सहारनपुर। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की सोफिया मार्केट शाखा की करेंसी चेस्ट में करीब 17 करोड़ रुपये के कथित नकली नोट मिलने का मामला सामने आने के बाद बैंकिंग महकमे में खलबली मच गई है। इतनी बड़ी रकम से जुड़ा मामला सामने आने के बाद बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित नकली नोट करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका हो सकती है।

मामला सामने आने की कहानी भी चौंकाने वाली बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक घंटाघर स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा में कुछ दिनों पहले पार्ट टाइम हाउस कीपर विशाल कुमार को करेंसी चेस्ट में करीब साढ़े 11 करोड़ रुपये के नोटों की गड्डियां व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी दी गई थी।

बताया गया है कि इन नोटों में पुराने, गले-कटे और अन्य श्रेणी के नोट शामिल थे, जिन्हें आगे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की जयपुर स्थित चेस्ट में भेजा जाना था। बैंकिंग प्रक्रिया के तहत ऐसे नोटों को निर्धारित व्यवस्था के अनुसार छांटकर संबंधित RBI चेस्ट में भेजा जाता है।

जानकारी के अनुसार करीब 11 करोड़ रुपये की यह रकम पांच अगस्त को जयपुर भेजी गई थी। इसके बाद नोटों की जांच और मिलान की प्रक्रिया के दौरान गड़बड़ी सामने आने की बात कही जा रही है। मामले की जानकारी मिलते ही बैंक अधिकारियों में हड़कंप मच गया और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी गई।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में कथित नकली मुद्रा आखिर करेंसी चेस्ट तक पहुंची कैसे। करेंसी चेस्ट में आने और बाहर जाने वाली रकम का रिकॉर्ड रखा जाता है। ऐसे में यदि बड़ी मात्रा में नकली नोट मिलने की पुष्टि होती है तो यह सुरक्षा और आंतरिक निगरानी से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है।

बैंक अधिकारी अब उन सभी प्रक्रियाओं और रिकॉर्ड की जांच कर सकते हैं जिनके जरिए संबंधित नोट करेंसी चेस्ट में जमा हुए थे। यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि रकम किस समय चेस्ट में पहुंची, किस स्तर पर उसकी गिनती और जांच हुई तथा उसे जयपुर भेजने से पहले किन कर्मचारियों या अधिकारियों की निगरानी में रखा गया था।

मामले में पार्ट टाइम हाउस कीपर विशाल कुमार को नोटों की गड्डियां व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी दिए जाने की बात भी जांच का अहम हिस्सा बन सकती है। करेंसी चेस्ट जैसी संवेदनशील व्यवस्था में नोटों को संभालने की जिम्मेदारी और सुरक्षा प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

हालांकि केवल किसी कर्मचारी को नोटों की गड्डियां लगाने की जिम्मेदारी दिए जाने से उसकी किसी अनियमितता में भूमिका साबित नहीं होती। पूरे घटनाक्रम में जिम्मेदारी तय करने के लिए दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और संबंधित कर्मचारियों के बयानों की जांच आवश्यक होगी।

करेंसी चेस्ट बैंकिंग व्यवस्था का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। यहां बड़ी मात्रा में नकदी सुरक्षित रखी जाती है और आवश्यकता के अनुसार बैंक शाखाओं को नकदी उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा खराब या प्रचलन के योग्य नहीं रह गए नोटों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत RBI तक पहुंचाया जाता है।

इसी वजह से करेंसी चेस्ट में सुरक्षा के कई स्तर होते हैं। नकदी की गिनती, मिलान, रिकॉर्ड और परिवहन की पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार की जाती है। यदि इस व्यवस्था में नकली नोटों की बड़ी खेप मिलने की बात सही साबित होती है तो जांच का दायरा काफी बड़ा हो सकता है।

मामले में यह भी पता लगाया जाना जरूरी होगा कि कथित नकली नोट एक साथ करेंसी चेस्ट में पहुंचे थे या अलग-अलग समय पर जमा हुई रकम के साथ धीरे-धीरे वहां पहुंचे। यदि नोट विभिन्न बैंक शाखाओं से आए थे तो उन शाखाओं के रिकॉर्ड की भी जांच की आवश्यकता पड़ सकती है।

इसके अलावा नकली नोटों की गुणवत्ता और उनकी पहचान से भी जांच एजेंसियों को महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। जांच में यह देखा जा सकता है कि कथित नकली नोट सामान्य स्तर की नकल थे या अत्यधिक गुणवत्ता के साथ तैयार किए गए थे। इससे उनके संभावित स्रोत का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

17 करोड़ रुपये की रकम बेहद बड़ी होने के कारण मामला केवल बैंक की आंतरिक अनियमितता तक सीमित नहीं रह सकता। यदि इतनी बड़ी मात्रा में नकली मुद्रा की पुष्टि होती है तो इसके स्रोत और संभावित नेटवर्क का पता लगाना महत्वपूर्ण होगा।

नकली मुद्रा से जुड़े मामलों में यह जांच भी महत्वपूर्ण होती है कि नोटों को कहां तैयार किया गया और उन्हें बैंकिंग प्रणाली तक पहुंचाने के लिए किन माध्यमों का इस्तेमाल हुआ। इतनी बड़ी मात्रा में कथित नकली नोटों का बैंक की करेंसी चेस्ट तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए कई सवाल खड़े करता है।

बैंकिंग व्यवस्था में नकली नोटों की पहचान के लिए मशीनों और कर्मचारियों की मदद से जांच की जाती है। ऐसे में यह भी देखा जाएगा कि संबंधित नोट पहले की जांच प्रक्रिया में क्यों नहीं पकड़े गए। क्या मशीनों या जांच प्रक्रिया में कोई कमी थी अथवा नोटों को किसी अन्य तरीके से चेस्ट तक पहुंचाया गया, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

RBI की जयपुर चेस्ट में रकम भेजे जाने के बाद गड़बड़ी सामने आने की जानकारी इस मामले को और गंभीर बनाती है। पांच अगस्त को भेजी गई रकम से संबंधित दस्तावेज, पैकिंग रिकॉर्ड और परिवहन संबंधी विवरण भी जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

मामले में बैंक के कर्मचारियों और अधिकारियों की जिम्मेदारी भी जांच के दायरे में आ सकती है। यह देखा जाएगा कि किस कर्मचारी को किस स्तर पर रकम की जांच, गिनती, पैकिंग और भेजने की जिम्मेदारी दी गई थी। यदि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया तो संबंधित स्तर पर जवाबदेही तय की जा सकती है।

CCTV फुटेज भी जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। करेंसी चेस्ट और उसके आसपास लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग से यह पता लगाया जा सकता है कि संबंधित रकम को किसने संभाला और इस दौरान कोई संदिग्ध गतिविधि हुई या नहीं।

फिलहाल पूरे मामले में आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि 17 करोड़ रुपये के कथित नकली नोटों का वास्तविक स्रोत क्या था और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। जांच में यह भी सामने आएगा कि यह किसी संगठित नेटवर्क का मामला है या बैंकिंग प्रक्रिया में किसी स्तर पर हुई गंभीर अनियमितता का परिणाम।

PNB की सोफिया मार्केट शाखा की करेंसी चेस्ट से जुड़ा यह मामला बड़ी रकम के कारण चर्चा में आ गया है। अब बैंक और संबंधित एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कथित नकली नोटों के स्रोत तक पहुंचना और यह पता लगाना है कि इतनी बड़ी मात्रा में संदिग्ध मुद्रा बैंकिंग व्यवस्था के भीतर कैसे पहुंची।

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