लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए बड़े पैमाने पर लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर अब हजारों उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बन गए हैं। प्रदेश में **42 हजार से अधिक स्मार्ट मीटर ऐसे पाए गए हैं जो लगाए जाने के बाद एक बार भी संचार नेटवर्क से नहीं जुड़े।** वहीं कुल **87 हजार से ज्यादा स्मार्ट मीटर फिलहाल कम्युनिकेशन नेटवर्क से बाहर** बताए गए हैं। नेटवर्क से संपर्क नहीं होने के कारण इन मीटरों से बिजली खपत की ऑनलाइन जानकारी, स्वचालित रीडिंग और समय पर बिलिंग जैसी सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं।
स्मार्ट मीटर परियोजना का उद्देश्य उपभोक्ताओं को बिजली की खपत की वास्तविक समय के करीब जानकारी उपलब्ध कराना, बिलिंग में पारदर्शिता बढ़ाना और मीटर रीडिंग से जुड़ी मानवीय गलतियों को कम करना है। लेकिन बड़ी संख्या में मीटरों का नेटवर्क से बाहर होना अब इसी डिजिटल व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने भी इन आंकड़ों को लेकर परियोजना की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष समीक्षा की मांग की है।
यूपी में लग चुके 96.88 लाख स्मार्ट मीटर
ताजा उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में **21 अगस्त 2026 तक 96.88 लाख स्मार्ट मीटर** लगाए जा चुके थे। स्मार्ट मीटरिंग की इस परियोजना पर करीब **27 हजार करोड़ रुपये** खर्च किए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
इतने बड़े निवेश के पीछे उद्देश्य था कि बिजली उपभोक्ताओं की मीटर रीडिंग और बिलिंग व्यवस्था आधुनिक हो। मीटर से डेटा अपने आप बिजली कंपनी के सिस्टम तक पहुंचे और उपभोक्ता भी ऑनलाइन अपनी खपत देख सकें।
लेकिन अगर स्मार्ट मीटर संचार नेटवर्क से जुड़ा ही नहीं है तो उसकी सबसे महत्वपूर्ण डिजिटल सुविधाएं काम नहीं कर पातीं।
इसी वजह से नेटवर्क से बाहर मीटरों की संख्या अब चिंता का विषय बन गई है।
42,947 मीटर कभी नेटवर्क में आए ही नहीं
सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा उन मीटरों का है जो इंस्टॉलेशन के बाद से कभी कम्युनिकेशन सिस्टम से जुड़ ही नहीं पाए।
रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे स्मार्ट मीटरों की संख्या **42,947** है।
इसके अलावा कुल **87,833 स्मार्ट मीटर संपर्क से बाहर** पाए गए हैं। यानी इनमें ऐसे मीटर भी शामिल हैं जो पहले नेटवर्क में थे लेकिन बाद में किसी वजह से उनका संचार टूट गया।
इन दोनों स्थितियों में अंतर महत्वपूर्ण है।
अगर कोई मीटर पहले ऑनलाइन था और बाद में ऑफलाइन हुआ तो उसके पीछे मोबाइल नेटवर्क, कम्युनिकेशन मॉड्यूल या दूसरी तकनीकी समस्या हो सकती है। लेकिन अगर कोई मीटर लगाने के बाद कभी ऑनलाइन ही नहीं आया तो इंस्टॉलेशन, नेटवर्क उपलब्धता या सिस्टम इंटीग्रेशन से जुड़े सवाल और गंभीर हो जाते हैं।
नेटवर्क नहीं तो स्मार्ट मीटर की सुविधाएं कैसे मिलेंगी?
