उत्तर प्रदेश

जलभराव पर भारी पड़ी आस्था, गाजियाबाद में रामलीला जारी

Rajeshwari Nishad
13 Oct 2026 1:05 PM IST
जलभराव पर भारी पड़ी आस्था, गाजियाबाद में रामलीला जारी
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गाजियाबाद। बारिश ने शहर के रामलीला मैदानों में आयोजकों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। कई मैदानों में जलभराव और कीचड़ की स्थिति बनने से रामलीला के मंचन और श्रद्धालुओं की आवाजाही पर असर पड़ने की आशंका पैदा हो गई। इसके बावजूद राम भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। आयोजक दिनभर मैदानों से पानी निकालने, कीचड़ हटाने और व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुटे रहे। उनकी मेहनत रंग लाई और रात होते-होते रामलीला का मंचन शुरू हो गया। इसके साथ ही मैदानों में एक बार फिर भक्ति और उत्साह का माहौल दिखाई देने लगा।
राजनगर एक्सटेंशन, विजय नगर और घंटाघर समेत शहर के विभिन्न रामलीला मैदानों में बारिश के बाद जलभराव की स्थिति बनी थी। मैदानों में पानी जमा होने से श्रद्धालुओं के बैठने, आने-जाने और आयोजन से जुड़ी दूसरी व्यवस्थाओं को लेकर आयोजकों की चिंता बढ़ गई थी। हालांकि, आयोजकों ने हार मानने के बजाय तत्काल व्यवस्था सुधारने पर ध्यान दिया। कहीं पानी निकालने के लिए पंप लगाए गए, तो कहीं मिट्टी और बालू डालकर मैदान को चलने लायक बनाने का प्रयास किया गया।
दिनभर पानी निकालने में जुटे रहे आयोजक
बारिश के बाद रामलीला मैदानों में जमा पानी को निकालना आयोजकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया था। मैदानों में पानी जमा रहने से न केवल दर्शकों को परेशानी हो सकती थी, बल्कि मंचन से जुड़ी व्यवस्थाएं भी प्रभावित होने का खतरा था। ऐसे में आयोजकों और व्यवस्था संभालने वाले लोगों ने दिनभर मैदानों को दुरुस्त करने में मेहनत की।
जलभराव वाले स्थानों से पानी निकालने के लिए पंपों का सहारा लिया गया। जिन जगहों पर कीचड़ और फिसलन की समस्या थी, वहां मिट्टी और बालू डालकर रास्तों को बेहतर बनाने की कोशिश की गई। मैदानों में श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारु रखने और आयोजन को समय पर शुरू करने के लिए व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया।
आयोजकों के सामने चुनौती केवल पानी निकालने तक सीमित नहीं थी। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना था कि रामलीला देखने आने वाले लोगों को मैदान में पहुंचने और बैठने में कम से कम परेशानी हो। इसी वजह से दिनभर तैयारियों का दौर जारी रहा।
राजनगर एक्सटेंशन से घंटाघर तक दिखा बारिश का असर
शहर के राजनगर एक्सटेंशन, विजय नगर और घंटाघर समेत कई रामलीला मैदानों में वर्षा के बाद जलभराव की स्थिति देखने को मिली। बारिश के कारण मैदानों की जमीन गीली हो गई थी और कुछ स्थानों पर कीचड़ तथा फिसलन की समस्या भी पैदा हो गई थी।
रामलीला के आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए इन परिस्थितियों में व्यवस्थाएं संभालना जरूरी था। आयोजकों ने मैदानों की स्थिति सुधारने के लिए लगातार काम किया, ताकि रात में मंचन के दौरान श्रद्धालुओं को अधिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
मैदानों में पानी जमा होने से आयोजन की तैयारियों पर असर पड़ने की आशंका जरूर बनी, लेकिन आयोजकों ने कार्यक्रम को जारी रखने के लिए प्रयास नहीं छोड़े। बारिश के बाद की परिस्थितियों से निपटने में उनकी सक्रियता ने रामलीला के मंचन को आगे बढ़ाने में मदद की।
श्रद्धालुओं के उत्साह पर नहीं पड़ा असर
बारिश और जलभराव के बावजूद रामलीला को लेकर श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। दिनभर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के बाद जब रात में मंचन शुरू हुआ, तो मैदानों में फिर से धार्मिक माहौल दिखाई देने लगा। रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन और आदर्शों को देखने-सुनने के लिए पहुंचने वाले लोगों की आस्था मौसम की चुनौती के सामने कमजोर नहीं पड़ी।
रामलीला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण उत्सव भी है। हर साल इन आयोजनों के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन, मर्यादा, सत्य और धर्म के संदेश को लोगों तक पहुंचाया जाता है। यही वजह है कि प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद आयोजक कार्यक्रम को जारी रखने के लिए हरसंभव प्रयास करते हैं।
बारिश के बाद मैदानों में पैदा हुई परेशानी के बीच भी मंचन शुरू होना आयोजन से जुड़े लोगों के लिए राहत की बात रही। दिनभर की मेहनत के बाद रात में जब रामलीला का मंचन हुआ, तो मैदानों में फिर से भक्ति का माहौल बन गया।
व्यवस्थाएं सुधारने में जुटे रहे आयोजक
रामलीला मैदानों में जलभराव की समस्या ने यह भी दिखाया कि खुले मैदानों में बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के दौरान मौसम से जुड़ी चुनौतियों के लिए तैयारी कितनी जरूरी है। बारिश होने पर पानी की निकासी, दर्शकों की सुरक्षित आवाजाही और मंच के आसपास की व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है।
आयोजकों ने तत्काल कदम उठाकर मैदानों को उपयोग के लायक बनाने की कोशिश की। पानी निकालने के लिए पंप लगाना और कीचड़ वाले हिस्सों में मिट्टी तथा बालू डालना इसी दिशा में किए गए प्रयासों का हिस्सा रहा। इन व्यवस्थाओं से रात में कार्यक्रम शुरू करने का रास्ता तैयार हुआ।
हालांकि, जलभराव और फिसलन की स्थिति में श्रद्धालुओं को सावधानी बरतने की जरूरत बनी रहती है। ऐसे आयोजनों में मैदान की स्थिति पर नजर रखना और आवाजाही के रास्तों को सुरक्षित बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है।
आस्था के आगे बारिश की चुनौती नहीं हुई भारी
शहर के रामलीला मैदानों में बारिश के बाद पैदा हुई मुश्किलों के बावजूद आयोजन जारी रहना श्रद्धालुओं और आयोजकों के उत्साह को दर्शाता है। दिनभर पानी निकालने और मैदानों को व्यवस्थित करने की कोशिशों के बाद रात में मंचन शुरू हुआ, जिससे रामलीला का माहौल फिर जीवंत हो उठा।
राजनगर एक्सटेंशन, विजय नगर और घंटाघर समेत विभिन्न मैदानों में जलभराव ने आयोजकों की परीक्षा जरूर ली, लेकिन उनकी मेहनत से कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में मदद मिली। बारिश के कारण पैदा हुई बाधाओं के बावजूद रामलीला का मंचन जारी रहने से श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह का माहौल बना रहा।
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