पैसों के लिए पशु का वध, देहरादून में बेचा मांस, अब हुआ हैरान करने वाला खुलासा

बिजनौर। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में गौवंशीय पशु के कथित वध और उसका मांस दूसरे शहर में बेचने का मामला सामने आया है। नजीबाबाद थाना क्षेत्र में एक बाग से गौवंशीय पशु के अवशेष मिलने के बाद शुरू हुई छानबीन में कई आरोपियों के नाम सामने आए हैं। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने पैसों की जरूरत पूरी करने के लिए सड़क पर घूम रहे एक गौवंशीय पशु को पकड़ा, उसे जंगल में ले जाकर कथित तौर पर उसका वध किया और मांस को देहरादून ले जाकर बेच दिया। मामले में दो आरोपियों को पहले गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि एक अन्य आरोपी मुजम्मिल को 6 सितंबर को कथित पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के अनुसार मुठभेड़ के दौरान मुजम्मिल के बाएं पैर में गोली लगी। घायल अवस्था में उसे गिरफ्तार कर इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने उसके कब्जे से अवैध तमंचा, कारतूस, बिना नंबर प्लेट की बाइक और पशुवध में इस्तेमाल होने वाले कथित उपकरण बरामद करने का दावा किया है। पुलिस का कहना है कि उसके साथ मौजूद अन्य आरोपी अंधेरे और जंगल का फायदा उठाकर फरार हो गए।

बाग में मिले थे गौवंशीय पशु के अवशेष

मामले की शुरुआत 31 अगस्त 2026 को हुई। पुलिस के मुताबिक नजीबाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम मौज्जमपुर तुलसी स्थित एक बाग में गौवंशीय पशु के अवशेष पड़े होने की सूचना मिली थी। जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया।

घटना को गंभीरता से लेते हुए थाना नजीबाबाद में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या 427/2026 दर्ज किया गया। पुलिस के मुताबिक मामला गौवध निवारण अधिनियम की धारा 3/5/8 के तहत दर्ज किया गया था। घटना में शामिल लोगों का पता लगाने के लिए कई टीमों को लगाया गया।

जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस को कुछ संदिग्धों के बारे में जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार विवेचना के दौरान इदरीश पुत्र रईस अहमद निवासी कस्बा एवं थाना कोतवाली देहात और शहनवाज पुत्र शमशाद निवासी मोहल्ला जाब्तागंज थाना नजीबाबाद का नाम सामने आया। इनके अलावा मुजम्मिल पुत्र शराफत निवासी मोहल्ला कस्सावान थाना मंडावर सहित कुछ अन्य लोगों की कथित भूमिका भी सामने आई।

इदरीश और शहनवाज पहले हुए गिरफ्तार

पुलिस ने 5 सितंबर को इदरीश और शहनवाज को गिरफ्तार कर लिया। दोनों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेज दिया गया। इसके बाद मामले में सामने आए अन्य आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई।

पुलिस का दावा है कि पूछताछ और अब तक जुटाई गई जानकारी में घटना के पीछे आर्थिक कारण सामने आया है। आरोप है कि आरोपियों को पैसों की जरूरत थी और इसी कारण उन्होंने गौवंशीय पशु के वध और मांस बेचने की योजना बनाई।

सड़क से पशु पकड़कर जंगल ले जाने का आरोप

पुलिस के अनुसार 30 और 31 अगस्त की दरमियानी रात आरोपियों ने सड़क पर घूम रहे एक गौवंशीय पशु को पकड़ लिया। इसके बाद कथित तौर पर उसे ग्राम मौजमपुर तुलसीगढ़ी के जंगल में ले जाया गया।

आरोप है कि जंगल में पशु का वध करने के बाद उसके मांस को वाहन में भरकर देहरादून ले जाया गया। पुलिस का दावा है कि वहां मांस बेचने के बाद मिली रकम आरोपियों और उनके साथियों के बीच बांट ली गई।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर मांस किसे बेचा गया था और क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय था। घटना में वाहन और अन्य संसाधन उपलब्ध कराने वाले लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

हालांकि, पूछताछ के आधार पर सामने आए इन दावों की स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। आरोपियों पर लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।

मुखबिर की सूचना पर की गई घेराबंदी

पुलिस प्रेसनोट के मुताबिक 6 सितंबर को नजीबाबाद पुलिस क्षेत्र में चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि गौवंशीय पशु के वध से जुड़े कुछ आरोपी फिर किसी घटना को अंजाम देने की फिराक में हैं।

सूचना में बताया गया कि संदिग्ध बाइक से ग्राम कल्हेड़ी स्थित मालन नदी के पास से हाईवे की तरफ आने वाले हैं। इसके बाद पुलिस टीम संबंधित स्थान पर पहुंची और आरोपियों को पकड़ने के लिए घेराबंदी की।

पुलिस का दावा है कि टीम को देखते ही संदिग्धों ने फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने इसे जानलेवा हमला बताते हुए आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग करने की बात कही है।

मुजम्मिल के पैर में लगी गोली

पुलिस के अनुसार जवाबी फायरिंग के दौरान मुजम्मिल के बाएं पैर में गोली लगी और वह घायल होकर गिर गया। इसके बाद टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। घायल आरोपी को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।

पुलिस का कहना है कि मुजम्मिल के साथ कुछ अन्य लोग भी मौजूद थे, लेकिन वे रात के अंधेरे और जंगल का फायदा उठाकर फरार हो गए। उनकी पहचान और गिरफ्तारी के लिए टीमें लगाई गई हैं।

पुलिस ने मुठभेड़ से जुड़े घटनाक्रम को लेकर थाना नजीबाबाद में अलग से मुकदमा अपराध संख्या 443/2026 दर्ज किया है। इसमें बीएनएस की धारा 3(5)/109(1) और आर्म्स एक्ट की धारा 3/25/27 के तहत कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई है।

तमंचा और पशुवध के उपकरण बरामद करने का दावा

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार मुजम्मिल के कब्जे से 315 बोर का एक अवैध तमंचा बरामद किया गया। इसके अलावा 315 बोर के दो खोखा कारतूस और एक जिंदा कारतूस भी बरामद करने का दावा किया गया है।

पुलिस ने मौके से बिना नंबर प्लेट की एक हीरो स्प्लेंडर मोटरसाइकिल भी कब्जे में ली है। इसके अलावा एक प्लास्टिक का कट्टा, रस्सा, छुरी और चापड़ बरामद किया गया है। पुलिस इन सामानों को पशुवध से जुड़ा बता रही है।

इन बरामद वस्तुओं को मामले में साक्ष्य के तौर पर शामिल कर आगे की कानूनी प्रक्रिया की जा रही है।

देहरादून तक जुड़े तार खंगालने की कोशिश

इस मामले में पुलिस के सामने अब एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि कथित तौर पर गौवंशीय पशु का मांस देहरादून में किस व्यक्ति या समूह को बेचा गया। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह एक बार की घटना थी या आरोपी पहले भी इसी तरह मांस की बिक्री कर चुके थे।

मामले में अब तक सामने आए लोगों के आपसी संपर्क, परिवहन के साधन और कथित खरीदारों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। पुलिस का कहना है कि विवेचना में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

तीन आरोपी गिरफ्तार अन्य की तलाश

इस मामले में अब तक इदरीश और शहनवाज को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि मुजम्मिल को कथित मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया है। फरार बताए जा रहे अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर अन्य लोगों की भूमिका भी तय की जाएगी। साथ ही यह जानने की कोशिश की जा रही है कि कथित पशुवध से लेकर मांस की बिक्री तक पूरी गतिविधि में कितने लोग शामिल थे।

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