदेन की पूरी कड़ी का पता लगाने में जुटी है।