मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में दीपावली पार्टी के लिए शराब परोसने की अनुमति लेने के नाम पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। एक होटल में आयोजित होने वाली पार्टी के लिए वन-डे शराब लाइसेंस बनवाया गया था, लेकिन आबकारी विभाग की जांच में दस्तावेज फर्जी निकला। आरोप है कि जालसाज ने पहले से जारी सरकारी लाइसेंस में होटल का नाम, स्थान और तारीख बदलकर नया दस्तावेज तैयार किया। इसके बदले पार्टी आयोजक से दस हजार रुपये वसूल किए गए। मामले का खुलासा होने के बाद आबकारी विभाग के निरीक्षक ने आयोजक और कथित जालसाज के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
छह नवंबर को मुजफ्फरनगर के होटल स्वर्ण इन एंड सुईट्स में दीपावली पार्टी आयोजित की जानी थी। इस पार्टी में शराब परोसने की व्यवस्था भी की गई थी। इसके लिए आबकारी विभाग से इवेंट बार लाइसेंस यानी एफएल-11 लेना आवश्यक था। पार्टी आयोजक ने लाइसेंस बनवाने के लिए अपने परिचित की मदद ली, लेकिन उसे जो दस्तावेज दिया गया, वह जांच में फर्जी पाया गया। इस पूरे मामले का खुलासा होटल प्रबंधन की सतर्कता के कारण हुआ। होटल के फ्रंट ऑफिस मैनेजर ने शराब परोसने की अनुमति से जुड़े दस्तावेज के बारे में आबकारी निरीक्षक अनिल कुमार को जानकारी दी। मैनेजर ने बताया कि पार्टी के लिए प्रस्तुत लाइसेंस पर हार्दिक ओबराय का नाम दर्ज है।
लाइसेंस से जुड़ी जानकारी मिलने पर आबकारी निरीक्षक को दस्तावेज संदिग्ध लगा। इसके बाद अनिल कुमार अपनी टीम के साथ होटल पहुंचे और लाइसेंस की जांच शुरू की। विभागीय रिकॉर्ड से मिलान करने पर पता चला कि प्रस्तुत दस्तावेज में दर्ज विवरण वास्तविक लाइसेंस से मेल नहीं खा रहे थे। जांच में सामने आया कि जिस लाइसेंस को होटल स्वर्ण इन एंड सुईट्स में होने वाली पार्टी के लिए प्रस्तुत किया गया था, वह मूल रूप से किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर जारी हुआ था। जिला आबकारी अधिकारी कार्यालय ने पांच नवंबर को यह लाइसेंस मेरठ रोड स्थित मंसूरपुर के होटल ग्रांड रेडिएंट इन के लिए जारी किया था।
आरोप है कि जालसाज ने इसी असली लाइसेंस में छेड़छाड़ कर होटल का नाम और आयोजन की तारीख बदल दी। इसके बाद संशोधित दस्तावेज को वास्तविक सरकारी अनुमति के रूप में पार्टी आयोजक को सौंप दिया गया। इस प्रकार पहले से जारी लाइसेंस का इस्तेमाल कर फर्जी दस्तावेज तैयार करने का मामला सामने आया। आबकारी विभाग ने पार्टी के आयोजक हार्दिक ओबराय से पूछताछ की। हार्दिक मुजफ्फरनगर की गांधी कॉलोनी के निवासी बताए गए हैं। पूछताछ में उन्होंने बताया कि लाइसेंस अपने परिचित अर्पित चौधरी के माध्यम से बनवाया था।
आरोप है कि अर्पित चौधरी ने दो दिन के लिए शराब परोसने की अनुमति दिलाने के नाम पर दस हजार रुपये लिए थे। जबकि आबकारी विभाग के अनुसार, वन-डे लाइसेंस जारी करने का निर्धारित शुल्क 11 हजार रुपये है। इस तरह वास्तविक सरकारी शुल्क से कम रकम लेकर दो दिन की अनुमति देने का दावा किया गया था। आबकारी निरीक्षक अनिल कुमार ने बताया कि दस्तावेज की जांच में सरकारी लाइसेंस के साथ छेड़छाड़ की पुष्टि हुई। लाइसेंस में स्थान और तारीख बदलकर उसका इस्तेमाल दूसरे आयोजन के लिए किया जा रहा था। विभाग ने इसे सरकारी दस्तावेज में अनधिकृत परिवर्तन और फर्जी दस्तावेज को वास्तविक बताकर उपयोग करने का मामला माना है।
जांच के दौरान आबकारी टीम ने होटल परिसर की तलाशी भी ली। हालांकि, होटल से किसी प्रकार की अवैध शराब बरामद नहीं हुई। इसके बावजूद फर्जी लाइसेंस तैयार करने और उसके इस्तेमाल के मामले को गंभीर मानते हुए कानूनी कार्रवाई की गई। आबकारी निरीक्षक की शिकायत के आधार पर सिविल लाइंस थाने में पार्टी आयोजक हार्दिक ओबराय और अर्पित चौधरी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस अब मामले में संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और दस्तावेज तैयार किए जाने की परिस्थितियों की जांच करेगी।
इस प्रकरण में आबकारी विभाग के किसी कर्मचारी की संभावित मिलीभगत को लेकर भी चर्चा सामने आई है। हालांकि, किसी कर्मचारी की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि सरकारी लाइसेंस की जानकारी और दस्तावेज तक कथित जालसाज की पहुंच किस प्रकार हुई। जिला आबकारी अधिकारी रवि शंकर ने सरकारी दस्तावेज में फर्जीवाड़े को गंभीर अपराध बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग की ओर से वन-डे लाइसेंस निर्धारित शुल्क पर जारी किया जाता है। ऐसे में किसी दूसरे आयोजन के लिए जारी लाइसेंस में परिवर्तन कर उसका इस्तेमाल करना नियमों का उल्लंघन है।
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