झांकी सहित प्रभु राम व माता सीता के विवाह प्रसंग में बरसे फूल, नाचे श्रद्धालु
Kushinagar राजापाकड़/कुशीनगर : तमकुही विकास खंड के ग्राम पंचायत राजापाकड़ के शिवाला टोला मे 120 वर्ष पूर्व स्थापित शिवमंदिर परिसर में वर्ष 1965 से लगने वाले महाशिवारात्रि मेला के निमित्त आयोजित 11 दिवसीय श्री श्री 1008 श्री रामचरित मानस नवाह परायण महायज्ञ के नौवें दिन व कथा प्रवचन के सातवें दिन सोमवार की सायं अयोध्याधाम से पधारे कथावाचक गायत्री नंदन महाराज ने विभिन्न संबंधित प्रसंग के साथ झांकी सहित प्रभु राम व माता सीता के विवाह प्रसंग का वर्णन किया। कथावाचक ने कहा कि सीता से विवाह के इच्छुक बलशाली राजा राजकुमार बल के अहंकार में डूबे थे। वह धनुष उठाते समय शरीर का पूरा बल धनुष पर लगा देते थे जिससे धनुष उठने की बजाय और बैठ जाता था। यह उसी प्रकार होता था जैसे किसी डब्बे के उपर लगा हुआ ढक्कन खोलते समय आप जोर लगाएं तो वह और बैठ जाता है लेकिन आराम से खोलें तो तुरंत खुल जाता है। राम ने इस चीज को गौर से देखा कि सभी धनुष के साथ बल प्रयोग कर रहे हैं इसलिए धनुष उठ नहीं रहा है।इसलिए जब राम धनुष उठाने गए तो जिस प्रकार सीता सहज भाव से बिना बल लगाए धनुष उठा लेती थी उसी प्रकार राम ने भी धनुष को उठाने का प्रयास किया और सफल हुए और सीता राम की हो गई। राम ने यहां संसार को ज्ञान दिया कि बल की बजाय हमेशा बुद्धि से काम लेना चाहिए। स्वयंवर वरमाला के बाद श्रद्धालुजन ने राम सीता के पांव पखारे।
कथा में विवाह गीत पर श्रद्धालु जमकर झूमे।फूलों की वर्षा की वर्षा के बीच श्रद्धालु नृत्य कर उठे। पूर्व अवकाश प्राप्त एडीओ पंचायत गिरीश सिंह, धीरज शाही, हरिशंकर कुशवाहा, फूलकांती देवी, नंदलाल चौहान, अरुण सिंह, डा. सुधीर मिश्र नंदन, दिनेश मिश्र, राकेश मिश्र उर्फ सिब्लू, रंजन मिश्र, गौरीशंकर गुप्ता, रामनरेश कुशवाहा, राजबहादुर गुप्ता, दूधनाथ गुप्ता, गोरख यादव, नगीना गुप्ता, दिलीप गुप्ता आदि ने व्यास पीठ का पूजन, कथा व्यास का माल्यार्पण व रामचरित मानस की आरती उतारी। यज्ञाचार्य पं राकेश मिश्र ने पूजन कराया। पं. दीपक मिश्र ने संचालन किया। आयोजक हरिदास महाराज, अध्यक्ष राजू यादव, सत्यनारायण यादव, मृत्युंजय सिंह मोनू, मुकेश यादव, पप्पू यादव आदि मौजूद रहे।