उत्तर प्रदेश

राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव तीन नए सदस्यों के नाम तय

Ratna Netam
2 Sept 2026 4:59 PM IST
राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव तीन नए सदस्यों के नाम तय
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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े बदलाव की प्रक्रिया के बीच तीन नए सदस्यों के नाम सामने आए हैं। बुधवार 2 सितंबर को अयोध्या की मणिराम दास छावनी में हुई महत्वपूर्ण बैठक में अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता **मदन मोहन पांडेय**, दिल्ली के कारोबारी और सामाजिक कार्यकर्ता **महेश भागचंदका** तथा शिकोहाबाद की **निर्मला यादव** को ट्रस्ट में शामिल करने का फैसला किए जाने की खबर है। शुरुआती रिपोर्टों में तीसरे नाम के तौर पर जबलपुर की उर्मिला चतुर्वेदी का नाम सामने आया था, लेकिन बाद की कई रिपोर्टों में निर्मला यादव को नया ट्रस्टी बताया गया।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की यह बैठक कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नए सदस्यों के चयन के साथ ही मंदिर के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव, पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO के चयन और ट्रस्ट के कामकाज से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण विषयों पर भी मंथन किया गया।
पहले उर्मिला चतुर्वेदी फिर सामने आया निर्मला यादव का नाम
बुधवार दोपहर बैठक शुरू होने के बाद आई शुरुआती रिपोर्टों में बताया गया कि ट्रस्ट के तीन रिक्त पदों के लिए महेश भागचंदका, मदन मोहन पांडेय और उर्मिला चतुर्वेदी के नाम पर लगभग सहमति बन गई है। उस समय बैठक अनौपचारिक चरण में थी और ऑनलाइन जुड़ने वाले कुछ सदस्यों के आने के बाद कोरम पूरा होने की प्रतीक्षा की जा रही थी।
इसके कुछ समय बाद सामने आई रिपोर्टों में स्थिति बदल गई। इनमें बताया गया कि तीन नए ट्रस्टियों के रूप में मदन मोहन पांडेय, महेश भागचंदका और निर्मला यादव के नाम पर मुहर लगी है। आजतक, ABP, NDTV और TV9 की बाद की रिपोर्टों में भी तीसरे सदस्य के रूप में निर्मला यादव का नाम दिया गया है।
ऐसे में शुरुआती रिपोर्ट में आया उर्मिला चतुर्वेदी का नाम अंतिम सूची में नहीं दिखाई देता। ट्रस्ट की औपचारिक घोषणा और विस्तृत बयान इस संबंध में अंतिम स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट करेंगे।
कौन हैं मदन मोहन पांडेय?
तीन नए चेहरों में सबसे चर्चित नाम अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता **मदन मोहन पांडेय** का है। राम जन्मभूमि की लंबी कानूनी लड़ाई से उनका पुराना संबंध रहा है।
रिपोर्टों के मुताबिक मदन मोहन पांडेय ने राम जन्मभूमि विवाद में रामलला की ओर से लंबे समय तक कानूनी पैरवी की। इलाहाबाद हाई कोर्ट में चले राम जन्मभूमि विवाद से जुड़े मुकदमों में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
2019 में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आने के बाद रामलला की तरफ से कानूनी लड़ाई लड़ने वाले वकीलों के सम्मान कार्यक्रम में मदन मोहन पांडेय को भी सम्मानित किया गया था।
रिपोर्टों के अनुसार राम जन्मभूमि से जुड़े मुकदमों में उन्होंने ऐतिहासिक दस्तावेजों, पुरातात्विक साक्ष्यों और गवाहों के बयानों से जुड़े कानूनी पहलुओं पर काम किया था। अब उनका ट्रस्ट से जुड़ना कानूनी अनुभव के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कौन हैं महेश भागचंदका?
