मथुरा। जय गुरुदेव आश्रम में आयोजित तीन दिवसीय गुरु पूर्णिमा सत्संग मेले में देशभर से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब उमड़ा। आश्रम परिसर में ऐसा दृश्य दिखाई दिया, मानो पूरा भारत एक जगह सिमट आया हो। अलग-अलग राज्यों से आए अनुयायियों ने सत्संग में भाग लेने के साथ-साथ सेवा कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। श्रद्धालुओं ने यातायात व्यवस्था संभाली, भंडारे में सेवा दी और आने वाले लोगों की सहायता की।
सत्संग मेले के दूसरे दिन आश्रम के संस्थाध्यक्ष पंकज जी महाराज ने लाखों अनुयायियों को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु के ध्यान और सत्संग के माध्यम से ही आत्मा का वास्तविक कल्याण संभव है। उन्होंने कहा कि गुरु और शब्द का संबंध उसी प्रकार है जैसे समुद्र और उसकी लहरों का होता है। गुरु के ध्यान से शब्द सुरत को अपनी ओर आकर्षित करता है और मनुष्य को आध्यात्मिक मार्ग की ओर ले जाता है।
पंकज महाराज ने कहा कि जब मनुष्य गुरु के ध्यान में लीन होता है तो उसका मन सांसारिक मोह-माया से दूर होकर ईश्वर की ओर जागृत होने लगता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य का मन एक ही होता है, जिसे वह चाहे तो दुनिया की इच्छाओं में लगा सकता है और चाहे तो गुरु भक्ति में समर्पित कर सकता है। जब मन को गुरु का प्रेम प्राप्त होता है तो धीरे-धीरे सांसारिक आकर्षण कम होने लगते हैं।
उन्होंने कर्म के महत्व को समझाते हुए कहा कि यह संसार कर्म प्रधान है। मनुष्य को अपने कर्मों के अनुसार ही जीवन में फल प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि “कर्म प्रधान विश्व रचि राखा, जो जस करै सो तस फल चाखा” की भावना को समझना जरूरी है। अच्छे कर्म जीवन को बेहतर बनाते हैं, जबकि बुरे कर्म मनुष्य को परेशानियों की ओर ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि बुरे कर्म लोहे की जंजीर की तरह होते हैं, जबकि अच्छे कर्म सोने की बेड़ियों के समान हैं।
पंकज महाराज ने श्रद्धालुओं से कहा कि गुरु भक्ति का उद्देश्य केवल सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति नहीं बल्कि आत्मिक उन्नति और ईश्वर प्राप्ति होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संतों और महात्माओं के सत्संग से मनुष्य को अपने कर्मों को सुधारने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने अनुयायियों से आह्वान किया कि वे मानव जीवन और गुरु की प्राप्ति को सौभाग्य मानते हुए गुरु के बताए मार्ग पर चलें।
उन्होंने बच्चों की शिक्षा पर भी जोर दिया। पंकज महाराज ने कहा कि हर बच्चे के अंदर प्रतिभा और ज्ञान की शक्ति छिपी होती है। जब बच्चा स्कूल जाता है और गुरुजनों की आज्ञा का पालन करता है तो उसकी छिपी हुई क्षमता जागृत होती है। वहीं, जो बच्चे शिक्षा से दूर रहते हैं और गुरुजनों का सम्मान नहीं करते, उनकी प्रतिभा का विकास नहीं हो पाता।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पंकज महाराज ने नाम योग साधना मंदिर और सत्संग भवन में गुरु पूजा, ध्यान और आरती कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने गुरु की तस्वीर पर चंदन का टीका लगाया और श्रद्धालुओं के साथ ध्यान किया। बड़ी संख्या में भक्तों ने कतार में लगकर गुरु से आशीर्वाद प्राप्त किया और अपने जीवन को बेहतर बनाने की कामना की।
सत्संग कार्यक्रम के दौरान नामदान की प्रक्रिया भी हुई। अनुयायियों को बताया गया कि जयगुरुदेव नाम का स्मरण आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम है। आश्रम में कई जोड़ों का दहेज रहित विवाह भी कराया गया, जिससे सामाजिक सुधार का संदेश दिया गया।
गुरु पूर्णिमा मेले में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने आश्रम की व्यवस्थाओं को संभालने में सहयोग दिया। कहीं सेवा कार्य चलते दिखे तो कहीं भंडारे में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। पूरे आश्रम परिसर में भक्ति, अनुशासन और सेवा का माहौल देखने को मिला।
इस अवसर पर पंकज महाराज ने दादा गुरु जी स्वामी घूरेलाल महाराज के वार्षिक भंडारे की घोषणा भी की। उन्होंने बताया कि यह आयोजन 17 से 21 दिसंबर तक जय गुरुदेव आश्रम, मथुरा में आयोजित किया जाएगा। इससे पहले सभी जिलों में शाकाहार, सदाचार और मद्यनिषेध के प्रचार के लिए बड़े स्तर पर साइकिल यात्राएं निकालने का आह्वान किया गया।
गुरु पूर्णिमा सत्संग मेले ने एक बार फिर श्रद्धा, सेवा और आध्यात्मिक संदेश का व्यापक उदाहरण प्रस्तुत किया। आश्रम में पहुंचे श्रद्धालुओं ने गुरु भक्ति, सत्संग और अच्छे कर्मों के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।