बुलंदशहर। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर शुक्रवार को जिला पंचायत सभागार में भावपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें वर्ष 1947 में देश के विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उत्तर प्रदेश सरकार के जल शक्ति विभाग के राज्यमंत्री दिनेश खटीक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उपस्थित लोगों ने विभाजन की त्रासदी से सीख लेते हुए देश की एकता और अखंडता को सर्वोपरि रखने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के स्मरण से हुई। इसके बाद पाकिस्तान से विस्थापित होकर भारत आए परिवारों के दर्द और संघर्ष पर आधारित एक लघु फिल्म दिखाई गई। फिल्म के माध्यम से विभाजन के समय हुई हिंसा, पलायन और मानवीय त्रासदी को प्रस्तुत किया गया। इसमें बताया गया कि किस तरह लाखों लोगों को अपना घर, जमीन और संपत्ति छोड़कर अनजान स्थानों की ओर पलायन करना पड़ा था। अनेक परिवार बिछड़ गए और बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जान गंवाई।
कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों, लोकतंत्र सेनानियों, पाकिस्तान से विस्थापित परिवारों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों ने हिस्सा लिया। उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर विभाजन के दौरान जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानियों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित भी किया गया।
इस दौरान प्रदर्शित संदेशों के माध्यम से लोगों को विभाजन की भयावहता से अवगत कराया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और देश की अखंडता को मजबूत बनाए रखने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि विभाजन की पीड़ा को याद रखना इसलिए जरूरी है ताकि भविष्य में समाज को धर्म, जाति, भाषा अथवा क्षेत्र के आधार पर बांटने वाली शक्तियों को सफल न होने दिया जाए।
समारोह के बाद कलेक्ट्रेट परिसर से काला आम चौराहे तक मोमबत्तियां जलाकर मौन जुलूस निकाला गया। जुलूस में शामिल लोगों के हाथों में राष्ट्रीय एकता और अखंडता का संदेश देने वाली तख्तियां थीं। इन पर ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ और ‘राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता सर्वोपरि’ जैसे संदेश लिखे थे। शांतिपूर्ण जुलूस के माध्यम से विभाजन में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
राज्यमंत्री दिनेश खटीक ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस देश के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में शामिल विभाजन की याद दिलाता है। उस दौरान लाखों परिवारों को अपना घर और आजीविका छोड़कर पलायन करना पड़ा था। अनेक लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया और विस्थापित परिवारों को नए स्थानों पर कठिन परिस्थितियों के बीच जीवन की शुरुआत करनी पड़ी।
उन्होंने कहा कि यह दिवस केवल अतीत की पीड़ा को याद करने तक सीमित नहीं है। इससे सीख लेकर देश में भाईचारे, सद्भाव और आपसी विश्वास को मजबूत करना भी आवश्यक है। जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र के नाम पर नफरत फैलाने वाली प्रवृत्तियों का समाज को एकजुट होकर विरोध करना चाहिए।
राज्यमंत्री ने कहा कि विविधता में एकता भारत की सबसे बड़ी शक्ति है। देश तभी आगे बढ़ सकता है जब प्रत्येक नागरिक को सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर मिले। उन्होंने उपस्थित लोगों को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने तथा देश की एकता और अखंडता की रक्षा करने का संकल्प दिलाया।
कार्यक्रम में जिलाधिकारी कुमार हर्ष, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार सिंह, मुख्य विकास अधिकारी निशा ग्रेवाल, विधायक लक्ष्मीराज सिंह, देवेंद्र सिंह लोधी, चंद्रपाल सिंह और अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अभिषेक कुमार सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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