दूसरा नाम दिल्ली के **महेश भागचंदका** का है। वह कारोबारी और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े हुए हैं और राम मंदिर आंदोलन तथा उससे संबंधित संगठनों के साथ उनका पुराना जुड़ाव बताया जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक महेश भागचंदका M2K Group के चेयरमैन हैं। इसके अलावा वह अशोक सिंघल फाउंडेशन से भी जुड़े हैं।
राम मंदिर निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण धार्मिक कार्यक्रमों में भी उनकी मौजूदगी रही है।
रिपोर्टों के अनुसार अगस्त 2020 में अयोध्या में हुए राम मंदिर भूमि पूजन से जुड़े कार्यक्रमों में वह यजमान के रूप में शामिल हुए थे। जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान भी महेश भागचंदका और उनकी पत्नी सुनीता भागचंदका यजमानों में शामिल रहे।
इस तरह मंदिर निर्माण की प्रक्रिया से पहले से जुड़े व्यक्ति को अब ट्रस्ट के प्रबंधन में जिम्मेदारी मिलने जा रही है।
तीसरी सदस्य निर्मला यादव कौन हैं?
बाद की रिपोर्टों में तीसरे नए ट्रस्टी के तौर पर **निर्मला यादव** का नाम सामने आया है। उन्हें उत्तर प्रदेश के शिकोहाबाद का निवासी बताया गया है।
हालांकि मदन मोहन पांडेय और महेश भागचंदका की तुलना में निर्मला यादव की पृष्ठभूमि के बारे में फिलहाल सार्वजनिक रूप से बहुत कम जानकारी उपलब्ध है।
ट्रस्ट की ओर से औपचारिक रूप से नए सदस्यों का विस्तृत परिचय सामने आने के बाद निर्मला यादव के चयन और उनकी भूमिका से संबंधित ज्यादा जानकारी स्पष्ट हो सकती है।
उर्मिला चतुर्वेदी का नाम क्यों आया था?
इस पूरे घटनाक्रम में जबलपुर की **उर्मिला चतुर्वेदी** का नाम भी चर्चा में रहा।
शुरुआती रिपोर्ट में दावा किया गया था कि महेश भागचंदका और मदन मोहन पांडेय के साथ उर्मिला चतुर्वेदी के नाम पर लगभग सहमति बन चुकी है। उर्मिला चतुर्वेदी राम मंदिर निर्माण को लेकर अपने लंबे संकल्प के कारण पहले भी चर्चा में रही हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने राम मंदिर निर्माण का संकल्प लेते हुए करीब **28 वर्षों तक उपवास** रखा था। 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में राम मंदिर के भूमिपूजन के दिन उन्होंने अपना उपवास समाप्त किया था।
हालांकि बैठक आगे बढ़ने के बाद सामने आई रिपोर्टों में उनके स्थान पर निर्मला यादव का नाम दिया गया। इसलिए उर्मिला चतुर्वेदी को अंतिम रूप से ट्रस्टी चुना गया है, ऐसा कहना उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के आधार पर सही नहीं होगा।
मणिराम दास छावनी में हुई अहम बैठक
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक अयोध्या स्थित **मणिराम दास छावनी** में आयोजित की गई। यही ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास का निवास भी है।
बैठक में ट्रस्ट से जुड़े कई वरिष्ठ सदस्य और पदाधिकारी मौजूद रहे, जबकि कुछ सदस्यों ने ऑनलाइन माध्यम से हिस्सा लिया।
बैठक में नए सदस्यों की नियुक्ति के अलावा राम मंदिर के प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
ट्रस्ट में बदलाव क्यों हो रहे हैं?
