मुरादाबाद : उत्तर प्रदेश के **मुरादाबाद** में एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें समाजवादी पार्टी (सपा) विधायक के चाचा और सपा जिला उपाध्यक्ष **हाजी मोहम्मद उस्मान** के सर्किट हाउस परिसर में नमाज पढ़ने का दावा किया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। शिवसेना ने इस मामले पर आपत्ति जताते हुए विरोध दर्ज कराने की बात कही है।
वहीं, इस पूरे मामले को लेकर सपा नेता ने वीडियो की जानकारी होने से इनकार किया है और कहा है कि यह जांच का विषय है कि वीडियो कब का है और किस परिस्थिति में बनाया गया। पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो मुरादाबाद के सर्किट हाउस परिसर का है। वीडियो में एक व्यक्ति नमाज पढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि नमाज पढ़ने वाले व्यक्ति सपा विधायक मोहम्मद फहीम इरफान के चाचा और सपा जिला उपाध्यक्ष हाजी मोहम्मद उस्मान हैं।
वीडियो वायरल होने के बाद लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कुछ लोगों ने इसे धार्मिक आस्था से जोड़कर देखा, जबकि कुछ लोगों ने सार्वजनिक परिसर में धार्मिक गतिविधि को लेकर सवाल उठाए।
शिवसेना ने जताया विरोध
वीडियो को लेकर शिवसेना ने विरोध दर्ज कराया है। संगठन के नेताओं का कहना है कि सरकारी परिसर में इस तरह की गतिविधि को लेकर आपत्ति है।
शिवसेना की ओर से इस मामले को जिला प्रशासन के सामने उठाने की बात कही गई है। साथ ही सर्किट हाउस में आरती करने का ऐलान भी किया गया है।
सपा नेता ने दी सफाई
हाजी मोहम्मद उस्मान ने वायरल वीडियो को लेकर कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि वह उस दिन सर्किट हाउस नहीं गए थे।
उन्होंने कहा कि वीडियो कहां का है और किस उद्देश्य से बनाया गया है, यह जांच का विषय है। साथ ही उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति अपनी सुविधा और आस्था के अनुसार पूजा या इबादत करता है।
विधायक ने वीडियो को बताया संदिग्ध
सपा विधायक मोहम्मद फहीम इरफान ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए वायरल वीडियो की सत्यता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे एआई से बनाया गया वीडियो होने की आशंका जताई है।
हालांकि, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।
पुलिस कर रही जांच
मुरादाबाद पुलिस ने वायरल वीडियो को लेकर जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि वीडियो की सत्यता, उसकी तारीख और पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है।
जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
धार्मिक स्थलों और सरकारी परिसरों को लेकर बहस
भारत में सरकारी परिसरों में धार्मिक गतिविधियों को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन की भूमिका कानून व्यवस्था बनाए रखने और सभी पक्षों की भावनाओं को ध्यान में रखने की होती है।
इस मामले में भी राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं के बीच प्रशासनिक जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
वीडियो की पुष्टि का इंतजार
सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो कई बार बिना पूरी जानकारी के तेजी से फैल जाते हैं। ऐसे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वीडियो की सत्यता और पूरे घटनाक्रम की जांच जरूरी होती है।
फिलहाल पुलिस जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि वायरल वीडियो वास्तविक है या इसमें किसी तरह की छेड़छाड़ की गई है।