कौशाम्बी। उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी में पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख अपनाया है। हादसे में आठ बच्चों समेत 11 लोगों की मौत के बाद शासन स्तर पर पूरे मामले की लगातार निगरानी की जा रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिला प्रशासन और पुलिस ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। जिलाधिकारी ने हादसे के गुनहगारों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी रासुका के तहत कार्रवाई कराने की बात कही है। पुलिस अधिकारियों ने इसके लिए जरूरी कानूनी प्रक्रिया और दस्तावेज तैयार करने शुरू कर दिए हैं।
अवैध रूप से संचालित पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया था। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें आठ बच्चों सहित कुल 11 लोगों की जान चली गई। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन के साथ लखनऊ स्थित राज्य मुख्यालय तक खलबली मच गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतनी खतरनाक पटाखा फैक्ट्री अवैध तरीके से कैसे संचालित होती रही और जिम्मेदार विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। फैक्ट्री में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं और विस्फोटक सामग्री का भंडारण किन परिस्थितियों में किया जा रहा था, इन पहलुओं की भी जांच की जा रही है। प्रशासन इस बात का पता लगाने में जुटा है कि फैक्ट्री के संचालन में किन नियमों की अनदेखी की गई।
मुख्यमंत्री के सख्त रुख के बाद जिला प्रशासन ने भी कार्रवाई तेज कर दी है। मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सामान्य आपराधिक धाराओं के साथ रासुका के तहत कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। इसके लिए पुलिस की ओर से घटनाक्रम, आरोपियों की भूमिका और हादसे से जुड़े साक्ष्यों को संकलित किया जा रहा है। रासुका के तहत कार्रवाई के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद प्रस्ताव संबंधित स्तर पर भेजा जा सकता है।
इस हादसे में बच्चों की मौत ने लोगों को झकझोर दिया है। फैक्ट्री में बच्चों की मौजूदगी और उनकी मौत के बाद बाल श्रम समेत कई गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा कि बच्चे फैक्ट्री परिसर में किस कारण मौजूद थे। अगर उनसे पटाखा निर्माण से जुड़ा काम कराया जा रहा था तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अन्य संबंधित कानूनों के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।
घटना के बाद प्रशासन ने पटाखा फैक्ट्री के संचालन से जुड़े दस्तावेजों और अनुमति की भी जांच शुरू की है। यह पता लगाया जा रहा है कि फैक्ट्री को कभी किसी तरह का लाइसेंस दिया गया था या पूरी गतिविधि अवैध तरीके से चल रही थी। विस्फोटक पदार्थों की खरीद और भंडारण का स्रोत भी जांच के दायरे में है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पटाखा बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री कहां से लाई जाती थी और फैक्ट्री से तैयार माल की आपूर्ति किन इलाकों में की जाती थी।
शासन स्तर से मामले की लगातार मॉनीटरिंग किए जाने के कारण स्थानीय अधिकारियों पर भी जल्द से जल्द जांच पूरी करने और जिम्मेदारी तय करने का दबाव है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद संबंधित विभागों की भूमिका की भी समीक्षा की जा सकती है। अगर जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई संभव है।
पटाखा और विस्फोटक सामग्री से जुड़ी इकाइयों के संचालन के लिए कई सुरक्षा मानकों और नियमों का पालन करना जरूरी होता है। आबादी वाले इलाके में ऐसी गतिविधियां गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं। कौशाम्बी की घटना ने एक बार फिर अवैध पटाखा फैक्ट्रियों और उनके खिलाफ निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों के बीच भी इस बात को लेकर नाराजगी है कि यदि समय रहते अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई की गई होती तो शायद इतना बड़ा हादसा टाला जा सकता था।
पुलिस और प्रशासन अब घटना से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की जांच कर रहे हैं। फैक्ट्री संचालक से लेकर विस्फोटक सामग्री उपलब्ध कराने वालों तक की जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं किसी स्तर पर अवैध फैक्ट्री को संरक्षण तो नहीं मिल रहा था।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद इस मामले में कार्रवाई और तेज होने की संभावना है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और जांच के आधार पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। रासुका लगाने की तैयारी ने भी साफ कर दिया है कि सरकार इस घटना को बेहद गंभीरता से ले रही है।
फिलहाल पुलिस की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई जारी है। आने वाले दिनों में जांच पूरी होने के साथ हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों और फैक्ट्री के अवैध संचालन से जुड़े कई तथ्य सामने आ सकते हैं। आठ बच्चों समेत 11 लोगों की मौत के बाद पीड़ित परिवारों को भी अब दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का इंतजार है।