लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण को लेकर बड़ा कदम उठाया है। अगस्त माह में प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के माध्यम से दो विशेष टीकाकरण अभियान चलाए जाएंगे। इन अभियानों के जरिए बच्चों को डिप्थीरिया, टिटनेस, काली खांसी, खसरा और रूबेला जैसी गंभीर संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए सुरक्षा कवच प्रदान किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे और समय पर उन्हें जरूरी वैक्सीन की खुराक मिल सके।
स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग के संयुक्त प्रयास से आयोजित होने वाले इन अभियानों में प्रदेश के सभी 75 जिलों को शामिल किया गया है। अभियान के तहत परिषदीय विद्यालयों के साथ-साथ सहायता प्राप्त विद्यालयों, मदरसों और आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले पात्र बच्चों का टीकाकरण किया जाएगा। स्कूल शिक्षा महानिदेशक एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को अभियान को सफल बनाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
पहले चरण में 3 से 7 अगस्त तक टीडी/टीडीएपी यानी टिटनेस, डिप्थीरिया और काली खांसी से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान 5 से 6 वर्ष, 10 वर्ष और 16 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार टीके की अतिरिक्त खुराक दी जाएगी। संभावित रूप से कक्षा-1, कक्षा-5 और कक्षा-10 व 11 में पढ़ने वाले बच्चों को इसका लाभ मिलेगा।
अधिकारियों के अनुसार टीडीएपी-2, टीडी-10 और टीडी-16 वैक्सीन की खुराक बच्चों को दी जाएगी। प्रत्येक टीकाकरण सत्र में 50 से 75 बच्चों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। अभियान शुरू होने से पहले राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा विद्यालयवार माइक्रोप्लान तैयार कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी पात्र बच्चों तक टीकाकरण की सुविधा पहुंचे।
दूसरे चरण में 18 से 28 अगस्त तक एमआर यानी मीजल्स-रूबेला टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत 5 से 10 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को खसरा और रूबेला से बचाव के लिए एमआर वैक्सीन की अतिरिक्त खुराक दी जाएगी। प्रत्येक विद्यालय में प्रतिदिन 100 से 125 बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
सरकार ने अभियान को प्रभावी बनाने के लिए विद्यालय स्तर पर विशेष तैयारियां करने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक स्कूल में एक नोडल शिक्षक नियुक्त किया जाएगा, जो टीकाकरण से जुड़ी गतिविधियों का समन्वय करेगा। आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और शिक्षक मिलकर पात्र बच्चों की सूची तैयार करेंगे। साथ ही अभिभावकों को जागरूक करने के लिए प्रार्थना सभा, अभिभावक-शिक्षक बैठक और अन्य जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग मिलकर अभियान की लगातार निगरानी करेंगे। टीकाकरण की प्रगति, बच्चों की उपस्थिति और छूटे हुए बच्चों की जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज की जाएगी। राज्य और जिला स्तर पर नियमित समीक्षा कर जरूरत के अनुसार सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
प्रदेश सरकार का कहना है कि विद्यालय केवल शिक्षा देने का केंद्र नहीं बल्कि बच्चों के समग्र विकास और स्वास्थ्य सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इन विशेष टीकाकरण अभियानों के जरिए बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाने के साथ-साथ स्वस्थ भविष्य की नींव मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अभियान पूरी जिम्मेदारी और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए, ताकि अधिक से अधिक बच्चों को इसका लाभ मिल सके।