औरैया। उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में करीब 16 वर्षीय किशोरी की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बेला-बिधूना मार्ग पर ग्राम दलपपुर मोड़ के पास वन विभाग की जमीन में दबे मिले शव की पहचान पुलिस ने 23वें दिन कर ली। इस हत्याकांड में किशोरी के पिता और उसके भांजे की कथित भूमिका सामने आई है। पुलिस के अनुसार, बार-बार घर से भागने की घटनाओं से नाराज पिता पर अपनी ही बेटी की हत्या करने और उसका शव जमीन में दबाने का आरोप है। मामले की जांच में मोबाइल फोन से मिली चैटजीपीटी से जुड़ी जानकारी भी महत्वपूर्ण कड़ी बनी है।
इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के मुताबिक, हत्या के बाद शव छिपाने के तरीकों की जानकारी लेने के लिए चैटजीपीटी का इस्तेमाल किए जाने के संकेत मिले हैं। संदिग्ध मोबाइल फोन की जांच में ऐसी जानकारी सामने आई, जिसके आधार पर पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और पूरे मामले की कड़ियां जोड़ते हुए किशोरी की पहचान कर ली।
20 सितंबर को जमीन में दबा मिला था किशोरी का शव
जानकारी के अनुसार, 20 सितंबर को बेला-बिधूना मार्ग पर ग्राम दलपपुर मोड़ के पास वन विभाग की जमीन में एक शव बरामद हुआ था। सड़क से करीब 50 मीटर अंदर बबूल के पेड़ों के बीच शव जमीन में दबा हुआ था। शुरुआत में शव की पहचान नहीं हो सकी थी।
शव मिलने के बाद पुलिस ने मृतका की पहचान और घटना के पीछे जिम्मेदार लोगों तक पहुंचने के लिए जांच शुरू की। पहचान नहीं होने के कारण मामले को सुलझाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ था।
पुलिस लगातार यह पता लगाने का प्रयास कर रही थी कि मृतका कौन थी, कहां की रहने वाली थी और उसका शव इस स्थान तक कैसे पहुंचा। आखिरकार 23वें दिन जांच में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई और मृतका की पहचान कन्नौज जिले की रहने वाली करीब 16 वर्षीय किशोरी के रूप में हुई।
बुआ के बेटे के मोबाइल से मिला अहम सुराग
हत्याकांड की जांच के दौरान पुलिस को किशोरी के बुआ के बेटे पर संदेह हुआ। इसके बाद पुलिस ने उसका मोबाइल फोन कब्जे में लेकर उसकी जांच की। इसी मोबाइल की पड़ताल में कुछ ऐसी जानकारी सामने आई, जिसने जांच को नई दिशा दी।
पुलिस के अनुसार, मोबाइल फोन में चैटजीपीटी से संबंधित ऐसी पूछताछ का पता चला, जिसमें हत्या के बाद शव को जमीन में दबाने और उसे ऐसी जगह छिपाने के तरीकों के बारे में सवाल किए गए थे, जहां कुत्ते भी न पहुंच सकें।
इस जानकारी के सामने आने के बाद पुलिस ने अन्य तथ्यों को जोड़ते हुए जांच आगे बढ़ाई। मोबाइल से मिले सुराग के आधार पर पुलिस किशोरी की पहचान और वारदात से जुड़े लोगों की भूमिका तक पहुंची।
हालांकि, एआई प्लेटफॉर्म से सवाल पूछे जाने की जानकारी अपने आप में हत्या का प्रमाण नहीं है। मामले में संबंधित व्यक्तियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए पुलिस को अन्य साक्ष्यों की भी जांच करनी होगी।
बार-बार घर से जाने की बात से नाराज था पिता
पुलिस की जांच में सामने आया है कि मृतका कन्नौज जिले के सदर कोतवाली क्षेत्र की रहने वाली थी। उसकी उम्र करीब 16 वर्ष थी। जांच के अनुसार, किशोरी पहले भी घर से चली गई थी। इसी बात को लेकर उसके पिता की नाराजगी की बात सामने आई है।
पुलिस का आरोप है कि इसी नाराजगी में पिता ने अपनी बेटी की हत्या कर दी। वारदात में उसके भांजे की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस ने इस मामले में पिता समेत दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है।
बुआ की ससुराल के पास दबाया गया शव
जांच के मुताबिक, हत्या के बाद किशोरी के शव को औरैया जिले के बेला थाना क्षेत्र में लाया गया। आरोप है कि पिता ने अपने भांजे की मदद से शव को अपनी बहन की ससुराल के पास वन विभाग की जमीन में दबा दिया।
जिस स्थान पर शव मिला था, वह सड़क से लगभग 50 मीटर अंदर बबूल के पेड़ों के बीच स्थित था। ऐसे स्थान पर शव मिलने के कारण शुरुआत में मृतका की पहचान नहीं हो सकी थी।
पुलिस ने शव की पहचान के लिए आसपास के जिलों में भी जानकारी जुटाई। जांच में सीसीटीवी फुटेज की भी मदद ली गई। इसके बाद मिले सुरागों के आधार पर पुलिस संदिग्धों तक पहुंची।
23 दिन बाद खुला हत्या का राज
करीब 23 दिनों तक चली जांच के बाद पुलिस किशोरी की पहचान करने और आरोपितों तक पहुंचने में सफल रही। इस मामले में मोबाइल फोन से मिली डिजिटल जानकारी भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।
पूरे घटनाक्रम में सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि हत्या का आरोप किशोरी के अपने पिता पर लगा है। पुलिस के मुताबिक, परिवार के भीतर नाराजगी के कारण यह वारदात हुई।
हालांकि, हत्या की पूरी परिस्थितियों, आरोपितों की अलग-अलग भूमिका और डिजिटल साक्ष्यों की प्रमाणिकता का अंतिम निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
यह मामला इस बात को भी सामने लाता है कि आपराधिक जांच में मोबाइल फोन और डिजिटल गतिविधियां महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकती हैं। फिलहाल पुलिस के खुलासे के बाद 20 सितंबर को मिले अज्ञात शव की गुत्थी सुलझ गई है।