सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर की अधिवक्ता फरहा फैज मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई में एक चर्चित नाम बनकर उभरी हैं। तीन तलाक, बहुविवाह और निकाह हलाला जैसी प्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाने वाली फरहा फैज ने महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ी। सामाजिक रूढ़ियों और महिला उत्पीड़न के खिलाफ उनकी सक्रियता लंबे समय से जारी है। धमकियों और हमलों के बावजूद उन्होंने अपने अभियान को जारी रखा है। महिला अधिकारों के साथ-साथ सरकारी योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार के मामलों को भी उन्होंने उठाया है।
फरहा फैज का कहना है कि मुस्लिम महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए। उनके अनुसार, कई महिलाएं सामाजिक दबाव और धार्मिक परंपराओं की अलग-अलग व्याख्याओं के कारण अपने कानूनी अधिकारों का उपयोग नहीं कर पाती हैं। उन्होंने महिलाओं की समस्याओं को करीब से देखने के बाद कानूनी माध्यम से उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया। वर्ष 2016 में फरहा फैज ने सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पर्सनल लॉ के संहिताकरण और तीन तलाक तथा बहुविवाह जैसी प्रथाओं के खिलाफ हस्तक्षेप याचिका दायर की थी। उनका तर्क था कि तलाक-ए-बिद्दत महिलाओं के सम्मानजनक जीवन और समान अधिकारों के लिए गंभीर समस्या है। उन्होंने अदालत में इस प्रथा की वैधता पर सवाल उठाते हुए महिलाओं को कानूनी सुरक्षा दिए जाने की आवश्यकता बताई।
22 अगस्त 2017 को सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने तत्काल तीन तलाक की प्रथा को अमान्य ठहराया। यह फैसला मुस्लिम महिलाओं के वैवाहिक अधिकारों से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण माना गया। फरहा फैज भी इस मामले की कानूनी कार्यवाही से जुड़ी थीं। उन्होंने अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की भूमिका और अधिकारों को लेकर भी अदालत में अपनी दलीलें रखी थीं। तीन तलाक के खिलाफ अभियान चलाने के दौरान फरहा फैज को विरोध का सामना भी करना पड़ा। वर्ष 2017 में सहारनपुर में उनके साथ मारपीट किए जाने की घटना सामने आई थी। उस समय उन्होंने आरोप लगाया था कि महिलाओं के अधिकारों के लिए आवाज उठाने के कारण उन्हें धमकियां मिल रही थीं। इसके बावजूद उन्होंने अपने अभियान को जारी रखा।
फरहा फैज का जन्म 22 नवंबर 1972 को सहारनपुर के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता हाफिज फैज मोहम्मद धार्मिक विद्वान थे। फरहा ने बीएससी, बीएड और बीटीसी की शिक्षा प्राप्त की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने समाजसेवा और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर काम करना शुरू किया। वर्ष 1997 में फरहा फैज महिला एवं बाल विकास समिति नामक गैर सरकारी संगठन से जुड़ीं। इस दौरान उन्होंने झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाली महिलाओं और बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी समस्याओं पर काम किया। समाजसेवा के दौरान महिलाओं की कठिनाइयों को समझने का अवसर मिला। इसके बाद उन्होंने महिला अधिकारों से जुड़े कानूनी मुद्दों पर अधिक सक्रियता दिखाई।
फरहा फैज ने वर्ष 2003 में विनोद वर्मा से विवाह किया था। वर्ष 2022 में पति के निधन के बाद भी उन्होंने अपने सामाजिक और कानूनी अभियान को जारी रखा। उनका मानना है कि महिलाओं को अपने अधिकारों की जानकारी होना और आवश्यकता पड़ने पर अदालत की सहायता लेना बेहद जरूरी है। महिलाओं के वैवाहिक अधिकारों के अलावा फरहा फैज ने समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर भी अपना पक्ष रखा है। उनका मानना है कि समान नागरिक संहिता लागू होने से महिलाओं को विवाह, तलाक और अन्य पारिवारिक मामलों में अधिक कानूनी सुरक्षा मिल सकती है। समान नागरिक संहिता को लेकर देश में अलग-अलग कानूनी और सामाजिक दृष्टिकोण मौजूद हैं।
फरहा फैज ने सरकारी योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ भी आवाज उठाई है। सहारनपुर में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत मकान आवंटन में लाभार्थियों से अवैध रकम वसूले जाने के आरोपों को उन्होंने प्रशासन के सामने रखा था। इस संबंध में उन्होंने लगभग 500 लोगों की सूची अधिकारियों को सौंपकर जांच की मांग की थी। प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, जांच के बाद पांच कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इस प्रकरण के माध्यम से फरहा फैज ने सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने और कथित अनियमितताओं के खिलाफ जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
फरहा फैज का कहना है कि महिलाओं को केवल सामाजिक समर्थन ही नहीं, बल्कि अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी भी मिलनी चाहिए। शिक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और न्याय तक पहुंच को वह महिला सशक्तीकरण के लिए महत्वपूर्ण मानती हैं। तीन तलाक के खिलाफ कानूनी लड़ाई से लेकर सरकारी योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाने तक फरहा फैज की सक्रियता कई क्षेत्रों में रही है। सहारनपुर से शुरू हुआ उनका अभियान मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और कानूनी जागरूकता से जुड़ी चर्चाओं में एक महत्वपूर्ण आवाज के रूप में सामने आया है।
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