स्मार्ट मीटर सामान्य इलेक्ट्रॉनिक मीटर से इस मायने में अलग है कि वह बिजली की खपत से संबंधित डेटा दूर बैठे सर्वर तक भेज सकता है।
इसके जरिए बिजली कंपनियां बिना कर्मचारी को घर भेजे मीटर की रीडिंग हासिल कर सकती हैं। उपभोक्ता भी डिजिटल माध्यम से अपनी बिजली खपत और बिल की जानकारी देख सकता है।
लेकिन इसके लिए मीटर और बिजली कंपनी के सर्वर के बीच कम्युनिकेशन जरूरी है।
अगर मीटर नेटवर्क से बाहर है तो डेटा समय पर सिस्टम तक नहीं पहुंचता। इसका सीधा असर बिलिंग और ऑनलाइन खपत की जानकारी पर पड़ सकता है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक नेटवर्क से बाहर स्मार्ट मीटरों के कारण कई उपभोक्ताओं के बिल ऑनलाइन नहीं हो पा रहे हैं और उन्हें अपेक्षित डिजिटल सेवाएं नहीं मिल रही हैं।
यही कारण है कि हजारों उपभोक्ताओं के लिए 'स्मार्ट' मीटर होने के बावजूद पुराने तरीके की समस्याएं बनी हुई हैं।
कानपुर क्षेत्र में स्थिति ज्यादा चिंताजनक
स्मार्ट मीटरों के नेटवर्क से बाहर होने की समस्या सभी क्षेत्रों में एक जैसी नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक **कानपुर शहर में संपर्क में नहीं रहने वाले स्मार्ट मीटरों का प्रतिशत 3.97 फीसदी** है। वहीं **कानपुर-झांसी-बांदा क्षेत्र में यह आंकड़ा 3.69 फीसदी** बताया गया है।
गोरखपुर-बस्ती क्षेत्र में नेटवर्क से बाहर मीटरों का प्रतिशत **2.73 फीसदी** है।
इसी तरह इंस्टॉलेशन के बाद एक बार भी नेटवर्क से नहीं जुड़ने वाले मीटरों में कानपुर-झांसी-बांदा क्षेत्र का प्रतिशत **3.46 फीसदी** और गोरखपुर-बस्ती क्षेत्र में **1.21 फीसदी** बताया गया है।
इन आंकड़ों से साफ है कि समस्या किसी एक शहर तक सीमित नहीं है।
गोरखपुर में अलग तकनीकी समस्या
स्मार्ट मीटर से जुड़ी परेशानी का एक दूसरा उदाहरण गोरखपुर में भी सामने आया है।
शहर में 2020-21 के दौरान करीब **54 हजार उपभोक्ताओं के यहां GE सीरीज के स्मार्ट मीटर** लगाए गए थे। अब इन पुराने मीटरों को हटाकर दूसरी कंपनी के नए स्मार्ट मीटर लगाने का काम किया जा रहा है।
समस्या तब सामने आ रही है जब पुराने GE मीटर वाले किसी उपभोक्ता की बिजली डिस्कनेक्ट हो जाती है।
रिपोर्ट के मुताबिक कुछ उपभोक्ताओं को बताया गया कि पुराने मीटर को दोबारा जोड़ने की सुविधा उपलब्ध नहीं है और बिजली बहाल करने के लिए पहले मीटर बदलना पड़ेगा। इसके कारण बिल जमा करने के बाद भी कुछ उपभोक्ताओं को बिजली बहाल होने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा।
यह मामला नेटवर्क से बाहर मीटरों की समस्या से अलग है, लेकिन स्मार्ट मीटरिंग व्यवस्था में सामने आ रही तकनीकी चुनौतियों को जरूर दिखाता है।
लखनऊ में भी हजारों कनेक्शन कटने से मची थी अफरातफरी
इससे एक दिन पहले राजधानी लखनऊ में भी स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा।
बकाया बिजली बिल के चलते लेसा ने करीब **5 हजार स्मार्ट मीटर वाले कनेक्शन** काट दिए थे। लखनऊ सेंट्रल क्षेत्र में ही 3,500 से ज्यादा परिवार प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई।
कई उपभोक्ताओं ने बिल जमा कर दिया, लेकिन तकनीकी कारणों से ऑटोमैटिक सिस्टम से बिजली तुरंत बहाल नहीं हो सकी।
इसके बाद हुसैनगंज, अमीनाबाद और चौक सहित विभिन्न बिलिंग केंद्रों पर उपभोक्ताओं की भीड़ लग गई। कुछ लोगों को बिजली बहाल कराने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। अधिकारियों ने EESL मीटर में तकनीकी कारणों से रिकनेक्शन में समय लगने की बात कही थी।
इस तरह नेटवर्क और रिकनेक्शन से जुड़ी अलग-अलग समस्याओं ने स्मार्ट मीटर व्यवस्था पर उपभोक्ताओं का ध्यान खींचा है।
प्रीपेड से पोस्टपेड किए गए स्मार्ट मीटर
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर पहले भी बड़ा विवाद हो चुका है।
शुरुआत में बड़ी संख्या में स्मार्ट मीटरों को प्रीपेड व्यवस्था में चलाया जा रहा था। लेकिन उपभोक्ताओं की शिकायतों और विवाद के बाद प्रदेश सरकार ने मई 2026 में **RDSS योजना के तहत लगाए गए सभी स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड मोड में संचालित करने** के निर्देश दिए थे।
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने उस समय कहा था कि स्मार्ट मीटरों को तत्काल प्रभाव से पोस्टपेड सिस्टम में बदला जा रहा है।
इसके बाद स्मार्ट मीटर तो बने रहे, लेकिन भुगतान और बिलिंग का तरीका पोस्टपेड कर दिया गया।
नेटवर्क की समस्या वाले क्षेत्रों में मीटर की रीडिंग मैन्युअली लेकर बिल तैयार करने की व्यवस्था की जानकारी भी सामने आई थी।
बिल नहीं आए तो खुद जनरेट करने की सुविधा
स्मार्ट मीटर लगाने के बाद कई उपभोक्ताओं को समय पर बिल नहीं मिलने की शिकायतें भी सामने आई थीं।
