उत्तर प्रदेश : विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनावी मैदान में इस बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले एनडीए और समाजवादी पार्टी (SP)-कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन के बीच सीधी टक्कर होने की संभावना जताई जा रही है। दोनों ही गठबंधन अपनी-अपनी रणनीति को मजबूत करने में जुटे हैं। इसी बीच सीट बंटवारे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एनडीए के सहयोगी दलों को लेकर बड़ा दावा किया है। अखिलेश यादव ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी अपने छोटे सहयोगी दलों को बड़ी संख्या में सीटें देने की तैयारी कर रही है। उन्होंने दावा किया कि पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण से डरकर भाजपा ने अपने सहयोगी दलों के लिए कुल 162 सीटों का बंटवारा किया है।

अखिलेश यादव ने एनडीए में शामिल छोटे दलों को मिलने वाली संभावित सीटों का आंकड़ा बताते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा को अपनी स्थिति कमजोर नजर आ रही है, इसलिए वह सहयोगी दलों के सहारे चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।

अखिलेश के दावे के मुताबिक, एनडीए में शामिल राष्ट्रीय लोक दल (RLD) को सबसे ज्यादा 73 सीटें दी जा रही हैं। इसके अलावा ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) को 39 सीटें, संजय निषाद की निषाद पार्टी को 31 सीटें और अनुप्रिया पटेल की अपना दल (एस) को 19 सीटें देने की बात कही जा रही है।

हालांकि, भाजपा या उसके सहयोगी दलों की ओर से इन सीटों के आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। सीट बंटवारे को लेकर अभी गठबंधन के भीतर बातचीत चल रही है और अंतिम फैसला चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए लिया जाएगा।

अखिलेश यादव ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि एनडीए को पीडीए की बढ़ती ताकत का डर है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की जनता बदलाव चाह रही है और पिछड़े, दलित तथा वंचित वर्गों का समर्थन इंडिया गठबंधन के साथ है।

वहीं, भाजपा लगातार दावा करती रही है कि उसका गठबंधन मजबूत है और सभी सहयोगी दल मिलकर चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करेंगे। भाजपा नेताओं का कहना है कि एनडीए सरकार की नीतियों और विकास कार्यों के आधार पर जनता एक बार फिर समर्थन देगी।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में छोटे दलों की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है। प्रदेश में जातीय और क्षेत्रीय समीकरण चुनाव परिणामों को प्रभावित करते हैं। यही वजह है कि भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों ही अपने गठबंधन को मजबूत करने के लिए छोटे दलों को साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

राष्ट्रीय लोक दल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रभाव रखने वाला दल माना जाता है। वहीं, निषाद पार्टी का निषाद समुदाय में प्रभाव है। अपना दल (एस) कुर्मी समाज के बीच अपनी पकड़ रखता है, जबकि सुभासपा पूर्वांचल की राजनीति में अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में दोनों प्रमुख गठबंधन इन दलों के जरिए अलग-अलग सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

समाजवादी पार्टी ने पिछले चुनावों में भी छोटे दलों के साथ गठबंधन कर चुनावी रणनीति बनाई थी। इस बार भी पार्टी कांग्रेस के साथ मिलकर भाजपा को चुनौती देने की तैयारी में है। दूसरी ओर भाजपा अपने पुराने सहयोगियों को साथ रखते हुए नए सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश कर रही है।

यूपी विधानसभा चुनाव में कुल 403 सीटें हैं और बहुमत के लिए 202 सीटों की जरूरत होती है। ऐसे में हर सीट का राजनीतिक महत्व बढ़ जाता है। गठबंधन के सहयोगियों को कितनी सीटें मिलेंगी, यह चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

फिलहाल अखिलेश यादव के बयान के बाद यूपी की सियासत में सीट बंटवारे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आने वाले दिनों में भाजपा और उसके सहयोगी दलों की ओर से सीटों को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। चुनावी समीकरणों के बीच गठबंधन की रणनीति और उम्मीदवार चयन पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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