Lucknow, लखनऊ : समाजवादी पार्टी के आधिकारिक 'एक्स' हैंडल से उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी की गई, जिसके बाद सोमवार को एडवोकेट प्रशांत सिंह अटल ने पार्टी नेतृत्व से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। उपमुख्यमंत्री पाठक का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता प्रशांत सिंह अटल ने टिप्पणियों को "गैर-जिम्मेदाराना और नीच" करार देते हुए कहा कि एक राजनीतिक दल का ऐसा आचरण अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और नागरिक संवाद में इसका कोई स्थान नहीं है।एएनआई से बात करते हुए अटल ने कहा, "हमने समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और मीडिया सेल के प्रमुख अखिलेश यादव से माफ़ी मांगने को कहा है। पोस्ट को हटा दिया जाना चाहिए और सार्वजनिक माफ़ी मांगी जानी चाहिए... अगर वे 15 दिनों के भीतर सार्वजनिक माफ़ी नहीं मांगते हैं, तो हम सिविल और आपराधिक अदालत में मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे।"
उन्होंने आगे कहा, "उन्होंने सारी हदें पार कर दी हैं। यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के खिलाफ 'एक्स' पर जिस तरह के पोस्ट शेयर किए गए हैं, वे किसी भी स्तर पर पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं। सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्हें तुरंत पोस्ट हटा देना चाहिए और माफ़ी मांगनी चाहिए। और यह सार्वजनिक माफ़ी होनी चाहिए - निजी माफ़ी नहीं, जहां वे बंद दरवाजों के पीछे ब्रजेश पाठक से मिलते हैं और माफ़ी मांगते हैं। अगर वे ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो हम उनके खिलाफ़ मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे।" उन्होंने कहा कि यह टिप्पणी राजनीतिक मर्यादा का घोर उल्लंघन है तथा मानहानि के समान है।

इस बीच, भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल के खिलाफ पार्टी के सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक पर 'अपमानजनक टिप्पणी' करने के लिए प्राथमिकी दर्ज की।यह शिकायत शनिवार को भाजपा लखनऊ इकाई की शिकायत पर दर्ज की गई। जिला भाजपा प्रमुख आनंद द्विवेदी ने हजरतगंज पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और आईटी अधिनियम की कई धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई।इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ब्रजेश पाठक ने पहले कहा था कि यह पोस्ट सपा की संस्कृति और मानकों पर खराब प्रभाव डालती है।
उन्होंने लिखा, "सपा मीडिया सेल के साथियों ने आलोचना करते हुए जो शब्द इस्तेमाल किए हैं, उन्हें पढ़कर ऐसा नहीं लगता कि यह पार्टी अब भी राम मनोहर लोहिया और जनेश्वर मिश्र की पार्टी है। तथाकथित "समाजवादी" जॉर्ज साहब की बात भूल गए हैं कि शिविर लगाकर लोगों को शिक्षित करना चाहिए। अखिलेश जी! सपा वालों को लोहिया-जेपी पढ़वाइए और पंडित जनेश्वर जी के भाषण सुनाइए, ताकि उनके आचरण और वाणी में समाजवाद झलके।"
उन्होंने लिखा, "अगर आपके पास लोहिया की किताबें नहीं हैं, तो मैं उन्हें उपलब्ध करा सकता हूं...हे महान लोहिया, जनेश्वर जी! इन मूर्खों को माफ कर दीजिए, इन्हें न कुछ पढ़ाया गया, न समझाया गया। इन्हें नहीं पता कि समाजवाद क्या होता है? इन्होंने समाजवाद को गाली, अहंकार और घटिया टिप्पणियों की प्रयोगशाला बना दिया है। अगर विपक्ष में रहते हुए इनका यह रूप है, तो सत्ता में रहते हुए इनका क्या हाल होता होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।"
उन्होंने कहा, "यह भी आश्चर्य की बात है कि अहंकार, अश्लीलता और अराजकता की संस्कृति के ये शिशुपाल अपने बचाव में योगेश्वर कृष्ण का नाम लेने की भी हिम्मत करते हैं। हे योगेश्वर कृष्ण, इन शिशुपालों के साथ वैसा ही व्यवहार करते रहो जैसा पिछले दस सालों से यूपी की जनता करती आ रही है। यही इनका हश्र होगा।" हालांकि सपा मीडिया सेल ने उक्त पोस्ट को हटा दिया है, लेकिन पाठक ने अपने एक्स अकाउंट से इसका स्क्रीनशॉट साझा किया है।
पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए पाठक ने सवाल किया कि क्या अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव ऐसी भ्रष्ट मानसिकता का समर्थन करेंगी। उन्होंने अपने पोस्ट के साथ लिखा, "अखिलेश जी, क्या यही आपकी पार्टी की भाषा है? यह आपकी पार्टी का आधिकारिक हैंडल है!! क्या किसी के दिवंगत माता-पिता के लिए शब्दों का यही चयन है? लोकतंत्र में सहमति-असहमति-आरोप-प्रत्यारोप तो चलते रहे हैं और चलते रहेंगे, लेकिन क्या आप अपनी पार्टी को इस स्तर पर ले आएंगे? क्या आदरणीय डिंपल जी इस महिला विरोधी और पतित मानसिकता को स्वीकार करेंगी?" (ANI)
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