अयोध्या (यूपी): अधिकारियों ने बताया कि भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या में शनिवार को सरयू नदी के तट पर 'दीपोत्सव' का 10वां संस्करण मनाया गया, जिसमें 36 लाख से अधिक मिट्टी के दीये जलाए गए। इस साल के आयोजन में 2025 की तुलना में लगभग 10 लाख अधिक दीये जलाए गए। बता दें कि 2025 में इसी आयोजन को 'गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में जगह मिली थी। राज्य सरकार के अनुसार, 2025 में दीपोत्सव के 9वें संस्करण में दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बने थे—एक साथ 26,17,215 दीये जलाना और 2,128 लोगों का एक साथ 'आरती' करना।
शनिवार देर शाम जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, 'राम की पैड़ी' सहित 56 घाटों पर 36 लाख से अधिक दीये जलाए गए, जिससे ऐसा माहौल बन गया मानो त्रेता युग (भगवान राम का युग) फिर से जीवंत हो उठा हो। इस उत्सव के दौरान उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'राम की पैड़ी' पर दीये जलाए।
इसके अलावा, अतिथियों ने उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित एक भव्य लेज़र शो भी देखा। इसमें 3D होलोग्राफिक प्रोजेक्शन मैपिंग और रामायण की विभिन्न घटनाओं को दर्शाने वाली लाइव प्रस्तुतियां शामिल थीं। अयोध्या में भगवान राम के आगमन के उपलक्ष्य में आतिशबाजी भी की गई। पूरे शहर में मंदिरों, संकरी गलियों, मुख्य सड़कों, सरकारी और धार्मिक इमारतों को रोशनी से सजाया गया था, जिससे एक अद्भुत नज़ारा देखने को मिला। स्थानीय लोगों ने भी इस अवसर पर अपने घरों में दीये जलाए।
इस उत्सव में शामिल होने के लिए देश भर से श्रद्धालु और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से पर्यटक पहुंचे। पूरे शहर और सरयू नदी के तट पर "श्री राम, जय राम, जय जय राम", "जय सिया राम" और "सियावर रामचंद्र की जय" के जयकारे गूंजते रहे। आधिकारिक बयान के अनुसार, डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, विभिन्न कॉलेजों, इंटरमीडिएट कॉलेजों और स्वयंसेवी संस्थाओं के 35,000 से अधिक स्वयंसेवकों ने 56 घाटों पर दीये सजाने, उनमें तेल और बत्तियां डालने तथा उन्हें जलाने में मदद की। अयोध्या भर में घरों, मठों, मंदिरों, आश्रमों, सार्वजनिक इमारतों और चौराहों पर दीये जलाए गए।
इससे पहले, मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ राम कथा पार्क में अनुष्ठान किए और भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, हनुमान और ऋषियों की पूजा-अर्चना की। उन्होंने देवी-देवताओं को तिलक लगाया, फूलों की मालाएं अर्पित कीं और पूजा की। आदित्यनाथ, संतों और मंत्रियों ने मंच पर भगवान राम के प्रतीकात्मक राज्याभिषेक में भी हिस्सा लिया। इस उत्सव के दौरान भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता का एक प्रतीकात्मक 'पुष्पक विमान' से आगमन हुआ। जब यह झांकी अयोध्या पहुंची, तो एक हेलीकॉप्टर से फूलों की वर्षा की गई।
आदित्यनाथ, उनके उप-मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों और अन्य जन प्रतिनिधियों ने भगवान राम, लक्ष्मण और सीता के प्रतीकात्मक स्वरूपों वाले रथ को खींचा, जिसे देखकर वहां मौजूद भक्त भावविभोर हो गए। वैदिक विद्वानों ने भगवान राम के प्रतीकात्मक स्वरूप की उपस्थिति में सरयू आरती की। नदी के किनारे बनाए गए विशेष मंचों पर आदित्यनाथ, उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों, संतों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी आरती में भाग लिया।
इस उत्सव में स्वदेशी ड्रोन शो भी आयोजित किया गया, जिसमें आसमान में ड्रोन की मदद से भगवान राम और रामायण के दृश्यों की आकृतियां बनाई गईं, जिससे अयोध्या का आकाश जगमगा उठा। उत्तर प्रदेश और कई अन्य राज्यों के कलाकारों ने अपनी-अपनी लोक परंपराओं पर आधारित प्रस्तुतियां दीं। बयान में कहा गया है कि भगवान राम के आगमन पर भव्य आतिशबाजी भी की गई।