प्रयागराज। प्रयागराज में मंगलवार सुबह दो अलग-अलग रेल हादसों में एक कुली की मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। प्रयागराज जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर चार पर कानपुर-चित्रकूट इंटरसिटी ट्रेन की चपेट में आने से 35 वर्षीय कुली जतन निषाद की जान चली गई। घटना सुबह करीब 9:50 बजे की बताई जा रही है, जब ट्रेन प्लेटफॉर्म पर प्रवेश कर रही थी। वहीं, गंगापार के फाफामऊ क्षेत्र में कान में मोबाइल की लीड लगाकर रेलवे पटरी पार कर रहा एक युवक ट्रेन की चपेट में आ गया। हादसे में उसके दोनों पैर कट गए। गंभीर हालत में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
दोनों घटनाओं के बाद रेलवे परिसर और आसपास के क्षेत्रों में लोगों के बीच चिंता का माहौल रहा। जंक्शन पर हुई घटना में जान गंवाने वाले जतन निषाद पिछले करीब 15 वर्षों से स्टेशन पर कुली का काम कर रहे थे। उनके परिवार में पत्नी, 10 साल का बेटा और बेटी हैं। उनकी मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
प्लेटफॉर्म नंबर चार पर ट्रेन की चपेट में आए कुली
प्रयागराज जंक्शन पर मंगलवार सुबह करीब 9:50 बजे कानपुर-चित्रकूट इंटरसिटी प्लेटफॉर्म नंबर चार पर प्रवेश कर रही थी। इसी दौरान 35 वर्षीय कुली जतन निषाद ट्रेन की चपेट में आ गए। हादसे में उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद स्टेशन पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलने पर संबंधित रेलकर्मी और पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। हादसे से जुड़े घटनाक्रम की जांच की जा रही है।
जतन निषाद मूल रूप से प्रयागराज के लालापुर थाना क्षेत्र के बमौर गांव के निवासी थे। वह शहर के करेलाबाग इलाके में किराए का कमरा लेकर रहते थे। पिछले 15 वर्षों से प्रयागराज जंक्शन पर कुली का काम करके परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे।
जतन की मौत की खबर से उनके परिवार और परिचितों को गहरा
सदमा
पहुंचा है। परिवार में पत्नी के अलावा 10 साल का बेटा और बेटी हैं। परिवार की जिम्मेदारी जतन के कंधों पर थी। ऐसे में उनकी असमय मौत के बाद परिवार के सामने आजीविका का संकट भी खड़ा हो गया है।
आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे जतन
साथी कुलियों के अनुसार, जतन निषाद लंबे समय से गंभीर आर्थिक तंगी का सामना कर रहे थे। उनका कहना है कि स्टेशन पर काम की कमी के कारण परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। कुली के रूप में मिलने वाली कमाई से घर की जरूरतें पूरी करना उनके लिए चुनौती बन गया था।
साथी कुलियों ने आर्थिक परेशानियों को उनकी स्थिति से जोड़कर देखा है। हालांकि, जतन की मौत के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों और घटना के कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
ऐसे मामलों में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों का इंतजार करना जरूरी है। घटना के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ।
जतन की मौत ने असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले उन श्रमिकों की चुनौतियों की ओर भी ध्यान खींचा है, जिनकी रोजाना की आय काम की उपलब्धता पर निर्भर करती है। परिवार की जिम्मेदारियों और सीमित आमदनी के बीच ऐसे श्रमिकों को कई तरह की आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
परिवार में पत्नी और दो बच्चे
जतन निषाद अपने परिवार के साथ करेलाबाग में किराए के कमरे में रहते थे। परिवार में पत्नी और 10 साल का बेटा-बेटी हैं। उनकी मौत के बाद परिजनों के सामने भावनात्मक दुख के साथ भविष्य की चिंता भी खड़ी हो गई है।
करीब 15 वर्षों तक स्टेशन पर कुली का काम करने वाले जतन की रोजी-रोटी इसी काम पर निर्भर थी। उनके परिवार की आगे की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता जताई जा रही है।
हालांकि, परिवार को किसी सरकारी सहायता या मुआवजे की घोषणा के संबंध में फिलहाल कोई पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस संबंध में आधिकारिक जानकारी सामने आने पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
फाफामऊ में पटरी पार करते समय ट्रेन की चपेट में आया युवक
दूसरी घटना गंगापार के फाफामऊ क्षेत्र में हुई। यहां कान में मोबाइल की लीड लगाकर रेलवे पटरी पार कर रहा एक युवक ट्रेन की चपेट में आ गया। हादसा इतना गंभीर था कि युवक के दोनों पैर कट गए।
घटना के बाद घायल युवक को गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसकी हालत को देखते हुए तत्काल उपचार की जरूरत पड़ी। युवक की पहचान और हादसे से जुड़ी अन्य परिस्थितियों के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
रेलवे पटरी पार करते समय आसपास से गुजरने वाली ट्रेनों पर ध्यान नहीं देने से गंभीर दुर्घटना होने का खतरा रहता है। कान में ईयरफोन या मोबाइल की लीड लगी होने पर ट्रेन की आवाज सुनाई नहीं देने की आशंका भी बढ़ सकती है। हालांकि, इस घटना में दुर्घटना की पूरी परिस्थितियों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
रेलवे ट्रैक पर सावधानी बरतने की जरूरत
प्रयागराज में एक ही सुबह दो अलग-अलग रेल हादसों का सामने आना चिंताजनक है। एक घटना में कुली की जान चली गई, जबकि दूसरी में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। ये घटनाएं रेलवे परिसर और पटरियों के आसपास सावधानी बरतने की जरूरत को रेखांकित करती हैं।
रेलवे ट्रैक पार करने के लिए निर्धारित रास्तों का ही इस्तेमाल करना चाहिए। पटरी पार करते समय मोबाइल फोन, ईयरफोन या अन्य ऐसी गतिविधियों से बचना जरूरी है, जिनसे आसपास की आवाजों और ट्रेन की आवाजाही पर ध्यान कम हो जाए।
फिलहाल, प्रयागराज जंक्शन पर कुली जतन निषाद की मौत और फाफामऊ में युवक के गंभीर रूप से घायल होने की घटनाओं ने लोगों को झकझोर दिया है। जतन के परिवार के सामने अब आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां हैं, जबकि घायल युवक का अस्पताल में उपचार जारी है। दोनों घटनाओं से जुड़े तथ्यों की पुष्टि संबंधित अधिकारियों की जांच और आधिकारिक जानकारी के आधार पर की जानी बाकी है।
Tags: