लखनऊ। राजधानी लखनऊ के हजरतगंज क्षेत्र में पुलिसकर्मियों को ही निशाना बनाकर कथित तौर पर करोड़ों रुपये की ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक जालसाज विधानभवन, लोकभवन और दारुलसफा के आसपास सक्रिय रहता था और खुद को शासन में तैनात बड़े अधिकारियों का करीबी बताकर पुलिसकर्मियों को अपने प्रभाव में लेता था। कभी ट्रांसफर-पोस्टिंग कराने तो कभी निवेश पर रकम दोगुनी करने का झांसा देकर उसने महिला दारोगा मोना सिकरवार समेत 50 से अधिक पुलिसकर्मियों से करोड़ों रुपये ऐंठ लिए। पीड़ित दारोगा की तहरीर पर हजरतगंज पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।
मामला सामने आने के बाद यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर आरोपी इतने लंबे समय तक पुलिसकर्मियों को ही अपने जाल में कैसे फंसाता रहा। आरोप है कि वह अपनी पहचान और पहुंच को लेकर ऐसा माहौल बनाता था जिससे सामने वाले को लगता था कि उसकी शासन और प्रशासन के बड़े अधिकारियों तक सीधी पहुंच है। इसी कथित प्रभाव का इस्तेमाल कर वह पुलिसकर्मियों का भरोसा जीतता था।
बताया जा रहा है कि आरोपी ने ठगी के लिए मुख्य रूप से दो तरीके अपनाए। पहला तरीका पुलिसकर्मियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़ी जरूरतों को निशाना बनाना था। वह कथित रूप से दावा करता था कि बड़े अधिकारियों से नजदीकी होने के कारण वह मनचाही जगह पर ट्रांसफर या पोस्टिंग करा सकता है। इसके बदले पुलिसकर्मियों से रकम लिए जाने का आरोप है।
दूसरा तरीका निवेश से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि जालसाज पुलिसकर्मियों को कम समय में पैसा दोगुना करने का लालच देता था। वह निवेश के नाम पर उनसे बड़ी रकम लेता और आकर्षक रिटर्न का भरोसा दिलाता था। बड़े अधिकारियों से संबंध होने का दावा करने के कारण कई लोग उसकी बातों पर भरोसा कर बैठे और अपनी रकम उसके पास लगा दी।
मामले में महिला दारोगा मोना सिकरवार भी पीड़ित बताई जा रही हैं। उनकी तहरीर के आधार पर हजरतगंज पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। शिकायत सामने आने के बाद कथित ठगी का दायरा बड़ा होने की बात सामने आई। आरोप है कि केवल एक या दो नहीं बल्कि 50 से अधिक पुलिसकर्मी उसके झांसे में आए हैं। इनसे ली गई कुल रकम करोड़ों रुपये में होने का दावा किया जा रहा है।
अब पुलिस आरोपी की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। उसके पकड़े जाने के बाद इस कथित नेटवर्क और लेनदेन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। यह भी पता लगाया जाना है कि आरोपी अकेले ही पूरा खेल चला रहा था या उसके साथ अन्य लोग भी जुड़े हुए थे। शासन में बड़े अधिकारियों से करीबी होने के उसके दावों की वास्तविकता भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है।
पुलिस के सामने एक अहम चुनौती कथित तौर पर ठगे गए सभी पुलिसकर्मियों की पहचान करने और उनसे जुड़े लेनदेन का पूरा विवरण जुटाने की भी है। यदि 50 से अधिक पुलिसकर्मियों से रकम लिए जाने का दावा सही पाया जाता है तो प्रत्येक लेनदेन की जांच से ठगी की कुल रकम और इसके तरीके की तस्वीर साफ हो सकेगी। बैंक खातों, डिजिटल भुगतान या अन्य माध्यमों से किए गए लेनदेन के रिकॉर्ड भी मामले में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
मामले में ट्रांसफर-पोस्टिंग के नाम पर रकम लिए जाने का आरोप भी गंभीर है। जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि आरोपी केवल बड़े अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को गुमराह करता था या वास्तव में किसी स्तर पर उसके संपर्क थे। जिन अधिकारियों या प्रभावशाली लोगों का नाम लेकर आरोपी भरोसा हासिल करता था, उनसे संबंधित दावों की भी सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
विधानभवन, लोकभवन और दारुलसफा जैसे महत्वपूर्ण स्थानों के आसपास आरोपी की कथित सक्रियता ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। ये इलाके प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र हैं। यहां अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में आरोपी ने कथित तौर पर इसी माहौल का फायदा उठाकर खुद को प्रभावशाली लोगों के संपर्क में होने का भरोसा दिलाया।
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि आरोपी के निशाने पर आम लोगों के बजाय बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी बताए जा रहे हैं। पुलिसकर्मी कानून और अपराध से जुड़े मामलों से रोजाना रूबरू होते हैं, इसके बावजूद कथित जालसाज द्वारा इतने पुलिसकर्मियों को अपने झांसे में लेने का आरोप कई सवाल खड़े कर रहा है।
हजरतगंज पुलिस अब आरोपी तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। उसके खिलाफ दर्ज मुकदमे के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है और संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ से यह पता चल सकेगा कि कथित ठगी कब से चल रही थी, कितने लोगों से रकम ली गई, पैसा कहां गया और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
फिलहाल मामला आरोप और दर्ज शिकायत के आधार पर जांच के दायरे में है। जांच पूरी होने के बाद ही ठगी की वास्तविक रकम, पीड़ितों की सही संख्या और आरोपी के कथित संपर्कों की स्थिति स्पष्ट होगी। पुलिस की जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू अब आरोपी को पकड़ना और पूरे मामले की कड़ियां जोड़ना है।