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रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर के पहले CEO ट्रस्ट की बैठक में हुआ चयन

अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के प्रशासन और प्रबंधन को लेकर महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए रिटायर्ड इंडियन एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को मंदिर का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) चुना है। बुधवार को हुई ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में तीन शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों के नाम पर विचार-विमर्श के बाद जितेंद्र मिश्रा के नाम पर सहमति बनी। राम मंदिर के पहले CEO के रूप में उनका चयन मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक संगठित और पेशेवर बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
#BreakingNews | Air Marshal (Retd) Jitendra Mishra has been appointed as the Chief Executive Officer of the Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust, which oversees the Ram Mandir in #Ayodhya.#RamJanmabhoomi #AyodhyaRamMandir #RamMandir pic.twitter.com/jBtL6GBUKo
— DD News (@DDNewslive) September 2, 2026
जानकारी के मुताबिक श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने CEO पद के लिए चयन प्रक्रिया के बाद तीन उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया था। बुधवार को हुई बैठक में इन तीनों उम्मीदवारों के नाम, अनुभव और प्रशासनिक क्षमता पर चर्चा की गई। इसके बाद रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया गया।
"अयोध्या में श्री राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक चल रही है.. आज ट्रस्ट के पहले सीईओ का नाम तय होना है.. जितेंद्र मिश्रा के नाम पर मोहर लगभग लग चुकी है.. जल्द इसकी घोषणा की जाएगी.."
— Vivek K. Tripathi (@meevkt) September 2, 2026
महंत नृत्य गोपाल दास बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं जबकि बाकी लोग अपनी-अपनी बात रख रहे हैं..
चंदा चोरी… pic.twitter.com/r7t3XfAVsS
राम मंदिर के पहले CEO का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और दर्शन व्यवस्था के विस्तार के साथ प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। ऐसे में मंदिर परिसर के प्रशासन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, सुरक्षा से जुड़े समन्वय और विभिन्न व्यवस्थाओं को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए मजबूत प्रशासनिक ढांचे की जरूरत महसूस की जा रही थी।
रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का भारतीय वायुसेना में लंबा अनुभव रहा है। सैन्य सेवा के दौरान बड़े संगठनों और व्यवस्थाओं के संचालन का अनुभव मंदिर के प्रशासन में भी उपयोगी माना जा रहा है। ट्रस्ट को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में मंदिर की दैनिक प्रशासनिक व्यवस्था और अधिक प्रभावी तथा व्यवस्थित होगी।
CEO के रूप में उनकी भूमिका मंदिर की रोजमर्रा की व्यवस्था तक सीमित नहीं रहने की संभावना है। मंदिर परिसर से जुड़े अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय, कर्मचारियों की व्यवस्था, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का संचालन और भविष्य की योजनाओं को लागू करने जैसे कई महत्वपूर्ण काम उनके दायरे में आ सकते हैं।
राम मंदिर में देश के विभिन्न राज्यों के साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। प्रमुख धार्मिक अवसरों और त्योहारों पर श्रद्धालुओं की संख्या में कई गुना वृद्धि हो जाती है। ऐसे समय में भीड़ प्रबंधन, प्रवेश और निकास व्यवस्था, सुरक्षा तथा अन्य सुविधाओं को सुचारू रखना बड़ी चुनौती होती है।
CEO की नियुक्ति को इसी व्यापक प्रशासनिक आवश्यकता से जोड़कर देखा जा रहा है। मंदिर परिसर का विस्तार और उससे जुड़ी सुविधाओं का विकास लगातार जारी है। ऐसे में विभिन्न योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करने और उनकी निगरानी के लिए एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट राम मंदिर से जुड़े प्रमुख फैसले लेता है। मंदिर निर्माण से लेकर धार्मिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं तक विभिन्न विषयों पर ट्रस्ट के स्तर पर निर्णय लिए जाते हैं। अब CEO की नियुक्ति से रोजमर्रा की प्रशासनिक गतिविधियों के संचालन को अधिक संस्थागत रूप मिलने की उम्मीद है।
जितेंद्र मिश्रा का चयन तीन शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों में से किया गया है। इससे स्पष्ट है कि ट्रस्ट ने इस पद के लिए चयन प्रक्रिया अपनाई और विभिन्न विकल्पों पर विचार करने के बाद अंतिम निर्णय लिया। सैन्य पृष्ठभूमि से आने वाले मिश्रा के पास अनुशासन, नेतृत्व और बड़े स्तर पर व्यवस्थाओं के संचालन का अनुभव है।
राम मंदिर परिसर में व्यवस्था बनाए रखना सामान्य प्रशासनिक जिम्मेदारी से कहीं अधिक व्यापक काम है। यहां श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं के साथ उनकी सुविधा और सुरक्षा का भी ध्यान रखना होता है। त्योहारों और विशेष आयोजनों के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की संभावित आवाजाही को ध्यान में रखकर पहले से योजना तैयार करनी पड़ती है।
इसके अलावा मंदिर से संबंधित विभिन्न परियोजनाओं और सुविधाओं की निगरानी भी जरूरी होती है। पेयजल, स्वच्छता, कतार प्रबंधन, चिकित्सा सहायता, यातायात समन्वय और आपातकालीन व्यवस्थाओं जैसे कई क्षेत्रों में अलग-अलग एजेंसियों के साथ तालमेल की जरूरत पड़ सकती है।
CEO के रूप में जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ट्रस्ट उनकी जिम्मेदारियों का औपचारिक दायरा किस तरह तय करता है। उनकी नियुक्ति मंदिर प्रशासन के पेशेवर प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखी जा रही है।
अयोध्या में राम मंदिर के कारण धार्मिक पर्यटन में भी तेजी से वृद्धि हुई है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने से शहर की व्यवस्थाओं पर भी दबाव बढ़ा है। मंदिर प्रशासन और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय श्रद्धालुओं को सुविधाजनक अनुभव उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाता है।
राम मंदिर का महत्व केवल अयोध्या या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। देशभर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावी बनाए रखना ट्रस्ट की प्राथमिकताओं में शामिल माना जा रहा है।
रिटायर्ड एयर मार्शल को CEO चुनने के पीछे उनके लंबे प्रशासनिक और नेतृत्व अनुभव को महत्वपूर्ण माना जा सकता है। भारतीय वायुसेना जैसी बड़ी संस्था में काम करने के दौरान अनुशासन, संसाधन प्रबंधन और जटिल परिस्थितियों में निर्णय लेने का अनुभव मंदिर के संचालन में भी उपयोगी हो सकता है।
आने वाले समय में राम मंदिर परिसर से जुड़ी कई व्यवस्थाओं और विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाना है। इसके साथ श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासनिक ढांचे को भी मजबूत करने की आवश्यकता है। CEO की नियुक्ति इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
ट्रस्ट की बुधवार की बैठक में लिया गया यह फैसला इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि जितेंद्र मिश्रा राम मंदिर के पहले CEO होंगे। इस पद की शुरुआत के साथ मंदिर प्रशासन में जिम्मेदारियों का एक नया ढांचा स्थापित होने की उम्मीद है।
फिलहाल श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा रिटायर्ड इंडियन एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का चयन किए जाने के बाद उनकी नई भूमिका पर नजर रहेगी। मंदिर के पहले CEO के तौर पर उनके सामने श्रद्धालुओं की सुविधा, प्रशासनिक समन्वय और व्यवस्थाओं को प्रभावी तरीके से संचालित करने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी।