राम मंदिर ट्रस्ट में नए सदस्यों की नियुक्ति ऐसे समय हो रही है जब ट्रस्ट अपने प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव की प्रक्रिया से गुजर रहा है।
राम मंदिर में दान से जुड़े कथित गबन के मामले के बाद ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठे थे। इस मामले में जांच और गिरफ्तारियों की खबरें भी सामने आईं।
इसी घटनाक्रम के बाद ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे को अधिक संस्थागत बनाने और वित्तीय निगरानी मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए।
रिपोर्टों के अनुसार पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दिया था। इसके बाद खाली हुए पदों और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर ट्रस्ट में मंथन शुरू हुआ।
पहली बार पूर्णकालिक CEO की तैयारी
बुधवार की बैठक का दूसरा बड़ा एजेंडा राम मंदिर के पहले पूर्णकालिक **मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO** का चयन है।
राम मंदिर परिसर और ट्रस्ट का कामकाज लगातार बढ़ने के बाद प्रशासनिक जिम्मेदारियों को पेशेवर तरीके से संचालित करने के लिए पूर्णकालिक CEO नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
CEO के चयन के लिए एक सर्च कमेटी गठित की गई थी। रिपोर्टों के मुताबिक इस समिति ने उम्मीदवारों के नामों का पैनल ट्रस्ट को सौंप दिया था।
अब ट्रस्ट को उनमें से किसी एक नाम का चयन करना है।
नए CEO के सामने मंदिर के रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज, विभिन्न समितियों के बीच समन्वय और वित्तीय प्रबंधन की निगरानी जैसी जिम्मेदारियां रह सकती हैं।
ट्रस्ट डीड में भी बदलाव संभव
बैठक केवल नए ट्रस्टी और CEO चुनने तक सीमित नहीं है।
रिपोर्टों के मुताबिक ट्रस्ट डीड में संशोधन पर भी विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य नए CEO की शक्तियों और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना तथा नए प्रशासनिक ढांचे को संस्थागत रूप देना है।
राम मंदिर का निर्माण और परिसर का विस्तार आगे बढ़ने के साथ ट्रस्ट के काम का दायरा भी काफी बड़ा हो गया है। हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंच रहे हैं।
ऐसे में धार्मिक व्यवस्था के साथ वित्त, सुरक्षा, श्रद्धालु सुविधाओं और मंदिर परिसर के संचालन को एक व्यवस्थित प्रशासनिक ढांचे में चलाने की जरूरत बढ़ी है।
15 सदस्यों का है ट्रस्ट
सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2019 के ऐतिहासिक फैसले के बाद केंद्र सरकार ने फरवरी 2020 में **श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट** का गठन किया था।
ट्रस्ट में कुल 15 सदस्यों की व्यवस्था की गई थी। मंदिर निर्माण, राम जन्मभूमि परिसर के विकास और उससे जुड़े प्रबंधन की प्रमुख जिम्मेदारी इसी ट्रस्ट के पास है।
समय के साथ कुछ सदस्यों के निधन और पद छोड़ने के कारण सीटें खाली हुईं। फरवरी 2025 में ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद उनकी जगह कृष्ण मोहन को शामिल किए जाने की रिपोर्ट है। अगस्त 2025 में ट्रस्ट सदस्य विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र का भी निधन हुआ था।
इसके बाद रिक्त स्थानों को भरने और संगठनात्मक व्यवस्था को नए सिरे से मजबूत करने की प्रक्रिया चल रही थी।
औपचारिक घोषणा पर रहेगी नजर
फिलहाल उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में मदन मोहन पांडेय, महेश भागचंदका और निर्मला यादव को नए सदस्य बताया गया है। कुछ रिपोर्टों में इन नामों पर मुहर लगने की बात कही गई है, जबकि औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की बात भी सामने आई है।
ऐसे में ट्रस्ट के आधिकारिक बयान का इंतजार महत्वपूर्ण रहेगा।
सबसे ज्यादा भ्रम तीसरे नाम को लेकर रहा। शुरुआती रिपोर्टों में उर्मिला चतुर्वेदी का नाम आया, लेकिन बाद में निर्मला यादव का नाम सामने आया। इसलिए ताजा उपलब्ध जानकारी के आधार पर **मदन मोहन पांडेय, महेश भागचंदका और निर्मला यादव** को तीन नए चेहरों के रूप में देखा जा रहा है।
इन नियुक्तियों के साथ राम मंदिर ट्रस्ट एक नए प्रशासनिक दौर में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है। अब सबसे बड़ी नजर पहले पूर्णकालिक CEO के नाम, उसकी शक्तियों और ट्रस्ट के नए प्रशासनिक ढांचे पर रहेगी।
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