इसके समाधान के लिए UPPCL ने उपभोक्ताओं को अपने मोबाइल के जरिए बिजली बिल जनरेट करने की सुविधा शुरू की। उपभोक्ता UPPCL Consumer App पर मीटर रीडिंग दर्ज करके बिल तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक जानकारी जमा होने के बाद लगभग 24 घंटे के भीतर बिल तैयार होने की व्यवस्था बताई गई थी।
हालांकि नेटवर्क से बाहर स्मार्ट मीटरों की समस्या अलग है। ऐसे मामलों में स्मार्ट मीटर का डेटा अपने आप केंद्रीय सिस्टम तक पहुंचने का मूल उद्देश्य प्रभावित होता है।
उपभोक्ता परिषद ने उठाए गंभीर सवाल
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष **अवधेश कुमार वर्मा** ने नेटवर्क से बाहर मीटरों के आंकड़ों को लेकर स्मार्ट मीटर परियोजना पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने सरकार से पूरी परियोजना की निष्पक्ष उच्चस्तरीय समीक्षा कराने और कार्यदायी कंपनियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। उनका सवाल है कि इतनी बड़ी लागत वाली परियोजना में अगर हजारों मीटर नेटवर्क में नहीं आ रहे हैं तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है।
उपभोक्ता परिषद इससे पहले भी स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठा चुका है।
हाल ही में परिषद ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण यानी CEA को शिकायत भेजकर प्रदेश में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी। परिषद ने स्मार्ट मीटरों की जांच के लिए इस्तेमाल प्रयोगशाला के मान्यता प्राप्त दायरे को लेकर भी सवाल उठाए थे।
हालांकि पावर कॉरपोरेशन की जांच में परीक्षण किए गए स्मार्ट मीटरों को मानकों के अनुरूप सही बताया गया था।
27 हजार करोड़ की परियोजना इसलिए सवालों में
करीब 27 हजार करोड़ रुपये की बताई जा रही स्मार्ट मीटर परियोजना का पैमाना बहुत बड़ा है। प्रदेश में लगभग एक करोड़ मीटर लगाए जा चुके हैं। ऐसे में प्रतिशत के हिसाब से नेटवर्क से बाहर मीटरों की संख्या सीमित दिखाई दे सकती है, लेकिन वास्तविक संख्या में यह **87 हजार से अधिक उपभोक्ता कनेक्शनों** से जुड़ा मामला है।
स्मार्ट मीटर परियोजना का मूल आधार ही डिजिटल कम्युनिकेशन है।
अगर मीटर बिजली की खपत तो दर्ज कर रहा है लेकिन वह डेटा ऑनलाइन सिस्टम तक नहीं पहुंचा पा रहा है तो परियोजना का एक महत्वपूर्ण लाभ समाप्त हो जाता है।
इसलिए चुनौती केवल मीटर लगाने की संख्या बढ़ाने की नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करने की भी है कि लगाया गया हर मीटर ठीक तरीके से नेटवर्क में आए और लगातार डेटा भेजता रहे।
उपभोक्ता शिकायत करे तो क्या करे?
UPPCL की ओर से स्मार्ट मीटर संबंधी शिकायतों के लिए **1912 हेल्पलाइन** पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है।
UPPCL के आधिकारिक FAQ के मुताबिक 1912 पर शिकायत करने से उपभोक्ता को एक शिकायत नंबर मिलता है और मामला ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज हो जाता है। इससे शिकायत की स्थिति को ट्रैक किया जा सकता है और उच्च अधिकारी भी समाधान की निगरानी कर सकते हैं।
उपभोक्ता स्थानीय बिजली कार्यालय में भी अपनी समस्या बता सकता है, लेकिन निगम की सलाह है कि शिकायत को आधिकारिक रूप से रिकॉर्ड कराने के लिए 1912 का इस्तेमाल किया जाए।
स्मार्ट मीटर लगाने से ज्यादा जरूरी उन्हें 'स्मार्ट' रखना
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर परियोजना अब उस चरण में पहुंच गई है जहां केवल इंस्टॉलेशन की संख्या सफलता का पैमाना नहीं हो सकती।
21 अगस्त तक **96.88 लाख मीटर** लग जाना बड़ी संख्या है, लेकिन इनमें **87,833 का संपर्क से बाहर होना और 42,947 मीटरों का इंस्टॉलेशन के बाद कभी नेटवर्क में ही नहीं आना** तकनीकी व्यवस्था पर गंभीर सवाल जरूर खड़ा करता है।
सरकार और बिजली कंपनियों के सामने अब चुनौती नेटवर्क से बाहर मीटरों की पहचान कर उन्हें जल्द संचार व्यवस्था से जोड़ने की है। इसके साथ ही उन इलाकों में नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर की समीक्षा भी जरूरी होगी जहां बड़ी संख्या में मीटर ऑफलाइन हैं।
उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर का मतलब केवल घर की दीवार पर नया डिजिटल उपकरण लगना नहीं है। असली फायदा तभी मिलेगा जब बिजली की खपत ऑनलाइन दिखाई दे, रीडिंग समय पर सिस्टम में पहुंचे, बिल सही बने और शिकायत होने पर तेजी से समाधान हो।
फिलहाल हजारों उपभोक्ताओं के स्मार्ट मीटरों का नेटवर्क से बाहर होना इसी वादे और जमीनी हकीकत के बीच मौजूद तकनीकी अंतर को सामने ला रहा है।
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